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Akshat Garhwal

Action Fantasy Thriller


4.7  

Akshat Garhwal

Action Fantasy Thriller


The 13th अध्याय 17

The 13th अध्याय 17

14 mins 345 14 mins 345

“सच में यार! आज की रात जरूर काफी अजीब सी रही” सामने के हॉल में जो सोफा लगा हुआ था उस पर बैठते हुए आनंद ने कहा.

“तुम ऐसा क्यों कहा रहे हो?” अलका आनंद की बात से कुछ नाराज थी पर वो उसका जवाब भी सुन ना चाहती थी। वो भी उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गयी.

“क्या तुमने सुना नहीं? उन दोनों ने कहा कि वो पोलैंड से है! और यह भी की वो यहां खुद से ही आये है और कोई उनका पीछा कर रहा है इसलिए उन्हें अपने घर से भागना पड़ा पर दोनों की ही उम्र 18 से कम है और ऐसे में कोई भी उन्हें,,कोई भी क्या, एयरपोर्ट वाले ही उन्हें अकेले नहीं आने देते! तो फिर वो दोनों यहां आये कैसे?”

अब जब आनंद ने पूरी बात खुल कर कही तो अलका को आनंद की बात समझ में आई। उन दोनों बच्चों जिन्होंने अपना नाम ‘ईव’ और ‘जैन’ बताया वो काफी अजीब से लग रहे थे जैसे वो कुछ छिपा रहे हों। उनकी आंखों में डर तो था ही पर साथ में ही काफी रहस्य भी था जो आनंद और अलका की सोच से परे था क्योंकि वो दोनों वैसे भी कुछ बताने वाले नहीं थे।

“ज्यादा सोचने का कोई फायदा नहीं है अलका! सृजल सब कुछ हैंडल कर लेगा, शायद वो बच्चों से खुल के बात कर पाए और पता कर पाए कि आखिर बात क्या है?” आनंद ने अपना सर सोफे से टिकाते हुए कहा।

रात काफी हो चुकी थी, सृजल अब तक ऊपर केकमरेसे बाहर नहीं आया था जहां पर वो उन दोनों बच्चों को सुलाने के लिए गया था। अलका बार-बार टाइम देख रही थी पर असल में उसकी नजर पूरे घर में घूम रही थी। वो हैरान थी कि आनंद और सृजल काफी सफाई रखा करते थे घर में जबकि जहां तक अलका को पता था लड़के ज्यादा गंद मचा कर रहने में ही खुश रहते थे। अलका को घर की सिंपल डिज़ाइन काफी अच्छी लग रही थी और सारी चीजें काफी व्यवस्थित थीं। उनसे एक नजर अपने पीछे डालीं तो लकड़ी की उन सीढ़ियों से कुछ दूर जो दीवार अलक के ठीक पीछे थी उस पर काफी सारी तस्वीरें लगी हुई थी जिनमे से ज्यादातर सृजल आनंद और अलका के स्कूल की ही थी, साथ ही तीनों की फैमिली की भी अलग-अलग ग्रुप(Group) फोटोज वहां पर मौजूद थीं। इसके अलावा सृजल की कुछ विदेशियों के साथ भी तस्वीर थी और ठीक वैसी ही पर अलग तस्वीरें रूबी की भी वहां पर थी। पता नहीं क्यों पर अलका को ये फोटोज देख कर काफी खुशी हो रही थी।

“वो दोनों अभी सो गए हैं , काफी दिनों से कुछ खाया नहीं था इसलिए मुझे थोड़ा टाइम लग गया उन्हें खिलाने में और साथ ही कुछ बातें करने में” सीढ़ियों से नीचे आते हुए सृजल ने कहा जी से दोनों का पूरा ध्यान अब सृजल पर आ गया था।

“कुछ बताया उन दोनों ने? जो शायद वो पहले छुपा रहे थे” आनंद ने इतना कह ही था कि सृजल के चेहरे पर कुछ परेशानी के भाव नजर आ गए। सृजलने कोई जवाब नहीं दिया और आकार सामने वाले सोफे पर बैठ गया जो कि अलका और आनंद के सोफे के बीच में ऊपर की तरफ रख हुआ था।

“अगर तुम नहीं बताना चाहते हो तो कोई बात नहीं पर तुम्हारे चेहरे को देखने के बाद तो मैं जरूर जानना चाहूंगी कि वो दोनों ने आखिर तुम्हे क्या बताया?”

सृजल ने गहरी सांस ली और एक बार दोनों से नजर मिलाई।

“उन दोनों का पीछा एक किलर कर रहा है जिसने उनकी फैमिली को खत्म कर दिया। ” सृजल ने काफी हिम्मत करने के बाद उन दोनों को यह बात बताई थी और ये सुनने के बाद तो दोनों ही दंग रह गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर क्या करें।क्या कहें? पर क्योंकि दोनों ही सृजल के हावभाव पढ़ पा रहे थे वे समझ गए थे कि सृजल उन्हें और भी काफी कुछ बताने वाला था।

“उस किलर ने उन बच्चों का पीछा काफी दूर तक किया इसलिए ये बच्चे छुपते-छुपाते हुए किसी तरह रोड और नाव के जरिये यहां तक पहुँच गए और जब तक उन्हें इस बात का अंदाजा हुआ कि वो किलर अब उनके पीछे नहीं है। तब तक वो घर से काफी दूर आ चुके थे।”

अब आनंद ने भी इस बात को समझने की कोशिश की कि बच्चे अभी झूठ नहीं बोल रहे होंगे, आनंद को अपने उस सवाल का जवाब मिल चुका था जो उसने कुछ समय पहले अलका से किया था।

“तो अब आगे क्या करना है? मुझे लगता है बच्चों को पुलिस या किसी बड़े सुरक्षा मंडल को सौंप देना चाहिए” अलका ने अपना प्रस्ताव रखा।

यह बात सुनकर सृजल ने आनंद की ओर देखा, आनंद ने कंधे उचकाते हुए ये बता दिया कि उसे नहीं पता कि क्या करना चाहिए?

“तुम्हारी बात काफी सही है पर पुलिस को बच्चे सौंपना सही नहीं होगा। हो सकता है कोई सटका हुआ अधिकारी इन बच्चों पर ही कोई कदम उठा कर सुधारग्रह भेज दे या इनके यहां तक आने को लेकर कोई लफड़ा खड़ा कर दे? मुझे लगता है हमें कुछ दिन बच्चों को यहीं पर रखना चाहिए टैब तक हम कोई दूसरा रास्ता देख लेंगे” सृजल ने दोनों को देखते हुए जवाब दिया।

“तुम्हारा कहना काफी हद तक सही है!।।।ठीक है हम इस मामले को लेकर कोई दूसरा रास्ता निकाल लेंगे” अलका ने सृजल की बात में राजी होते हुए अपना जवाब सकारात्मक दिया

“ये सही है, गर बच्चों को पुलिस से सुरक्षा मिल जाती तो वे खुद ही वहां चले जाते, इतने बड़े तो वे हैं है। पर उन्होंने तुम पर भरोसा किया इसलिए हमें भी उन पर भरोसा कर कोई सही रास्ता निकालना चाहिए” आनंद ने भी सकारात्मक जवाब ही दिया।

कुछ पलों के लिए तीनों ने चैन की सांस ली, एक पल के लिए मानों इस लगा जैसे कुछ हुआ ही न हो। रात के सन्नाटे में सिर्फ अंदर जो पंखा चल रहा था उसकी ही आवाज सुनाई दे रही थी वो भी बिल्कुल साफ। इसी बीच अलका ने अपनी कलाई पर पहनी घड़ी को देखा।

“चलो अब हमें यहां से निकलना चाहिए। आ,,मेरा मतलब मैं चलती हूँ, काफी देर हो चुकी है” अलका ने जल्दी से उठते हुए कहा

“जाने से पहले बस मैं एक बात और बता देना चाहता हूँ?” अलका ने अपने कदमों को रोक लिया और पीछे मुड़ते हुए सृजल पर निगाहें डाली “ये बात सिर्फ हम चारों के बीच ही रहनी चाहिए!”

“चारों!?” अलका और आनंद एक साथ चोंकते हुए बोले।

“वो मैंने रूबी को फ़ोन करके बता दिया था और उसने ही मुझसे इस बात को सिर्फ हम चारों के बीच ही रहनी चाहिए” सृजल ने अपना हाथ बढाते हुए वादा करने का इशारा किया।

अलका ने जल्दी से उसके हाथ पर अपना हाथ रख कर उससे वादा किया और उसी के ऊपर आनंद ने भी हाथ रख कर वादा किया

“अब जाऊं?” अलका ने मुस्कुराते हुए कहा, उसके चेहरे पर वहीं पहले वाली लाली थी।

“ओके मैं तुम्हें छोड़ने के लिए चलता हूँ” सृजल पीछे टंगी हुई कार की चाबी उठाने के लिए गया।

“नहीं रहने दो सृजल!” उसकी बात सुनकर सृजल थोड़ी हैरानी के साथ पलटा “मैंने कैब बुक कर ली है, मैं चली जाऊंगी”

“कैब करने की क्या जरूरत थी, मैं तुम्हे छोड़ आता ना?” सृजल ने उसे समझने की कोशिश की।

“ठीक है तो इस रविवार को सुबह 9 बजे मुझे लेने आ जाना पर आज तो मैं अकेली ही चली जाऊंगी” इतना कह कर वो मुस्कुराती हुई सी वहां से चली गयी। सृजल मन ही मन सोचने लगा कि क्या वो अच्छे से चली जायेगी या फिर मैं उसके साथ जाऊं? अभी उसने ये सोच ही था कि दरवाजा खुला

“ और प्लीज मेरा पीछा मत करना, मैं खुद का ख्याल रख सकती हूँ” अलका ने इतना कह कर जल्दी से दरवाजा लगाया, सृजल थोड़ा सा चोंक गया था क्योंकि अलका ने उसके मन की बात कह दी थी। खैर सृजल ने उसके बारे में चिंता करना छोड़ दिया और सीधे आनंद के कमरे में जा पहुंचा जहां पर आनंद अभी-अभी बनियान और चड्डे में कपड़े बदल कर बैठा ही था।

“अब इतनी रात में क्या बात करनी है?” आनंद बिस्तर पर लेटते हुए बोला जिस पर सृजल ने कोई जवाब नहीं दिया और बाहर चला गया। अभी आनंद ने आँखे बंद ही कि थी कि उसका दरवाजा खोल कर सृजल फिर अंदर आ गया, इस बार उसके हाथ में वहीं बैग था जो वो ट्रेनिंग रूम से लेकर आया था। आनंद उसे घूर कर देखता रहा और सृजल ने जल्दी से खुद भी चड्डा और एक काली जिम वाली बनियान पहन ली और आनंद को बिस्तर पर दीवार की तरफ सरकते हुए उसकी बगल में सो गया।

“अब ये क्या नाटक है यार?” आनंद चुल्बुलाता हुआ बोला, उसकी आवाजमें ऐसी ध्वनि थी जैसे सृजल उसे परेशान कर रहा हो।

“अबे!ये डबल-बेड है अब क्या इस पर अकेला ही सोयेगा” सृजल ने उसे थोड़ा सा और खिसका दिया।  

“मेरा मतलब आज यहां पर? तू तो कहता था कि तुझे तेरे बिस्तर के अलावा और कहीं पर नींद नहीं आती? अब यहां पर क्या रात भर जागेगा” आनंद ने उसके मजे लेते हुए कहा।

“यहां पर भी मुझे नींद आ ही जाएगी” सृजल ने मुँह फेरकर नंद से कहा “हम दोनों का बिस्तर होस्टल में अमन सामने ही था ना?”

“हाँ पर जब भी कोई कार्यक्रम होता था तो ये लोग तेरा बिस्तर ले जाते थे और फिर हम दोनों को साथ में सोना पड़ता था।।।।।याद है भाई वो टाइम कैसे भूल सकता हूँ जब पहली बार तू मेरे बिस्तर से गिर गया था” आखिर आनंद तो आनंद ही था वो भला सृजल के मजे लेने से थोड़े ही रुकने वाला था।

उसकी तेज हंसी अब पूरे कमरे में गूंज गयी थी,जिस पर सृजल ने अपने मुँह पर उंगली रखते हुए उसे चुप रहने एक इशारा किया

“चल बे अब बंद भी हो जा! गुड नाईट” सृजल ने उसे कहा।

“चल भाई गुड नाईट! कल की कल देखते हैं” कहते हुए आनंद भी धीरे से नींद के आगोश में जाने लगा। उन दोनों का काफी साथ में स्कूल में ही गुजरा था और उन दोनों का हमेशा ही एक दूसरे के साथ होना, खूब मस्ती करना, वो एक ऐसा समय था जिसकी यादें भला कैसे मिटाई जा सकती थी।

सृजल और आनंद तो सो गए थे, वो बच्चे भी खाना खा कर काफी दिनों बाद चैन की नींद ले रहे थे पर उसी रात खाली सड़क पर सृजल के घर से कुछ दूर अलका अकेले चली जा रही थी। अभी मुख्य सड़क से वो दूर ही थी, धीमी-धीमी ठंडी हवाओं के बीच में से वो गुजरी जा रही थी। अभी तक वहां पर उसे कोई भी नहीं दिखा था, सड़क किनारे लगी हुई सारी ट्यूबलाइट जल रही थी और साथ ही कभी-कभी लुप-झुप होते हुए इस बात का अहसास कराती जा रही थी कि फिलहाल ये रास्ता कितना सुनसान है।

अलका ने अपने जीन्स की जेब से अपना स्मार्टफोन निकाला और उस पर एक कांटेक्ट नंबर पर कॉल किया जिस पर लिखा था ‘रेड ! उसने फ़ोन को कान से लगाया,।तीन घंटी के बाद ‘रेड’ ने कॉल उठाया और अलका ने बोलना शुरू किया

"हैलो मिस,हाऊ आर यू डूइंग यहां पर अलका की ही आवाज साफ थी जो समझ आ रही थी, दूर से उसकी ‘रेड’ की आवाज सुनाई नही दे रही थी

आज वो पहले ठीक है या कह लो कि अब वो पूरी तरह से ठीक है।,अम, मैंने उसे डेट के लिए भी पूछा और मालूम है उसने क्या कहा?] अलका ने बहुत खुश होते हुए फ़ोन पर कहा और कुछ ही पल बाद जवाब दिया[वो डेट पर जाने के लिए मान गया और इस रविवार हम दोनों डेट पर जाएंगे, वैसे आपको बता दूं कि वो अब पहले से काफी ताकतवर हो चुका है। अलका ने कहा और कुछ देर बाद ‘रेड’ ने की सवाल पूछा

"नहीं, अभी तक ओबर या रेड ऑक्टोपस के किसी भी मेंबर का यहां पर आना जाना नहीं हुआ। उन लोगों ने रूबी पर हमला किया था तभी से रूबी की सिक्योरिटी टाइट है और बाकी दोनों भी काफी सतर्क है। आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, मैं उन सब पर नजरें बनाई हुई हूँ" अलका ने काफी सतर्कता के साथ कहा और फिर

"गुड नाईट"के साथ ही उसने फोन रख दिया।

अब तक वो मुख्य सड़क पर पहुंच गई थी जहां पर एक कैब उसका इंतज़ार कर रही थी। वो चुप-चाप अंदर जा कर बैठ गई। गाड़ी का ड्राइवर जो दाढ़ी वाला लड़का था वो अलका को जनता हुआ मालूम पड़ रहा था, उन दोनों के बीच में मुस्कुराहट भरा वार्तालाप होता है और फिर वो कैब निकल पड़ती है अपनी मंजिल की और। अलका के घर की तरफ!


“सृजल कहाँ पर है?” अलका अपने नर्स के ऑउटफिट में ऊपर वाले फ्लोर पर आई जहां पर आनंद और सृजल काम किया करते थे। ये ऊपर के वो फ्लोर्स थे जहाँ पर ज्यादातर पेपरवर्क होता था। रूबी फार्मसूइटिकल्स की इस मुख्य इमारत में 10 फ्लोर थे, बेसमेंट और अंडरग्राउंड फैसिलिटी को छोड़ कर।,

“अभी थोड़ी देर में लंच होने वाला है ना?” आनंद ने अलका की तरफ नहीं देखा बल्कि उसने अपनी घड़ी में झांका “कुछ देर में वो वैसे भी उसके प्राइवेट रूम में ५थ फ्लोर पर हम तीनों खाना खाते है।,ऐसा करो कि आज तुम हम तीनों के साथ ही खाना खा लो”

“कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी ना” अलका ने थोड़े सहमें हुए लहजे में पूछा

“अरे ये क्या कह रही हो यार? इसमें को सी प्रॉब्लम वाली बात है? ऐसा करो कि तुम ५थ फ्लोर पर हमारा इंतज़ार करों, शायद सृजल तुम्हे वहीं पर मिल जाए” आनंद ने उसे देख कर मुस्कुराया

अलका की आँखोँ में भी चमक सी आया गयी, वो बहुत खुश होते हुए ५थ फ्लोर के लिए लिफ्ट में चढ़ गई।

लिफ्ट उसे सीधे ५थ फ्लोर पर ले आयी, जहां पर ज्यादातर प्राइवेट रूम ही थे। कुछ लोग यूँ ही यहां से वहां घूम रहे थे, शायद किसी से प्राइवेट में मिलने के लिए? अलका को तो सृजल का प्राइवेट रूम पता था वो दरवाजे तक पहुंची और उसने देखा कि दरवाजा लॉक नहीं है। उसके मन में अजीब सी खुशी के बुलबुले छूटने लगे। उस ने दरवाजा खोला और अंदर चली गयी।

“ओह, अलका!” अंदर सृजल सामने ही बैठा हुआ था सोफे पर और हाथ में उसके एक डार्क चॉकलेट का बार था “मुझे पता नहीं था कि तुम आने वाली हो,” अचानक उसे देख कर सृजल थोड़ा सा शर्मा गया, उसने अपनी डार्क चॉकलेट का बार सामने की टेबल पर रख दिया और अलका को बैठने के लिए कहा। अलका उसकी सामने वाले सोफे पर बैठ गयी।“मैं दरअसल ऊपर वाले फ्लोर पर गयी थी पर तुम वहां नहीं मिले तो आनंद ने कहा कि तुम यहाँ पर होंगे”

“वो मेरा काम खत्म हो गया था न इसलिए में यहां पर जल्दी आ गया था ताकि खाना आर्डर कर सकूं।, तुम्हारे लिए क्या आर्डर।,करूं?” सृजल की आवाज अचानक से थोड़ी धीमी हो गयीं।

“क्या हुआ,तुम अचानक से इतना धीमे क्यों बोले?” अलका ने उससे पूछा।

सृजल जैसे किसी सोच में डूबा हुआ था, अचानक ही उस की सारी गतिविधियां बहुत धीरी हो गई।,

“सृजल,सृजल क्या हुआ?” अलका के ये शब्द भी सृजल के कानों में धीमे और टूटे हुए से सुनाई दिए और बिना किसी चेतावनी के उसका शरीर लड़खड़ाये बिना ही गिरने लगा।, अलका ने उस वक्त बिल्कुल भी देर नहीं कि उसे पहले ही शक हो गया था कि सृजल की तबियत खराब हो सकती है इसलिए वो जल्दी से आगे बढ़ी और सृजल को अपनी बाहों में थाम कर गिरने से बचा लिया, सृजल अलका के लिए काफी भारी था इसलिए वो उसे संभालती हुई सोफे पर जा गिरी,सृजल के ऊपर!

“खाने में क्याssssssss , आर्डर,किया,,,है,,” ठीक उसी वक्त आनंद और रूबी भी दरवाजे से अंदर आ गए और रूबी के तो शब्द ही उन दोनों को इस हालत में देख कर एक दम रुक से गए। आनंद और रूबी की फटी सी आंखे सृजल के ऊपर अलका को देख कर शर्मा रहीं थी,पर अलका के कुछ बोलने से पहले ही

“डिस्टर्ब करने के लिए सॉरी! हम बस निकल ही रहे है” कहते हुए रूबी आनंद का हाथ थामे जल्दी से बाहर जाने लगी।

“रुको रूबी! सृजल को कुछ हो गया है!”

अलका की आवाज में गंभीरता को पहचानते हुए रूबी और आनंद सृजल और अलका की तरफ बढ़े। रूबी ने अलका को हाथ दे कर सृजल के ऊपर से उठने में मदद की और इतने में ही सृजल भी अपना सिर पकड़ते हुए उठ कर खड़ा हो गया।

“क्या हुआ सृजल? तू ठीक तो है ना?” आनंद ने जल्दी से उस से सवाल किया।

“मैं डॉक्टर रॉय को फ़ोन करके बुला लेती हूँ” रूबी ने जल्दी से अपना फ़ोन निकाला और उस पर नंबर डायल करने लगी।

“इसकी कोई जरूरत नहीं है रूबी, बस हल्का सा चक्कर आ गया था। कोई बड़ी बात नहीं है” सृजल ने सोफे पर बैठते हुए कहा।

“पक्का कोई प्रॉब्लम नहीं है?” रूबी ने एक बार फिर पूछा।

“हाँ कोई प्रॉब्लम नहीं है।"

सभी ने राहत की सांस ली, एक पल के लिए सभी घबरा गए थे क्योंकि सृजल को कभी भी चक्कर नहीं आया था और वो तो हमेशा से ही अपना ख्याल ठीक से रखा करता था

“वह तो तुझे चक्कर आ गया था। और हमे तो लगा कि तुम दोनों लगे पड़े हो” आनंद टेढ़ी हंसी हंसते हुए बोला।

“क्या?!” सृजल के तो एक पल के लिए होश ही उड़ गए पर आनंद की हंसी भी ज्यादा देर तक नहीं रही क्योंकि रूबी ने आनंद की टांग में जोर से कदम रखा जिसकी आवाज को छुपाने के लिए उसने अपने मुंह पर हाथ रख लिया। बेचारा आनंद! हमेशा ही किसी न किसी चक्कर में अपनी पिटाई करवा लेता।

इतने में ही दरवाजे पर वेटर आ गया,उसके स्थान एक कैटरिंग वाली कार थी जिसपर कहना लेकर वो आता था। रूबी ने उससे कहना लेकर दरवाजा लॉक किया और आनंद ने सभी को परोसना शुरू किया। अब क्योंकि चारों को बहुत भूख लगी हुई थी तो उन्होंने बिना बात के खाना शुरू किया। और खाने के बाद कुछ देर वहीं पर आराम किया।

“बच्चों का क्या हाल है, सब कुछ ठीक है ना” रूबी ने सवाल किया।

“हाँ सब कुछ अच्छा चल रहा है,आज उन से कुछ जरूरी बातें कर लूंगा जिस से उनके पीछे कोन पड़ा हुआ हिअ ये पता चल जाये और कल में उनके साथ। ।!”

“नहीं। कल नहीं!” रूबी ने बहुत ही सख्त लहजे में उसे कहा जिस से वो थोड़ा घबरा गया

“कल क्यों नहीँ?” सृजल थोड़ा डरते हुए बोला

“क्योंकि कल तुम जा रहे हो अलका के साथ डेट पर! कल संडे है यार!”


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