तेरी मासूमियत
तेरी मासूमियत
तेरी मासूमियत
मुझे पता है कोई मुझे पसंद है। ये बात बस मुझे ही पता है, उन्हें नहीं। मैं कोई शायर या कवि नहीं हूँ कि उनके लिए कुछ खास लिख सकूँ। आज के समय में लोगों ने प्यार के बारे में बहुत कुछ लिख दिया है, पर मुझे खुद ज़्यादा कुछ पता नहीं है। इतना ज़रूर मानता हूँ कि प्यार करने के लिए बस आँखें ही काफ़ी होती हैं। इंसान उनमें खो जाता है। और अगर बात किसी लड़की की हो, तो यक़ीन मानो, उसकी आँखों को देखकर आदमी पागल सा हो जाता है।
मुझे भी किसी की आँखें देखकर ही उनसे प्यार हुआ है। मैं उसी की बात कर रहा हूँ जिसने मुझे New Year तक wish नहीं किया। पर क्या कर सकता हूँ, उन्हें पता ही तो नहीं है कि मैं बिना कुछ कहे उन्हें सब कुछ कहना चाहता हूँ। मैं उनकी आँखों में अपने आप को पढ़ना चाहता हूँ।
आज फिर दिल ने कुछ लिखने का सोचा। उनकी खूबसूरती लिखने से बेहतर कोई विषय मिल ही नहीं सकता। और उन सब में भी उनकी आँखें—जो बिना कहे सब कुछ कह जाती हैं। उन्होंने कभी मुझसे बात नहीं की, लेकिन दिल बार-बार कहता है कि कुछ तो है, कुछ अनकहा सा। कहीं ये प्यार तो नहीं? हाँ, वही प्यार, जो शायद मैंने भी बस मन ही मन उनसे कर लिया है।
मैंने उन्हें बहुत बार देखा है। लगभग रोज़ कॉलेज में किसी न किसी बहाने उनकी class की ओर चला जाता हूँ। वो मेरी class की नहीं हैं, इसलिए ये सब बस दूर से ही होता है। फिर भी मुझे उनकी आँखें और उनकी बिंदी साफ़ याद हैं। शायद syllabus से भी ज़्यादा। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे इन आँखों से कोई रिश्ता है, बरसों पुराना।
आज तक मैंने उन्हें किसी लड़के के साथ नहीं देखा था। लेकिन 5 December को किसी ने उनका हाथ थाम रखा था। अब ये उनकी मर्ज़ी थी या ज़बरदस्ती, ये तो नहीं पता, पर सच कहूँ तो बहुत बुरा लगा। ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया वीरान हो गई हो। मैंने दोस्तों से भी कई बार कहा, पर वो क्या ही कर सकते थे। वो तो बस यही कहते हैं—जा, बात कर ले, दिल की बात कह दे। लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती। डर लगता है। सहन नहीं होगा।
अब तो उनकी आँखें ही मेरे लिए reels हैं, shorts हैं, videos हैं और movies भी। दिल करता है बस उन्हीं में डूबा रहूँ। ये लिखना किसी शौक़ की वजह से नहीं है, बस चाहता हूँ कि किसी तरह ये शब्द कभी उन तक भी पहुँच जाएँ। उन्हें भी पता चले कि उनके चेहरे को कोई उनसे भी ज़्यादा पसंद करता है, और रोज़ देखता है।
मेरी कहानी पूरी होगी या नहीं, ये नहीं पता। लेकिन इतना ज़रूर जानता हूँ कि ये कहानी बेकार नहीं होगी। क्योंकि मैंने उनकी आँखों में कुछ ऐसा देखा है जो बिना कुछ कहे सब कुछ कह जाता है। शायद… हाँ, शायद वो भी कुछ कहना चाहती हैं।

