नहीं किया न उसने New Year wish…
नहीं किया न उसने New Year wish…
नहीं किया न उसने New Year wish…
बस उसके कुछ पलों के निहारने भर से
मैं उसके बारे में इतना सोचने लगा हूँ
कि अब मेरी दुनिया,
मेरा दिल—
ख़ामोशी से
उसके इंतज़ार में ठहर गया है।
जानता हूँ,
उसकी कोई निजी तस्वीर मेरे पास नहीं है,
और न ही ऐसा कोई रास्ता
जिससे अपने दिल की आवाज़
उस तक पहुँचा सकूँ।
फिर भी
हर वक्त दिल
उसके नाम की पंक्तियाँ
अपने आप रचता रहता है।
हाँ,
एक group photo ज़रूर है—
जिसमें बस उसकी आँखें साफ़ दिखती हैं।
और शायद
मुझे उन्हीं का नशा है।
मुझे उसकी आँखों में ही डूबना पसंद है,
क्योंकि
उन्हीं में
मुझे अपनी पूरी दुनिया दिखती है।
अक्सर
मैं उसी तस्वीर को देख लेता हूँ।
अगर कभी मिले,
तो तुम्हें भी दिखाऊँगा—
कि कैसे
किसी की आँखें
बिना कुछ कहे
किसी को अपना बना लेती हैं।
मुझे
आज की इक्कीसवीं सदी वाला प्यार नहीं चाहिए।
मुझे
उन्नीसवीं सदी का प्यार पसंद है—
जहाँ देखा नहीं,
निहारा जाता था।
जहाँ WhatsApp, Instagram, Messenger नहीं,
ख़त लिखे जाते थे।
मुझे
Imran Hashmi या Masoom Sharma के गाने नहीं,
Kishore Kumar,
Kumar Sanu
और Arijit Singh अच्छे लगते हैं।
मुझे cold coffee नहीं,
ठंडी हवा में
चाय की एक प्याली पसंद है—
वो भी
सिर्फ़ उसके साथ।
कहूँ तो
उसकी सादगी पर
पूरा पन्ना भर जाए,
फिर भी
कहना पूरा न हो।
आजकल लोग प्यार नहीं करते,
मज़ाक बना देते हैं—
प्रेम का मज़ाक़ बना दिया है
कलयुग के लोगों ने,
वरना कभी
महल त्याग दिए जाते थे
पर्वत पर रहने के लिए।
और मैं?
मैं तो उससे
मज़ाक में भी
सिर्फ़ प्यार ही करता हूँ।
मेरे शब्दों में
इतनी ताक़त नहीं
कि उसकी सादगी बयाँ कर सकूँ,
उसकी ख़ूबसूरती समझा सकूँ।
सब कुछ हो जाता है,
बस थोड़ा वक़्त लगता है।
पर…
उसने
1 जनवरी को भी
wish नहीं किया।
क्या सच में
आज मेरी याद नहीं आई?
क्या मैं
इतना बुरा हूँ?
समझकर
कम से कम
हाल ही पूछ लिया होता,
तो
मेरा New Year
उसी पल पूरा हो जाता।
सबने wish किया—
पापा, मम्मी,
भाई, बहन, दोस्त…
बस उसका wish
आज भी उधार है।
जिस दिन
उससे बात हो जाएगी,
जिस दिन
उसकी एक झलक मिल जाएगी—
वही दिन
मेरा New Year होगा।

