Radha Shrotriya

Drama Fantasy

4.0  

Radha Shrotriya

Drama Fantasy

सपनो की नदी

सपनो की नदी

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खामोश हैं आँखें खो गए लफ़्ज़ों के मआनी बुत बनकर रह गई जैसे जिंदगानी

सपनो की एक नदी बहती थी मेरी आँखों में पहाड़ों पर चिनारों में रोज रात चाँद उतर आता सपनों की नदी के किनारे पल दो पल सुस्ताता था

एक लड़की सपनों की नदी में रोज रात नहाने आती थी थाम के उँगली चांद की दूर पहाड़ी ढलानो पर बैठ जाती,,, देर रात तक गप्पे लड़ाती थी ।

सालों साल ये सिलसिला चलता रहा। एक रात चाँद नहीं आया वो लड़की रात ढले तक उसका इंतज़ार करती रही, एक एक कर तीन रातें गुज़र गईं लड़की का चेहरा मुरझा गया उसका कमल सा खिलता गुलाबी रंग पीले ज़र्द पात सा हो गया वो चुप रहने लगी।

उसकी उदासी से सपनो की नदी सूखने लगी। पहाड़ों पर बिना मौसम की तेज बारिश हुई पर लड़की ने अब भी चाँद का इंतज़ार करना नही छोड़ा रोज रात वो चिनार के पेड़ के नीचे बैठकर एक गीत गाती जिसमे वो चाँद को अपने दिल की बात सुनाती उसे लगता था कि पहाड़ सबकी विश पूरी कर देते हैं। उसकी दादी से बचपन में एक कहानी सुनी थी उसने इसलिए उसका यक़ीन मज़बूत था ।

पहाड़ी चरवाहों को जब ये बात पता चली तो आस पास के सारे गाँव में ये बात आग की तरह फैल गई। वो लड़की सबसे छुप कर चाँद से मिलने आती थी अगर कोई उसे देख लेता तो पहाड़ों पर रहने वाला उनके गाँव का राजा उसके घर वालों को बन्दी बना कर गाँव से बाहर भेज देता।

साल गुज़र गया लड़की का इंतज़ार जारी रहा, अब उसकी दोस्ती पेड़ पर रहने वाले परिंदों, जुगनुओं से हो गई जब वो रात को आती तो जुगनुओं की फौज उस पेड़ को रोशन कर देती पहाड़ी का वो हिस्सा दूर से लगता कि सूरज निकल आया हो,,, परिंदे उसके आसपास आकार गीत गुनगुनाते, तितलियों के साथ वो भी अपनी फ्राक घुमा घुमा कर डांस करती अब उसके चेहरे की उदासी गायब हो गई उसकी गुलाबी रंगत लौट आई।

चाँद को उसकी याद आई उसने देखा सब कुछ बदल गया है केलेंडर की तारीख साल उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो नीचे पहाड़ी पर कैसे आ गया वो बिस्तर से उठ कर बैठ गया चांद ने बूढ़े दादा को देखा और पूछा कि तुम कौन हो मैं यहाँ कैसे आया ?

बूढ़े दादा ने एक कप में काढ़ा उसे पीने को दिया फिर बताया कि उस रात जब तुम सपनों की नदी में नहाने वाली लड़की से मिलने के बाद जब वो लड़की वापिस घर लौट रही थी तुम उसे देखते हुए सपनो में खो गए तुमने उसका हाथ पकड़ा और उसे नीचे तलहटी में बसी फूलों की घाटी में ले जाने लगे लड़की का फ्राक पेड़ में उलझ गया और तुम्हारा हाथ छूट गया तुम गहरी खाई में जाकर गिर गए पर तुम्हारी साँसे चल रही थीं दूसरे तीसरे दिन भी तुम सपनों की नदी के किनारे नहीं लौटे तो लड़की उदासी का गीत गाने लगी पहाड़ों में चारों तरफ़

वो गीत गूंजने लगा मौसम के सारे रंग उदासी में रंग गए परिंदे अब दिन को पेड़ों पर नहीं आते अपने घोंसलो में ही रहते रात को जब वो लड़की तुम्हारा इंतज़ार करती जुगनू रोशनी बिखेर देते, परिंदे गीत सुनाकर उसका मन बहलाते तितलियाँ उसके संग नाचती फूल मुस्कुराते और जब वो अपने घर जाती सब अपने अपने घर लौट जाते पहाड़ों के राजा तक ये बात पहुंची उसने अपने सैनिकों को उस लड़के को खोजने भेजा ।

पहाड़ी के चारों तरफ ढूंढा पर वो कहीं भी नहीं मिला तब राजा ने नीचे तलहटी में खोजने का हुक्म दिया और कैसे भी उसे सही सलामत वापिस लाने के लिए बोला। नीचे तलहटी में एक नदी बहती थी जब सैनिक वहाँ पहुँचे तो टहनियों को आपस में फुसफुसाते सुना सपनो की नदी में नहाने वाली लड़की इस लड़के को चाँद समझ कर प्रेम करती है इसके वापिस नहीं लौटने पर वो रोज रात ढलने तक इसका इंतज़ार करती रही और बीमार पड़ गयी तब भी उसने इंतज़ार नहीं छोड़ा रोज रात वो उदासी का गीत गाती उसकी उदासी से प्रकृति भी उदास हो गई ये सुनकर सैनिक ने पूछा उस लड़की का चांद कहाँ है उन्होने बताया वो नदी की तलहटी में गिरा तो नदी ने अपना आंचल फैला दिया जिससे वो बच गया।

गाँव के वैध जब नदी में नहाने आए तो उसे देखा वो उसे अपने घर ले गए और उसका इलाज करने लगे अब वो ठीक है होश में आ गया है राजा के सैनिक वैध के घर गए और उस लड़के को बताया कि सपनों की नदी के किनारे वाली लड़की अब भी उसका इंतज़ार करती है। वैध जी ने कहा कि अब ये ठीक है आज सुबह ही ये होश में आया है और ये उस लड़की के प्यार की ही ताकत है नहीं तो इतनी ऊंचाई से गिरने पर कोई नहीं बचता।

पहाड़ों से सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। वैध जी को धन्यवाद कर सैनिक उस लड़के को राजा के पास लाए राजा ने सपनो की नदी वाली लड़की के घर पर सैनिको को बुलाने भेजा और फूलों की घाटी में उनको रहने के लिए महल दे दिया राजा के आदेश के खिलाफ उसके घर वाले भी नहीं जा सकते थे तब से सपनो की नदी वाली लड़की अपने चांद के साथ फूलों की घाटी में रहने लगी अब भी वो रोज सपनों की नदी में नहाती और अपने चाँद की उँगली थाम चिनार के पेड़ के नीचे पहाड़ी ढलान पर बैठ रात ढले तक बात करती।


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