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S N Sharma

Inspirational

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S N Sharma

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तुम प्यार का सागर हो

तुम प्यार का सागर हो

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जसलीन का कल रात से ही दिमाग खराब था। स्कूल के एनुअल फंक्शन में जब बह नाटक में चरित्र अभिनेत्री की भूमिका में अपना पार्ट अच्छे से निभा रही थी, तब भी स्कूल के बच्चे उसके मोटी और कुरूप होने के कारण उसके अच्छे और प्रभावी अभिनय को सहजता से नही स्वीकार रहे थे। लोग उसे हूट कर रहे थे अंतोगत्वा उसका अपने आप पर बड़ी मुश्किल से जमा विश्वास डगमगाने लगा और नर्वस होने के कारण वह उतना अच्छा अभिनय नहीं कर पाई जितना कि वह कर सकती थी।

उसके अंतस में बचपन से ही यह बात घर कर गई थी कि सफल होने के लिए सुंदर तथा पतली छरहरी काया का होना बहुत जरूरी है। योग्य होते हुए भी बह हमउम्र लोगों में भैंस,हथनी , गेंडी, हिप्पोपोटेमस, काली कलूटी जैसे शब्द बाण सेशुरू से ही घायल होती रही थी।

घर परिवार के लोग भी बातों बातों में उसके गोरे सुंदर माता पिता तथा गोरे सुंदर भाई की तुलना में उसके परिवार से अलग विकृत रूप की जाने अनजाने में क्रिटिसिज्म किया करते थे।इसी कारण उसे घरवालों का प्यार भी कम ही मिला करता था।

हजार शरारतों और कमियों के बाद भी उसके सुंदर भाई को घर और बाहर के सदस्य ज्यादा प्यार करते और कई अच्छाइयों के बाद भी वह हमेशा दयनीय स्थिति का सामना करती रहती।

बड़े बेमन से जसलीन बिस्तर से उठ कर मुंह धोने पहुंची।

ब्रश करते हुए वाश बेसिन के सामने लगे दर्पण में अपनी छबि देखने लगी। सच में उसे खुद अपनी शक्ल बदसूरत सी लगी।उसे अपनी नाक मोटी और होठ काफी बड़े नजर आ रहे थे। चेहरे पर उसे काफी ज्यादा फालतू चर्बी चढ़ी महसूस हो रही थी ऊपर से उसका काला रंग।उसे अपने आप से कोफ्त हो रही थी।

उसने झट से मुंह धोया और बापिस नाश्ता करने डायनिंग टेबल पर जा पहुंची।

हमेशा की भांति आज भी वह स्कूल तो समय पर ही पहूंच गई पर सदा की तरह लोगों के उपहास से बचने वह पीपल के पेड़ के नीचे तब तक खड़ी रही जब तक सारे बच्चे अपनी अपनी क्लासेस में नहीं चले गए।इसके बाद वह धीरे से अपनी क्लास में जा पहुंची तब तक टीचर केमिस्ट्री पढ़ाने लगे थे।

जैसे ही वह अपनी टेबिल पर पहुंची ,उसने देखा कि उसकी सीट के साथ की खाली शीट पर एक सामान्य सी शक्ल का कोई नया छात्र आकर बैठ है।

पढ़ाई के दौरान केमिस्ट्री वाले टीचर ने क्लास में बच्चों से बीच बीच में कुछ प्रश्न भी पूछे उन सभी के उत्तर जसलीन और वह नया लड़का ही दे पा रहे थे।

उस नए लड़के को भी एहसास हो गया था कि जसलीन ही एक ऐसी लड़की है जो पढ़ाई लिखाई में उसके टक्कर की होशियार है।

लंच में उसने जसलीन को अपना परिचय दिया बह बोला

"मैं शुभम सिन्हा हूं। मेरे पिताजी आर्मी में कर्नल हैं। उनकी पोस्टिंग जम्मू से यहां हो गई है इसलिए बीच सत्र में मुझे पुराने स्कूल को छोड़ कर यहां आना पड़ा।"

"मैं जसलीन हूं"इतना परिचय देकर वह चुप होगई।

उसे लग रहा था कि शायद यह लड़का भी दूसरे लडकों की तरह उसकी बदसूरती का मजाक उड़ाएगा पर ऐसा कुछ भी नही हुआ।

इसी तरह क्लास लगते हुए छह दिन बीत गए।सुभम और जसलीन एक दूसरे की योग्यता से काफी प्रभावित थे।

क्लास में शायद शुभम ही ऐसा पहला लड़का था जो जसलीन की शक्ल सूरत से ज्यादा उसकी योग्यता को महत्व देता था।इसी कारण उसका व्यवहार जसलीन के प्रति आदर और सहानुभूति पूर्ण रहता था।

एक दिन लंच टाइम में जसलीन एकांत में पीपल के पेड़ के नीचे अकेली बैठी अपना टिफिन खा रही थी सभी लड़के लड़कियां झुंड में लॉन मे बेठे मस्ती करते हुए अपना लंच कर रहे थे।

झुंड में बैठी सुंदर सी लड़की कीर्ति ने शुभम से कहा।

"वो देखो बेचारी मोटी भैंस। कोई उसके साथ नही  खेलता ।अकेली पेड़ के नीचे बैठ कर खाती रहती है।"

शुभम को बहुत बुरा लगा।वह तुरंत उठा और सीधा जसलीन के पास जा पहुंचा।

"हाय !!जसलीन!!!यहां अकेली बैठी खाना क्यों खा रही हो।"

हाय !!मुझे भीड़ से डर लगता है!! वहां अक्सर सब लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं!! क्योंकि मैं काली मोटी और बदसूरत हूं।!!"

"शरीर तो भगवान की देन है उसमें कोई क्या कर सकता है इसे तुमने तो नहीं बनाया ना और ना ही तुम इसे बदल सकती हो।"

"तुम क्या कहना चाहते हो"

"यही कि अपने आप को किसी से कमजोर मत समझो। अपने आप को समग्रता से देखो। तुम्हारे अंदर जो अच्छाइयां है ।उन्हें और बढ़ाओ। लोग धीरे-धीरे तुम्हारी अच्छाइयों को देखने लगेंगे और एक दिन तुम अपनी अच्छाइयों अपने कौशल और अपनी योग्यता के दम पर इन सभी लोगों की प्रिय हो जाओगी। जरूरत बस इस बात की है की आप अपने आप को पहचानो और अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते जाओ। फिर देखना यह जमाना तुम्हारे पीछे पीछे चलेगा"

जसलीन को शुभम की बातें बहुत अच्छी लगी आज पहली बार किसी लड़के ने बिना उसकी मजाक उड़ा है यथार्थ के धरातल पर उससे बात की थी उसने मुस्कुराकर उसकी ओर देखा और बोली

" शुभम तुम बातें तो बहुत अच्छी करते हो!"

"जसलीन क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी एक सच्चे दोस्त जो हमेशा दोस्त की मदद करता हो"गंभीर भाव से शुभम ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया।

चेहरे पर आश्चर्य मिश्रित खुशी लिए हुए जसलीन ने शुभम का हाथ अपने दोनों हाथों से थाम लिया और बोली !

"क्यों नहीं शुभम तुम शायद पहले व्यक्ति हो जिसने मुझे समझने की कोशिश की है आज से मैं तुम्हारी सच्चे दोस्त हूं सुख दुख की सच्ची साथी।"

जैसे किसी अगम नदी में असहाय बहते हुए इंसान को एक बहती हुई पुख्ता लकड़ी के लट्ठे का सहारा मिल जाता है तो उसकी जान बच जाती है ,उसी तरह जसलीन को शुभम का एक पक्का सहारा मिल गया था। अब उसका आत्मविश्वास वापस आ रहा था।

स्कूल में अब शुभम हमेशा उसी के पास बैठता उसे अन्य लोगों की बिल्कुल चिंता नहीं थी और जसलीन भी आप लोगों की हंसी मजाक की चिंता करना धीरे-धीरे छोटी जा रही थी।

जैकलिन और शुभम जसलीन और शुभम अब हमेशा पढ़ाई की और एक दूसरे की प्रतिभा निखारने की बात करते रहते थे 1 दिन जसलीन शुभम के लिए अपने हृदय से निकली हुई एक सुंदर सी कविता लेकर आए लिख कर लाए और उसने वह कविता शुभम को भेंट की शुभम दुबे कविता पढ़कर अत्याधिक आनंद का अनुभव किया क्योंकि मैं कविता वास्तव में बहुत सुंदर लिखी हुई थी शुभम ने कहा काश इतनी अच्छी कविता को तुम गा कर सुना देते तो मजा आ जाता।

अपने मित्र की इच्छा जानकारी जानकार जसलीन ने पहली बार कविता को अपने स्वर दिए और सच में उसके स्वर बेहद मीठे थे शुभम उसकी कविता को सुनकर मंत्रमुग्ध सा हो गया और बोला जसलीन तुम कितना अच्छा लिखती हो जितना अच्छा लिखती हो उससे अच्छा तुम गाती हो स्कूल के कवि सम्मेलन में तुम अपनी रचना सुनाओ तो सब लोग मुग्ध हो जाएंगे। मेरी बात मानो तुम थोड़ा बहुत लिखने हो गाने की प्रैक्टिस करती रहो।

जसलीन ने शुभम काटते हुए कहा तुम्हारी हर बात मेरे लिए एक आज्ञा ही होती शुभम मैं अवश्य यह दोनों कार्य पूरी लगन से करूंगी।

समय यूं ही अपनी गति से चलता रहा अब जसलीन पढ़ाई लिखाई में और अन्य गतिविधियों में अपना योगदान देती रही ।अर्धवार्षिक परीक्षा में जसलीन ने सर्वाधिक अंक प्राप्त करके सबको चौका दिया। अब लोग आदर और सम्मान से जसलीन की तरफ देखने लगे।उसकी तरफ उनके देखने का नजरिया बदलने लगा।

   कक्षा XI की पिकनिक जाने का समय आ गया। कक्षा के सभी विद्यार्थी भीमबेटका के लिए निकल पड़े ।जसलीन पहले कभी भी आपने उपहास उड़ने के कारण पिकनिक में नहीं जाती थी। क्योंकि लोग उसका मजाक उड़ाते थे पर शुभम के कहने पर वह पहली बार पिकनिक पर गई ।शुभम पूरे समय रास्ते भर उसके साथ बैठा ढेर सारी बातें करता रहा।

भीमबेटका पहुंचकर सभी लोग पहले गुफाओं को देखते रहे और आदिमानव के चित्र कार्यों का आनंद लेते रहे। इसके बाद सर्दी के मौसम में खुली धूप में अंत्याक्षरी का आयोजन हुआ। अंत्याक्षरी में जसलीन के स्वरों का जादू सभी लोगों पर चल गया।

  अब शुभम और जसलीन दोनों अंत्याक्षरी को लीड कर रहे थे और सारी क्लास उन्हें फॉलो कर रही थी।

शुभम ने अनाउंस किया ।

"दोस्तों!! आज मैं आपको अपने विद्यालय की उभरती हुई अदाकारा, और कवियत्री जसलीन से मिलवाता हूं। और उन से अनुरोध करता हूं कि वह अपनी लिखी हुई कविताएं और गीत आपको गा कर सुनाएं।

जसलीन ने संकोच सहित अपना लिखा एक प्रेम गीत गाकर सुनाया

तुम हमारी चेतना का वो राग हो।

जैसे अंधेरे में जला एक चिराग हो

जिंदगी मेरी को उजाले से भर दिया।

मेरी तमन्नाओं के वो आफताब हो।

जीवन की कालिमा पे कूची से लिखी।

मेरे प्यार की तुम वही किताब हो।

जिसने मेरे पंख को ताकत बना दिया

तुम मेरी धड़कन में बसी वो शराब हो।

कविता समाप्त होते-होते कविता के प्यार और दर्द भरे प्रभाव से कक्षा के सभी बच्चे पूरी तरीके से रंग गए थे। इसके बाद उससे उसकी और कविताओं और गानों की फरमाइश होने लगी और जसलीन ने अपने लिखे तीन चार गीत और कुछ फिल्मी गाने सभी को सुनाएं।

          अब जसलीन क्लास की एक उपेक्षित लड़की नहीं रह गई थी ।वह क्लास की एक अग्रणी और अप्रत्याशित रूप से सभी की चहेती बन गई ।

   अब क्लास की सभी लड़कियां और लड़के उससे दोस्ती की आकांक्षा रखने लगे और शुभम के कारण आज जसलीन को सभी लोग समग्रता के साथ स्वीकार करने लगे थे ।यही एक अच्छे दोस्त शुभम की जसलीन के लिए एक सच्ची और यादगार भेट थी।

अब जसलीन नाटक में भी अपना 100% दे पा रही थी तथा पढ़ाई में भी अपने सर्वोत्कृष्ट परिणाम दे रही थी वार्षिक परीक्षा में चारों सेक्शन में सर्वाधिक अंक लाने के बाद जब उसे गोल्ड मेडल मिला तो उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे और शुभम ने पहली बार जसलीन को सब लोगों के सामने स्टेज पर ही अपने गले से लगा लिया।

आज जसलीन की जिंदगी में खुशियों का सूरज पूरी हवा के साथ उदित हो चुका था।



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