स्वामी जी का अनोखा जीवन
स्वामी जी का अनोखा जीवन
स्वामी जी का अनोखा जीवन
स्वामी जी ने जब जन्म लिये वह दिन बहुत अनोखा था।
सन 1904 माह जनवरी तारीख 12 को जब लोग उन्हें देखा था।
उनकी माता दरसनी पिता उनका संग पूरा परिवार हर्षित था।
स्वामी जी के बचपन का नाम बुद्धन दास रखवाया था।
पवित्र जन्म स्थल ग्राम गरसंडा परसवरिया थाना जाँय दे जन्म लिये।
अपने जन्म स्थल के साथ नर्मदाहेली को भी धन्य किये।
स्वामी जी बचपन से ही परमहंस कबीर साहेब के धन्य में रम गये।
दिन रात रामभजन और सतनाम के सुमिरन में लग गये।
हुआ मेल एक दिन काशीवासी (मगन) के लेउ संगत से,
देख स्वामी जी के लागा मेल हुआ सद्गुरु से।
स्वामी जी का काशीवासी (मगन) में ही साक्षात्कार हुआ।
जीवन भर सारे सवाल पर सतगुरु शब्दों का भंडार हुआ।
सुन वेदु साहेब ने स्वामी जी को बुद्धन से विवेकानंद बना डाला।
देकर लंगोटा काषाय चोला स्वामी जी को आनंद बना डाला।
चले स्वामी जी कहने लगे मन लागे चार कारी में,
जो सुख पावे राम भजन में सो सुख नाहीं अमीरी में।
जात-पात पूछे नहीं कोई,
हरि का भजे सो हरि का होई।
छूट गए रामभजन और सतनाम भजन में करते लोग संगत,
जिन्हें देख रेशा हुआ हर तरह स्वामी जी चले सुगंध रह गये सब तंग।
हो रहा था हाहाकार, लोग केवल देख रहे थे जंग काले का।
स्वामी जी के साथ उनका लंगोटा का भी बना था शान।
साधु ऐसा चाहिए आन-बान नहीं शान,
भवत भलाई के लिए दिया लंगोटा तान।
कभी तालाब में डुबकी कभी श्मशान घाट में,
कभी गरीबी से कभी बुरे हालात में।
कभी रघुवंशी कभी राम के नाम में,
घूमते दिन रात स्वामी जी सतनाम के नाम में।
एक समय ऐसा भी आया सुखवती के दुख पर लग गया राजनीति का साया,
बन मंत्री सरकार का सामाजिक विकास उपराज्य मंत्री बनाया गया।
जिसे छोड़ स्वामी जी साधुगीरी को ही अपनाया।
होना मंत्री खास नहीं आया छोड़-छाड़ घर छोड़ आया।
ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, हिन्दू मुस्लिम एक समान,
कहते स्वामी जी घर-घर घूमे बोल रहे ज्ञान।
आधा अंग हिन्दू आधा अंग मुसलमान,
हिन्दू के राम मुस्लिम के रहमान।हो रहा था हर जगह-जगह कबीर ऐसी जोत,
स्वामी जी के राज में बाढ़ बकरी एक घाट पानी पीये।
आखिर वो एक दिन आया जब स्वामी जी हमलोगों को छोड़-चले,
सभी हिन्दू-मुस्लिम संग साथ विविध जन से नाता तोड़-चले।
वो दिन था सन 1980 माह सितम्बर तारीख 25 दिन था शुक्रवार,
जिस दिन हमलोग को छोड़-चले स्वामी जी छोड़-चले संसार।
होने लगा आपा-धापी के जाने के लिए उनका अंतिम देह को,
बिहारी यादव शख्स ने कही नहीं जाने दिए उनके देह को।
हुआ समाधि स्वामी जी का हल्दी ग्राम में,
लोग खुश हुए यही कह कर गए अपने स्थान में।
जब हुआ था पहला मेला भीड़ लगी थी भारी,
स्वागत में लग गये थे सब हल्दी के नर और नारी।
प्रसाद पाने में एक घड़ी ही काफी था,
खुश हो रहे थे सब एक भी भूखा न बाकी था।
चल रहा यह मेला 1980 से ही लगातार,
बीच-बीच में आई कठिनाई फिर भी लोग रहे तैयार।
हो रहा अब स्वामी जी के मंदिर का भव्य निर्माण,
जुट गया है नया समिति जल्द ही होगा यह पूर्ण निर्माण।
अन्त में,
स्वामी जी का था एक अधूरी चौका का सपना,
पूरा करना है पचासों साल पर ये मेरा सपना।
सन 2029 में होगा पचास साल पूरा,
करेंगे सब मिल स्वामी जी के सपना को पूरा।
आग्रह,
हे परम पूज्य धर्माधिकारी साहेब आप आगे दीजिए अपना एक वचन,
जिससे हम समिति का बन जाये हौसला खुश हो जाये मन।
आप अगर जो चाहेंगे स्वामी जी का सपना हम पूरा कर पायेंगे,
रहेगा निर्देश आपका हर कदम हम उसे अपनायेंगे।
स्वामी जी का सपना हम पूरा कर पायेंगे।
