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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational Children

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational Children

सिर्फ चाय

सिर्फ चाय

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"सवेरे गुड़िया के कारण देर हो गयी, बेटा होता तो तैयार होने में इतना समय थोड़े ही लगाता। दिन में भी इसी परेशानी से काम में गड़बड़ हो गयी और बॉस की बातें सुननी पड़ी, पूरे दिन में सिर्फ तीन चाय ही पी है, खाना खाने का भी समय नहीं मिला। अब ठंड इतनी हो रही है और गर्म टोपी और दस्ताने भी भूल गया।"


सर्द सांझ में थरथराते हुए अपनी इन सोचो में गुम वो जा रहा था कि अनदेखी के कारण अचानक उसकी मोटरसाइकिल एक छोटे से गड्ढे में जाकर उछल गयी, और वह गिर पड़ा। हालाँकि ना तो मोटरसाइकिल और ना ही उसे चोट आयी, लेकिन उसके क्रोध में वृद्धि होना स्वाभाविक ही था।


घर पहुँचते ही उसने गाड़ी पटक कर रखी, आँखें गुस्से में लाल हो रहीं थी। घंटी भी अपेक्षाकृत अधिक बार बजाई। दरवाज़ा उसकी बेटी ने खोला, देखते ही उसका चेहरा तमतमा उठा।


लेकिन अपने पिता को देख कर बेटी उछल पड़ी और उसके गले लग कर बोली, "डैडी,

आज मैंने चाय बनाना सीख ली। आप बैठो, मैं सबसे पहले आपको ही चाय पिलाऊंगी।"


और अचानक उसके नथुने चाय की गंध से महकने लगे।


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