समधन जी को यहीं बुला लो family-nov 7
समधन जी को यहीं बुला लो family-nov 7
"माँ ,आपको जल्द ही मिली को वापस भेजना होगा । मम्मी जी ,उसे वापस बुला रही हैं । पापा जी के जाने के बाद वह मानसिक रूप से काफी कमजोर हो गयी हैं । ",निहारिका बड़ी मुश्किल से अपनी माँ से फ़ोन पर कह पायी थी ।
निहारिका अपने मम्मी -पापा की एकलौती बेटी थी । निहारिका की शादी मिहिर के साथ हुई थी । शादी के बाद वह अपने ससुराल में दूसरे शहर में आ गयी थी । कभी -कभी अपने मम्मी -पापा से मिलने अपने पीहर चली जाती थी । कुछ ही वर्षों में निहारिका दो प्यारे -प्यारे बच्चों के माँ भी बन गयी थी ,बेटा नीरज और बेटी मालविका उर्फ़ मिली ।
इसी बीच निहारिका के पापा की मृत्यु हो गयी और निहारिका की माँ एकदम अकेले हो गयी । निहारिका कुछ महीने अपने पीहर माँ के पास रही ,लेकिन वह हमेशा वहाँ नहीं रह सकती थी और न ही अपनी माँ को अपने साथ अपने ससुराल ले जा सकती थी । वह एक बार माँ को अपने साथ रहने के लिए अगर मना भी ले तो ससुराल वालों को क्या कहेगी ।
मिली इन महीनों में नानी के साथ अच्छे से घुल -मिल गयी थी । निहारिका ने मिली को उसकी नानी के पास छोड़ने का निश्चय किया । उसने अपने सास -ससुर अउ पति मिहिर को इसके लिए मना भी लिया । मिली के नानी के पास रहने से निहारिका अब अपनी माँ की तरफ से थोड़ी निश्चिंत हो गयी थी । मिली के साथ रहने से माँ व्यस्त भी रहेगी और बच्ची के खातिर ही सही ,अच्छे से खाना -पीना भी करेगी । अकेले तो माँ शायद ही कभी अपने लिए ठीक स खाना बनाती । वैसे भी हम औरतें खुद की फ़िक्र ही कहाँ करते हैं ? अपने लिए जीने वाला जीन तो शायद हममें होता ही नहीं है ।
3-4 वर्षों तक सब ऐसे ही चलता रहा । मिली छुट्टियों में एक -दो दिन के लिए आ जाती थी और निहारिका तो महीने -2 महीने में अपने पीहर का चक्कर लगा आती थी । लेकिन अभी कुछ दिन पहले ही निहारिका के ससुरजी की मृत्यु हो गयी थी और ससुरजी अपनी एकलौती पोती मिली को अंतिम समय में देख भी नहीं पाए थे । इसी कारण निहारिका की सासू माँ के भीतर जन्मी असुरक्षा की भावना अब अपनी पोती मिली को अपने घर में ही देखना चाहती थी ।
निहारिका को जब उन्होंने कहा कि ,"निहारिका ,अब मिली बड़ी हो गयी है । 14 वर्ष की किशोर होती बेटी को अपनी माँ के साथ रहना चाहिए । उसे अब यहाँ बुलवा लो । जैसे ही उसके फाइनल एग्जाम हो जाए ,उसे यहाँ बुला लो । "
"माँ मिली के बिना अकेले कैसे रहेंगी ? माँ के तो जीने की वजह ही समाप्त हो जायेगी । उनका जीवन नीरस ,लक्ष्य विहीन हो जाएगा ।",निहारिका अपनी सासू माँ को बोलना चाहती थी ,लेकिन ऐसे शब्द उसकी जुबान पर नहीं आ सके ।
"जी ,मम्मी जी ,मैं माँ को बता दूँगी । ",निहारिका इतना सा कहकर सासू माँ के पास से चली आयी थी । उसके बाद वहाँ बैठने की उसकी हिम्मत नहीं रही थी । अपने कमरे में आकर कुछ देर आँसू बहा लिए थे । आँसू बहाना ही तो उसके हाथ में था ।
मिहिर से उसने इस बारे में बात की थी । मिहिर के सुझाये रास्ते पर वह चल नहीं सकती थी । पुरुष का क्या है ,उन्हें तो न कोई चार बातें सुनाता है और न ही उनसे कोई बड़ी -बड़ी उम्मीदें लगाकर रखता है ।
"निहारिका ,मिली और माँ दोनों को ही बुला लेते हैं । वैसे भी अभी नहीं तो कुछ वर्षों बाद तो माँ की शक्ति घट जायेगी ,उन्हें हमारे साथ ही रहना होगा । ",मिहिर ने परेशानी हल करने की गरज से कहा था ।
"मिहिर ,माँ को मना भी लूँ तो मम्मी जी को क्या कहेंगे ? बहू के पीहर वाले ससुराल वालों को कहाँ सुहाते हैं । उन्होंने तो आज तक ,एक बार भी नहीं कहा कि समधन जी को यहीं बुला लो । ",निहारिका की आँखें डबडबा आयी थी ,जिनके आँसू उसने बाहर आने से रोक लिए थे ।
"ठीक है बेटा । एक महीने बाद मिली के स्कूल बंद हो जाएंगे ,तब उसे लेने आ जाना । ",निहारिका की माँ ने इतना ही कहा था । वह भी अपनी बेटी की मजबूरी समझती थी । बेटी को पराये घर भेजने की रीत उन्होंने भी तो निभाई थी ।
"मिहिर ,मिली को लेने मैं भी जाऊँगी । बहू के साथ मेरा टिकट भी बनवा देना । ",निहारिका की सासू माँ ने कुछ दिनों बाद कहा ।
"मम्मी ,तुम बेकार ही परेशां होगी । ",मिहिर ने कहा ।
"हाँ ,मम्मी जी । मैं मिली को लेकर आ जाऊँगी । आप इतनी तकलीफ क्यों उठाएंगी ",अगर सासू माँ साथ गयी तो मैं माँ के पास रुक नहीं पाऊँगी ऐसा सोचकर निहारिका ने कहा ।
"निहारिका ,मैं नहीं जाऊंगी तो समधन जी को यहाँ अपन साथ रहने के लिए कैसे लाऊँगी । अब तो हम दोनों को एक दूसरे का साथ देना है । ",सासू माँ ने कहा ।
"क्या मतलब ,मम्मी",निहारिका के साथ -साथ मिहिर ने भी चौंकते हुए कहा ।
"बहू मुझे माफ़ करना । उस रात तुम दोनों की बातें मैंने सुन ली थी । फिर तुम्हारी बातों पर मैंने कुछ दिनों तक विचार किया और इस नतीजे पर पहुँची कि तुम्हें और मिहिर को दोनों माँओं का स्नेह और आशीर्वाद मिलना चाहिए । हम दोनों मिलकर समधन जी को मनाकर लाएँगे । ",निहारिका की सासू माँ ने कहा ।
"थैंक यू मम्मी जी । ",निहारिका अपनी सासू माँ के गले लग गयी थी ।
