Abhishek Bhatia

Drama Horror Thriller


4.2  

Abhishek Bhatia

Drama Horror Thriller


एक फ़िल्म ऐसी भी

एक फ़िल्म ऐसी भी

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कैसे है आप लोग मैं आशा करता हूँ कि अच्छे होंगे मैं फिर एक नयी कहानी ले कर हाजिर हूँ मैं आशा करता हूँ की आपको मेरी पिछली कहानी पसंद आयी होंगी मैं अभी सिर्फ भूतिया कहानी लिख रहा हूँ अगर आप चाहते है की मैं और विषय पर भी लिखू तो मुझे कमेंट में जरूर बताना तो चलो आज की कहानी शुरू करते हैं। 

आज की कहानी मेरे दोस्त रजत की है रजत और मैं काफ़ी सालो से दोस्त थे वो एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करता था और काफ़ी सीधा था जब भी उससे छूटी होती तो हम घूमने जाया करते और काफ़ी एन्जॉय करते थे। 

एक बार की बात है रजत ने कहा की मेरी एक लड़की दोस्त बनी है उसका नाम अंजलि है फिर उसने मुझे अंजलि की फोटो दिखाई वो थी तो सुन्दर पर कुछ अजीब लग रही थी।

वो रजत को अपने शहर में बुला रही थी हमें काफ़ी दिन हो गए थे की हम कही घूमने गए हो मैंने रजत को बोला क्यों ना हम आकाश और अंजना को भी ले चले हम सभी को काफ़ी दिन हो गए है मिले हूँए रजत बोला हाँ ये ठीक रहेगा मैंने आकाश को फ़ोन किया की अंजना को बोल हम सभी रजत की नयी दोस्त से मिलने जा रहे हैं।

आकाश बोला वाह अब तो रजत भी सिंगल नहीं रहा तू कब डबल होगा मैंने बोला जल्दी ही शायद जहाँ जा रहे है वही कोई मिल जाये चल ऐसा हो तो बढ़िया है अंजलि का घर हमारे घर से लगभग दो तीन घंटे की दूरी पर था हम शाम को वहा के लिए निकल पड़े सोचा रात को वही पर रहेंगे रास्ते में हम एक ढाबे पर चाय पीने रुके वो ढाबा बहूँत ही सुमसान जगह पर था और उसका मालिक ढंग से बात भी नहीं कर रहा था पर वहा काम करने वाला काफ़ी अच्छा था हम उससे बाते करने लगे हमने पूछा की यहां से कारडुंगा कितनी दूर है कारडुंगा अंजलि के शहर का नाम था तब उस काम वाले ने हमसे पूछा तुम वहा क्यों जाना चाहते हो वो तो एक वीरान जगह रह गयी है।

अब वहा कोई नहीं जाता है वहा एक सिनेमा था जो की जल गया था और वहा काम करने वाले भी वहा जल गए थे तबसे वो जगह वीरान है तब आकाश बोलने लगा कोई नहीं हम वहा जा कर वापिस आ जायेंगे ज्यादा दूर तो है नहीं वापिस भी आ सकते है मैंने बोला हां जा कर आते है अंजलि से मिल कर वापिस आ जायेंगे पर वो काम वाला मना करता रहा पर हम नहीं माने और आगे निकल गए वो शहर बहुत ही आधुनिक लग रहा जगह जगह लाइट लगी थी अंजलि हमें चौक पर ही मिल गयी वो बहूँत सुन्दर थी मैंने उससे पूछा क्या तुम्हारी कोई छोटी बहन है क्या ये सुन सभी हसने लगे और अंजना बोली लो फिर शुरू हो गया फिर हम सभी उस जगह घूमे वहा बहूँत बड़ी बड़ी दुकानें थी।

फिर हम डिनर करने एक होटल में चले गए वहा हमने डिनर किया फिर मैंने बोला बस यही है तुम्हारे शहर में कुछ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं है इस पर अंजलि बोलने लगी तुम्हे कैसे पता की यहां एक सिनेमा घर भी है मैंने बोला जी बस पता लग जाता है रजत बोलने लगा क्यों ना फ़िल्म देखी जाये हमें काफ़ी साल हो गए है एक साथ फ़िल्म देखे हूँए हम सभी फ़िल्म देखने के लिए सिनेमा घर चल पड़े आकाश टिकट्स लेने गया पर टिकट लिए बिना ही आ गया मैंने पूछा क्या हूँआ वो बोला नहीं देखनी फ़िल्म अंजना ने बोला क्या हूँआ आकाश बोला यार भूतो वाली है चुप कर डरपोक कही का जा जा कर ले के आ इसके बाद हम सभी अंदर फ़िल्म देखने चले गए सिनेमा घर में कोई नही था सिर्फ हम लोग ही थे हम सभी को बहूँत अजीब लगा इस पर अंजलि बोली यहां के लोग रात को बहूँत कम यहां आते है यहां के लोगो को रात को बाहर निकलना पसंद नहीं।

इसके बाद हम फ़िल्म देखने लगे फ़िल्म बहूँत ही डरावनी थी फ़िल्म पांच दोस्तों के बारे में थी जो घूमने जाते है और फिर कभी वापिस नहीं आते फ़िल्म देख कर ऐसा लग रहा था की ये हमारे ही बारे में है हमें बहूँत डर लग रहा था फ़िल्म देखने के बाद हमारा मन वापिस जाने का किया वो जगह हमें कुछ पसंद नहीं आयी और हमने अंजलि को बाय बोला और उसको हमारे शहर आने के लिए बोला वो कहती मैं जरूर आऊंगी

इसके बाद हम वापिस चले आये थोड़ी दूर आ कर हम सभी को नींद आने लगी तब रजत बोला क्यों ना ढाबे पर चाय पी जाये मैंने आकाश को बोला गाडी उस ढाबे पर लगा जहाँ आती वक्त हम ठहरे थे आकाश बोला हाँ ठीक है पर हमें वो ढाबा मिला ही नहीं वहा सिर्फ एक खंडर था और कुछ नहीं हमारी आंखे फटी की फटी रह गयी हम सभी गाडी से उतरे और इधर उधर देखने लगे की तभी गाडी के चारो टायर ब्लास्ट हो गए हम इतने डर गए की जोर जोर से चीखने लगे और हेल्प मांगने लगे हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी हमने दूर रास्ते में एक लाइट हमारी तरफ आते हूँए देखी वो एक ट्रक था जो हमारी तरफ आ रहा था हम सभी ने ट्रक को रुकवाया ट्रक के ड्राइवर ने हमसे पूछा।

तुम यहां क्या कर रहे हो हमने बोला बाद में बताते है पहले हमें यहां से ले चलो हम सब ने गाडी वही छोड़ी और ट्रक पर चढ़ गए हमने सारी बात ड्राइवर को बताई ड्राइवर बोला यहां तो कोई गांव नहीं है और ये ढाबा तो काफ़ी साल पहले जल गया था जिसमे एक काम वाला भी ज़िंदा जल गया था ये सुन कर हमें काफ़ी दिनों तक नींद नहीं आने वाली थी अब तो कुछ समझ नहीं आ रहा था उस ट्रक ड्राइवर ने हमें मेरे घर छोड़ दिया हम सभी उस रात मेरे ही घर पर रुके पर हम सभी अचम्भे में थे की हो क्या रहा है नींद तो किसी को भी नहीं आ रही थी।

हम सभी बैठे ही रहे और सुबह हो गयी सुबह होते ही आकाश और अंजना अपने अपने घर चले गए और मैं और रजत वापिस गाड़ी लेने आ गए हमने चारो टायर नए खरीदे पर वहा तो सभी टायर ठीक थे और गाड़ी भी ठीक थी हमने चारो टायर वापिस भेज दिए मैंने रजत को बोला क्यों ना उस शहर चलते हैं देखते है दिन में कैसा लगता है पर रजत ने मना कर दिया फिर मैंने बोला अंजलि से भी मिल आएंगे तब वो मान गया और हम चल पड़े पर वहा जा कर हमारी आंखे खुली की खुली रह गयी वहा कोई शहर था ही नहीं वहा सिर्फ एक जला हूँआ सिनेमा घर था और एक श्मशान घाट हम दोनों की कुछ समझ नहीं आ रहा था मैंने रजत को बोला तुझे प्यार करने के लिए चुड़ैल ही मिली इस पर रजत बोला नहीं भाई वो ज़िंदा ही थी हम कई बार मिले है पर पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। 


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