ट्रिपल तलाक
ट्रिपल तलाक
(आज आसमाँ बहुत खुश थी ।आफिस पहुँचते ही अपनी प्रिय सखी हिना से लिपट गयी।)
हिना :क्या हुआ आसमाँ?आज तो तेरे चेहरे का नूर ही कुछ अलग है।
आसमाँ: हाँ,आज अंततः: मैंने अम्मी का दादी जान से तलाक करवा ही दिया । तलाक! तलाक! तलाक!
हिना:क्या ,दादी से तलाक ! पागल तो ना हो गई ...
अब तो मियां भी बीवी को तलाक नही दे सकता ।
कानूनन जुर्म होता है।
आसमाँ :अरे मेरी जान! आज ही टू बी.एच.के. फ्लैट बुक करवाया है ।अगले हफ्ते पजेशन। कुछ अग्रिम दिया है, बाकी की किश्ते। अबू के गुजरने के बाद अम्मी के ऊपर होते जुल्म की इंतहा देखी है मैंने ।
हम बच्चों की खातिर मुँह सिलकर हर जुल्म अम्मी ने बर्दाश्त किया। किसी तरह काम कर पैसे बचा मुझे काबिल बनाया। पर अब और नहीं।मैंने सोच रखा था, जिस दिन मुझे नौकरी लगी, अपनी अम्मी का इस दोजख से छुटकारा करवाऊंगी ।
दादीजान से, चाचा चाची से दूर।
तो हुआ ना दादी से ट्रिपल तलाक। अम्मी की झोली को मैं सुकून के पलों से भरना चाहती हूं ।
हिना: वैसे तो तलाक कोई खुशी मनाने का मौका नहीं.. पर इस तलाक का जश्न होगा...
दोनों सखियों के हंसने की आवाज देर तक माहौल को खुशनुमा करती रही...
