Abhishek Bhatia

Horror Crime


4.5  

Abhishek Bhatia

Horror Crime


trip with my friends 3

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जब मैंने निशांत से पूछा की तू ज़िंदा है कि नहीं तो उसने बोला कि तुझे क्या लगता है तो मेरी तो समझ में नहीं आ रहा था कि क्या सच है और क्या झूठ तभी आकाश कमरे के अंदर आया उसके साथ सभी अंदर आ गए। मैंने उन्हें सब कुछ बताया सभी बहूत डर गए खास कर लड़कियां। अब तो वहा रात काटना मुश्किल हो गया था। बाहर जाने से भी डर लग रहा था। सभी निशांत को शक से देख रहे थे की वो ज़िंदा है की नहीं और निशांत बार बार यही बोल रहा था कि मैं ज़िंदा हूँ। तो सभी ने बोला तू बचा कैसे ? तब शेखर बोला "आगे की बात मैं बताता हूँ उस दिन ऊपर से हम गिरे तो ऐसे थे की हमारी बचने की कोई उम्मीद नहीं थी पर शायद भगवान हमें बचा लिया हम सभी नीचे नदी में गिरे पानी का बहाव बहुत तेज था तो पानी ने हमें किनारे पर पटक दिया और हम किसी और गांव में पहूँंच गए थे। वहां के लोगो ने हमें बचा लिया पर हम सभी घायल हो गए थे । हमें ठीक होने के लिए काफ़ी वक्त लग गया।

ठीक होने के बाद हम सभी अपने अपने घर चले गए पर निशांत का बुरा हाल हो गया था। वो एक ज़िंदा लाश बन चूका था और बस यही बोलता था कि सब मेरी वज़ह से हुआ और रोता रहता था और शराब भी बहूत पीने लग पड़ा था। वो कबीर सिंह बन चुका था। उसने अपनी सारी सेविंग्स ख़तम कर दी थी वो जीना नहीं चाहता था।

एक दिन उसने अपनी गाडी़ से किसी का एक्सीडेंट कर दिया उन्होंने इसे बहुत मारा और ये हॉस्पिटल पंहुच गया ,वहां ये सभी को बहुत तंग करता था ।फिर एक दिन इसकी मुलाक़ात शिखा से हुई। शिखा की शक्ल झुमकों से मिलती थी, उसको देख कर निशांत की जिंदगी में फिर से जीने की उम्मीद जगी अब वो किसी को तंग नहीं करता था और शिखा का इंतजार करता रहता। शिखा भी इसका बहुत ख्याल रखने लगी निशांत जल्दी ही ठीक हो गया पर अब वो अक्सर शिखा से मिलने आता था। वो अब शिखा को चाहने लग पड़ा था और शिखा के साथ भी ऐसा हो रहा था।


फिर एक दिन दोनों ने एक दूसरे से अपने प्यार का इजहार कर दिया अब दोनों साथ में बहुत खुश थे पर निशांत अपना अतीत उससे नहीं छुपाना चाहता था तो उसने एक दिन उसे सब कुछ बता दिया इस पर शिखा बोली मुझे तुम अच्छे लगते हो मुझे तुम्हारे अतीत से कोई फर्क नहीं पड़ता इसके बाद निशांत के मन से बहुत बड़ा बोझ उतर गया ।

इतना सब सुन कर मुझे थोड़ा विश्वास तो हो गया था पर मेरे मन में बहुत सवाल थे जिनका जवाब उस गांव में ही मिल सकता था पर निशांत ने साफ मना कर दिया की मैं वहा नहीं जाऊँगा चाहे कुछ भी हो जाये ।

निशांत बिलकुल भी नहीं मान रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि कुछ बुरा होने वाला है कुछ समझ नहीं आ रहा था की तभी एक चीखने की आवाज आई हम सब अंजना और अंजलि के कमरे की तरफ भागे वहा दोनों का बुरा हाल हो गया था वो बहुत डरावनी लग रही थी। उन्होंने ने बाल खुले रखे थे और उनकी शक्ल भी बहुत भयानक हो गयी ।उनकी आवाज भी बहुत डरावनी हो गयी थी ।वो बार बार रेलवे ट्रैक पर जाने को बोल रही थी ऐसा लग रहा था की उनसे ये सब कोई बुलवा रहा है निशांत ये सुन कर बोला ये आवाज तो झुमको की है, तभी अंजना बहुत जोर से बोली निशांत तुम मेरे साथ चलो नहीं तो मैं इसे मार दूंगी ।निशांत बोला मैं तुम्हारे साथ चल पडूगा पर तुम इसे छोड़़ दो पर वो नहीं मानी तब निशांत ने उससे वादा किया की वो कल उससे उस रेलवे ट्रैक पर मिलेगा ये सुन अंजना और अंजलि शांत हो गयी और ठीक हो गयी।

अगले दिन हम सभी उस गांव के लिए चल पड़े हम सभी के साथ क्या होने वाला है हमें कुछ पता नहीं था हम सभी डरे हूँए थे जैसे ही हम उस गांव में पहुंचे ।सभी गांव वाले डरने लगे और निशांत को देख कर भूत भूत चिलाने लगे ।ये सुन कर मुझे भी शक होने लगा कही ये भूत तो नहीं है । क्योंकि निशांत ज़ब हमारे साथ यहां रहा था तब इसे किसे ने भी नहीं देखा था हम सभी झुमको के घर गए उस घर का बुरा हाल था वो कई जगह से टूट चूका था। वहां अब सिर्फ झुमको के पिता जी रहते थे पर वो झुमको के मरने के बाद थोड़े दिमाग़ से बीमार हो गए थे पर जैसे ही उन्होंने शिखा को देखा वो बोले तू आ गयी झुमको तूने बहुत देर कर दी और उसके गले लग कर रोने लगे। ये देख कर सभी की आँखों में आंसू आ गए थे तभी निशांत आगे आया और झुमको के पिताजी से बोला ये झुमको नहीं है उसकी हमशक्ल है। तो वो बोले तू नहीं जानता ये वही है हमने झुमको के पिताजी को बहुत समझाया। हाँ ये वही है अब आप आराम कीजिये आपको आराम की जरुरत है आप आराम कीजिये हम बात कर ही रहे थे की तभी एक आवाज आयी की दिन ख़तम हो रहा है और तभी अंजना और अंजलि को कोई बालो से खींचता हुआ ले गया हम भी उसके पीछे भागे और हम सब उस रेलवे ट्रैक पर पहूँंच गए अंजना और अंजलि को बुरी तरह चोटे आ गयी थी रेलवे ट्रैक पर अचानक से मौसम खराब हो गया और बहुत तेज हवाएं चलने लगी और अंधेरा होने लगा हवाएं इतनी तेज हो गयी की हमारा खड़ा होना मुश्किल हो रहा था, तो हमने वहाँ किसी ना किसी चीज को पकड़ लिया तभी सामने से झुमको आयी वो बहुत सुन्दर दिख रही थी। उसने निशांत की तरफ इशारा किया किया और बोली चलो मेरे साथ निशांत चल पड़ा ।उसे अपना प्यार याद आ गया था पर तभी शिखा बीच में आ गयी और निशांत को पकड़ लिया और बोली ये तुम्हारी झुमको नहीं है वो मर चुकी है। तब झुमको ने शिखा को धक्का दिया और बोली हाँ मैं वो झुमको नहीं जो निशांत के साथ प्यार करती थी वो तो मर चुकी है और उसको ऐसे ही छोड़ कर ये चले गए थे ।इनको वापिस लाने के लिए मैंने क्या क्या नहीं किया तुम सबको यहां तुमको डराया ताकि तुम निशांत को यहां बुलाओ पर ये कोई ना कोई बहाना लगता रहा तब आखिर में तुमको चोट पहुंचाने ही पड़ी मैं तुम सबको कुछ नहीं करुँगी बस निशांत को अपने साथ ले जाऊगी। इस पर निशांत बोला मैं तुम्हारे साथ जरूर चलता अगर तुम ज़िंदा होती अब तुम मर चुकी हो हमारा कोई मिलन नहीं है ।तुम्हारे साथ जाने के लिए मुझे मरना होगा पर इससे हमारा प्यार अमर नहीं होगा बल्कि मैं भी भटकता रहूँगा। क्या तुम चाहती हो की मैं भटकता रहूँ हम अगले जन्म में जरूर मिलेंगे अब तुम जाओ ये सुन कर झुमको शांत हो गयी और बोली मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है अगर हमारा मिलन इस जन्म में नहीं हो सकता तो मैं तुम्हारा इंतजार अगले जन्म में करुँगी। मैं तुमसे जबरदस्ती प्यार नहीं करना चाहती ये बोल कर वो वहा से चली गयी । सब कुछ शांत हो गया हम भी वहाँ से चले आये। अब हम कभी कभी वहा झुमको के पिताजी से मिलने जाते हैं ताकि उनको अच्छा लगे।



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