STORYMIRROR

Mrudula Raje

Romance

4  

Mrudula Raje

Romance

प्रणय-घटिका

प्रणय-घटिका

1 min
629

तो सूर्यसखा , ती चंद्रमुखी |

लागली फुलू त्यांच्यात प्रीती |

तो कणखर , प्रखर भास्कर तो |

ती चंद्रशिखा , नाजूक रती || 


जग जिंकावे , हे त्याला ठावे |

तिज वाटे , समर्पण साधावे |

"मारीन लाथ , काढीन पाणी" |

हे तत्त्व मनावर तो ठसवे ||


ती स्नेहशील , ती प्रेमधुंद |

तिज आवड चांदण्या रातीची |

तो प्रकाशपुंज , तेजस्वी रवी |

परी आस त्यास , तिच्या प्रीतीची ||


ही कशी प्रीती , हे प्रेम कसे |

मिळणार चंद्र-सूर्य कोठे नि कसे |

परी प्रीत-जगाची नवलपरी |

मिलन-आस लाविते प्रणय-पिसे ||


कधी श्यामल क्षितिज रेषेवरती |

त्यजुनी प्रकाश थांबे सूर्यसखा |

त्या भेटाया आतुर चंद्रमुखी |

मिलन-मुहूर्त साधतसे नवखा ||


ती केशर-शेला पांघरुनी |

ये रुणझुण पाउली अस्मानी |

पाहता तिचे लोभस रूपडे |

चांदणे विखुरले नील-गगनी ||


तिज पाहुनी तो सस्मित प्रेमी |

विसरून भान अंतर्यामी |

होतसे विलीन तिच्या हृदयी |

त्यागितो अहंता निजकर्मी ||


हा सूर्य , ही चंद्रिका जणू |

हे प्रेम तयांचे आनंदघनु |

ह्या पावन प्रणय-घटिकेला

रोमांचित होतसे हर्षित तनू ||


Rate this content
Log in

Similar marathi poem from Romance