STORYMIRROR

Gangadhar joshi

Romance

3  

Gangadhar joshi

Romance

उल्का

उल्का

1 min
434

लटपट नार करके सिंगार

लटपट चाल चले नदी किनार

छम छम् घुंगरू बाजे पायल

पतली कमरिया हीले कोमल


चंदा जैसा तेरा मुख कमल

चंदन जैसी कोमल बदन

नाद मधुर तेरे बोले कंगन

तुझे देख केहता हैं मेरा मन 


लग न जाय रावण की नजर

खुदा ने भेजा रहमो कर्म

मेरा दिल गिर गया तेरे पाँव तले

आ तरन्नुम लग जा गले


एक चतुर नार मेरे आजा घर

लग जये मेरी तुम्हे लंबी उमर

बसा लूँगा मेरे दिल के पास

ये नट खट नार तुझी से हो गया प्यार।


साहित्याला गुण द्या
लॉग इन

Similar marathi poem from Romance