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ANURAG ANAND

Others

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ANURAG ANAND

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कहानी एक मोमबत्ती की

कहानी एक मोमबत्ती की

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"कहानी एक मोमबत्ती की"

इस दुनिया में सबने बस माँ के बारे में कहा है।

किसी ने पिता को देखा ही नहीं —

"ना उनके आँखों के आँसुओं को देखा,

ना उनकी तकलीफ़ों को समझा।"

बस इंसान को दिखा तो माँ की ही मूरत दिखी — त्याग की देवी।

पर कभी उन तकलीफ़ों को नहीं समझा जो पिता ने उठाईं थीं।

नहीं दिखीं उनकी ज़रूरतें, जो उन्होंने हमारी ज़रूरतों को देखकर खुद ही भुला दी थीं।

"वो ज़रूरत हमारे जूते से ज़्यादा उनके चप्पल की थी,

क्योंकि अब चप्पल नहीं, उनके पाँव घिस रहे थे।"

अब पीड़ा हो रही थी — पर फिर भी उन्हें वो पीड़ा नहीं दिख रही थी,

क्योंकि उन्हें तो उस जूते में अपनी तकलीफ़ों से ज़्यादा हमारी ख़ुशी दिख रही थी।

इस दुनिया में हमेशा माँ के बारे में ही लिखा गया।

"200 हड्डियाँ एक साथ टूटने का दर्द तो सबको समझ आता है,

पर वो दर्द कौन समझे जो हमें देखकर पिता को होता है?"

माँ ने हमेशा दो रोटी माँगने पर चार दीं,

पर पिता ने भी तो जब माँगा 500, तो दे दिया 1000।

कहते हैं ना, इस दुनिया में बस माँ-बाप ही हैं

जो अपने बच्चे से निस्वार्थ भाव से प्यार करते हैं।

माँ तो हमारी तकलीफ़ें देखकर परेशान हो जाती हैं,

पर वही पिता बस अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं।

"रोटी, कपड़ा, मकान, पैसे — और सबसे ज़्यादा अपना कीमती वक़्त

जो आज के समय में बहुत ही मूल्यवान है —

ये सब देने वाला भी कोई है तो वो पिता है।"

पिता उस मोमबत्ती की तरह होते हैं

जो खुद को जला कर आपको रौशनी देते हैं —

वो रौशनी जो हमारे जीवन में सबसे ज़रूरी होती है।

आपने तो सुना ही होगा वो मशहूर किस्सा —

हाँ हाँ, वही —

"माँ हमेशा अपने बच्चे को गोद लेते वक़्त

अपने कमर पर बिठाती है,

क्योंकि वो चाहती है कि उसका बच्चा

वहाँ तक देखे जहाँ तक वो देख पा रही है।"

पर...

"एक पिता जब अपने बेटे या बेटी को गोद लेता है,

तो अपने कंधे पर बिठाता है,

ताकि वो वहाँ तक देख पाए जहाँ तक वो खुद नहीं देख पाया —

और ना ही कभी देख सकता है।"

वो हर सपना पूरा करना चाहता है

जो वो खुद अपने लिए नहीं कर पाया।

"पिता का ग़ुस्सा उस सूर्य की गर्मी की तरह होता है —

जिस प्रकार एक पौधे को सूर्य की रोशनी ना मिले,

तो वो मुरझा जाता है,

उसी तरह एक इंसान को

अपने पिता का ग़ुस्सा ना मिले,

तो वो अपने जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता।"

जिस तरह एक पौधे को फल देने के लिए

सूर्य की तपिश चाहिए —

जो कि कड़वी तो होती है,

पर उसी में उसका विकास छुपा होता है।

"उसी प्रकार इंसान के जीवन में पिता का मोल होता है।"

कहते हैं —

"पिता घर की वो छत होते हैं

जो खुद के होते हुए भी

आपके ऊपर ना कभी तकलीफ़ों की हवा,

ना पानी, ना धूप को आने देते हैं।"

जिस पत्थर को छेनी-हथौड़ी की चोट ना लगे,

वो कभी मूरत नहीं बन सकता।

उसे पूजा नहीं जा सकता।

"और आपने उस मोमबत्ती की कहानी तो सुनी ही होगी —

जो खुद जलती है,

जल-जलकर समाप्त हो जाती है,

पर हमें रोशनी देती है।"

तो...

पिता हमारे जीवन की वही मोमबत्ती हैं।


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