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Kanchan Pandey

Inspirational

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Kanchan Pandey

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शिक्षा का महत्व

शिक्षा का महत्व

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मोहन एक नटखट लड़का था जो अपनी मम्मी और पापा के साथ दौलतगंज शहर में रहता था।

पिता व्यापारी होने के कारण हमेशा यहाँ–वहाँ जाते रहते थे। मोहन को पढ़ने में मन नहीं लगता था। माता–पिता के लाख समझाने पर भी कभी वह न ही पढ़ने बैठता था और न ही स्कूल जाता था।

एक दिन पापा ने कहा – इस बार हम सभी दिल्ली घूमने जाएँगे मेरे काम के साथ घूमना हो जाएगा। कुछ दिन के बाद वे लोग दिल्ली के लिए निकले। वहाँ ट्रेन से उतरने के बाद भीड़ ज्यादा होने के कारण मोहन का हाथ सीमा {मम्मी} के हाथ से छूट गया और एक दूसरी महिला का हाथ पकड़ कर न जाने कब वह दूसरी ट्रेन में बैठ गया।

जब भीड़ कम हुई और उसने देखा कि उसकी माँ नहीं है, तब वह जोर–जोर से रोने लगा। ट्रेन में बैठे सभी का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हुआ। सभी ने बहुत प्रयत्न किए कि किसी प्रकार वह कम से कम अपने पापा का मोबाइल नंबर बता दे, जिससे उसकी जानकारी दे सके लेकिन पढ़ाई से भागने वाले शरारती मोहन को अपने नाम के अलावा कुछ याद नहीं था। अब वह रोते–रोते थक गया था।

एक बूढ़े आदमी ने अपनी जेब से कलम और कागज निकाल कर दिए और कहा बेटे कम से कम लिखकर तो नंबर बताओ। अगर तुम नहीं बताओगे तब जीवन भर कभी अपने मम्मी और पापा से नहीं मिल पाओगे। वह {मोहन} भरे हुए स्वर में बोल पड़ा मुझे पढ़ना और लिखना नही आता है। वहाँ उपस्थित सभी आश्चर्यचकित हो गए और उसका{मोहन का} मन पश्चाताप की अग्नि में जलने लगा कि आज वह पढ़ता रहता तब अपने पापा-मम्मी से बिछुड़ना नहीं पड़ता।

वह समझ गया था कि शिक्षा से बड़ी कोई धन नहीं होता है।

अब वह पढ़ाई से कभी नहीं भागेगा। तभी अचानक एक झटके ने उसे हिलाकर रख दिया। ट्रेन रुकी और सामने अपने मम्मी–पापा को देखकर उसके आंसू निकलने लगे मानो वह आंसू कह रहे हो कि अब मैं समझ गया। सीमा बोली अगर मैं तुम्हें इस गाड़ी में जाते देखकर पीछा नहीं करती, तब क्या होता मेरे लाल। मोहन के पास बहते आंसू के सिवाय कुछ उत्तर नहीं था। यह आंसू नहीं प्रण था कि जीवन में वह कभी शिक्षा का हाथ नहीं छोड़ेगा।


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