ऊंचाइयां
ऊंचाइयां
बहुत समय पहले एक कहानी पढ़ी थी, इतना बड़ा हाथी भी रस्सी से सिर्फ इसलिए बंध जाता है क्योंकि उसको बचपन से बंधने की आदत पड़ी हुई है और उसके मन में यह बिठा दिया जाता है जाता है कि वह रस्सी तोड़ नहीं सकता। यही बात नारी के संबंध में भी लागू होती है उसे यही लगता है कि वह घररुपी पिंजरे में कैद है और यही उसकी नियति है इसलिए वह अपनी परिस्थितियां बदलने की भी कोशिश नहीं करती। यदि वह अपनी ताकत को जान जाए तो वह जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो सकती है। आसमान की ऊंचाईयों को भी छू सकती है।
है।
