दिल की दास्तान..
दिल की दास्तान..
इक सबब पूछना है तुम से
के आशिक जो कर गये हो
क्या जिंदगी भर तडपाओगे यूँ ही
मुहब्बत जो कर गये हो
कब खोलोगे ये चुप्पी
कब गलती मान लोगे
इश्क़ बस तेरे लिये है मेरा
मेरे बिना बोले...कब जान लोगे..
इस दुनिया से बेगना हो गया हूँ
कब अपना मान लोगे
बेगुनाह इस दिल की इश्क़ की दासताँ कब जान लोगे!

