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Shravani Balasaheb Sul

Classics

3  

Shravani Balasaheb Sul

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कृपा सिंधु

कृपा सिंधु

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202

कृपा सिंधु सुखधाम राम

शिवै शिवम् घनश्याम राम

अशांत चित्त विश्राम राम

दुःख हारक मधुनाम राम 


श्वासात दरवळता भक्तिगंध राम

मनास मोहणारा एक छंद राम

कणाकणात सामिल स्वच्छंद राम

आत्म्यास स्पर्शितो तो स्पंद राम


सुख दुःख विदारक युक्ती राम

हृदयास साद जी भक्ती राम

बल धर्म प्रदारक शक्ती राम

भावबंधनातून मुक्ती राम

 


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