Uma Vaishnav

Drama


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Uma Vaishnav

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वेद यंत्र

वेद यंत्र

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वेद बहुत बुद्धिमान और जिज्ञासु लड़का था। हमेशा किसी न किसी चीज में कुछ ना कुछ ढूंढता ही रहता था। वह अक्सर अपने खिलौनों को तोड़ मरोड़ कर फिर से जोड़ता रहता था। स्कूल में भी उसके कई अध्यापक उसकी इस जिज्ञासु स्वाभाव से परेशान हो जाते थे। मिश्रा जी जो कि साइंस के नये अध्यापक थे।

उनको वेद जैसे विद्यार्थी बहुत पसंद थे। वह उसके सभी सवालों का जवाब देते। वेद उनसे भी कुछ ना कुछ नये सवाल पूछता ही रहता था। मिश्रा जी अक्सर बच्चों को ज्ञान विज्ञान की बातें बताते इतना ही नहीं पौराणिक ग्रंथों का संबंध भी आज के युग से बताते। एक दिन जब क्लास चल रही थी तब मिश्रा जी ने बताया।

किस साइंस में कहीं ऐसे उपकरण है जो पुरानी कहानियां से प्रेरित होकर बनाए गए हैं जैसे कि टेलीफोन और टेलीविजन जैसे उपकरण हमारे पौराणिक ग्रंथ रामायण और महाभारत से प्रेरित होकर बनाए गए। रामायण में पुष्पक विमान का उल्लेख है जिससे प्रेरित होकर एरोप्लेन का निर्माण किया गया। 

महाभारत में संजय द्वारा धृतराष्ट्र को युद्ध का सीधा वर्णन करने से प्रेरित होकर टेलीविजन का निर्माण हुआ है। वेद मिश्रा जी की बात को बहुत ही ध्यान से सुन रहा था उसके दिमाग में ये सारी बातें घर कर गई थी। रामायण महाभारत जैसे सीरियल में देवताओं का अचानक प्रकट होना और गायब होना यह भी एक अनोखि बात है अगर हम चाहे तो ऐसा कोई यंत्र बना सकते हैं जिससे कहीं भी कभी भी प्रकट हो सके और गायब हो। उसने यह बात अपने अध्यापक मिश्रा जी से कहीं। जिसकी बात सुनकर आश्चर्यचकित हो गए।

विश्वासा था कि यह लड़का जरूर कुछ ना कुछ अनोखा करेगा। उस दिन के बाद से उसने तय कर लिया कि वह ऐसे ही किसी यंत्र का निर्माण करेगा। जिससे कभी भी कहीं भी अचानक प्रकट हो जाएगा। और फिर गायब भी हो जाएगा। उस दिन के बाद वह अपने अध्यापक की सहायता से निर्माण करने की तैयारी में जुट गया। जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज से कुछ सदी पहले के लोगों ने टेलीविजन, टेलीफोन और हवाई जहाज जैसे यंत्रों की कभी कल्पना भी नहीं की होगी। यही सोच कर वेद अपने कार्य में जुट गया।

पहले तो उसने इंटरनेट से कुछ जानकारी हासिल की उसके बाद उसने सामग्री एकत्रित की 8 दिन और 8 रातें तक पूरी लगन और मेहनत से एक ऎसे यंत्र का निर्माण कर ही लिया इससे व्यक्ति कभी भी कहीं भी प्रकट हो सकता और गायब हो सकता उसने सबसे पहले ये बात अपने अध्यापक को बताई।

तब उसे पता चलता है कि उसके यंत्र में कुछ कमियां भी है। उसने जो यंत्र बनाया था। उस से कभी भी कही भी तो जा सकते थे। किंतु कहाँ जाना हैं... और कितने समय तक वहाँ रहना ये निश्चित नहीं हो पाया था। फिर कुछ संशोधन के बाद यंत्र पुनतः सही ढंग से काम करने लगा।

और उसने अपने इस यंत्र का नाम "वेद - यंत्र " रखा। अब उसमें जगह और समय भी सेट कर सकते थे। वेद को उसके इस अविष्कार के लिए देश - विदेश में कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अब वह एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक बन गया था।


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