शिक्षक की जीत हर पल सीख
शिक्षक की जीत हर पल सीख
जीत अपनों के सपनों को साकार करने की।
उनके दर्द को दूर कर आत्मविश्वास को पाने की।
दुनिया को जीत लूँ फिर नहीं कोई डर।
आपसब की मुस्कान मेरी ताकत।
हर पल सबका साथ खुशनुमा एहसास।
आप सभी मेरे लिए खास।।
मैं एक अध्यापिका हूं। यह है मेरी कहानी जो जीवन के इस इस मोड़ पर सीख पाई। जान पाई और जीत पाई अपनत्व का महत्व।
मैं कामकाजी महिला हूं ।सवेरे जल्दी जगना बच्चों को तैयार करना ,पति व बड़े बुजुर्गों को समय से नाश्ता व चाय व स्वयं का समय से काम पर जाना इत्यादि। नित्य जीवन की भागदौड़ ।इस भाग दौड़ में मैं परिवार के अन्य सदस्यों पर ध्यान देना उनकी अपेक्षाएं, उनके विचार ,उनकी बात सुनने के लिए समय ही नहीं होता। मैं चाहती हूं पर विवश हूं समयाभाव के कारण।
पर कोविड-19 शुरू हुआ तो मुझे समय मिला घर को सुव्यवस्थित करने का। अपनों के पास बैठने का ,उनकी बात सुनने का, उनके विचार जानने का।
कोविड-19 के दौरान मेरा कार्य स्थल का कार्य अब घर से शुरू हो गया। अब घर के हर सदस्य पर मेरा ध्यान रहने लगा। इस दौरान मैंने पाया कि घर के बुजुर्गों की सोच, उनका अनुभव जिसे वह साझा करना चाहते हैं पर उनका कोई साझेदार नहीं। इस उम्र में उनका आत्मविश्वास भी कम हो गया है।
मैंने महसूस किया और पाया कि हम चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों ना हो पर हमें अपना कुछ समय परिवार के सभी सदस्यों को देना चाहिए।
मुझे लगा कि यही मेरी जीत का पल होगा कि जब मैं अपने बुजुर्गों में आत्मविश्वास जगा पाऊंगी। उनकी आंखों में चमक, उनके सुनहरे सपनों की उड़ान की चमक , उनके और अपने बीच अपनत्व का भाव अगर जगा पाऊं तो मैं सार्थक हो पाऊंगी।
बस जब जागो तभी सवेरा । मैंने मन ही मन निश्चय किया कि यह कोविड-19 मेरे अन्तः चक्षु खोलने के लिए मेरे लिए वरदान साबित होगी । फिर देर कहे की। मेरा कार्य शुरू। अब बस ठान लिया तो कुछ कर दिखना है।
आंखों में जीत के सपने हैं ऐसा लगता है अब जिंदगी के हर पल अपने हैं।
बस तब से आज तक मेरे परिवार में रामराज्य स्थापित हो गया। हर व्यक्ति अपने आप को महत्वपूर्ण व आत्मविश्वासी महसूस करने लगा।
सुख और दुख जीवन का सत्य है पर हर मौसम में खुशनुमा व मुस्कुराते रहें, तो यह किसी से कम नहीं।
यही है मेरी जीत। यही है मेरा अभिमान ।
आंखों में जीत के सपने हैं ऐसा लगता है अब जिंदगी के हर पल अपने हैं।
