शीर्षक: असली विजेता
शीर्षक: असली विजेता
शीर्षक: असली विजेता शाम ढल रही थी। आर्यन पार्क की एक बेंच पर उदास बैठा था। उसे लग रहा था कि उसकी मेहनत का कोई फल नहीं मिल रहा। तभी रिया वहाँ आई और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली, "इतने परेशान क्यों हो, आर्यन?" आर्यन ने एक ठंडी आह भरी और कहा, "रिया, मैं इतनी कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन मुझे वह पहचान नहीं मिल रही जिसका मैं हकदार हूँ। कभी-कभी लगता है कि सब छोड़ दूँ।" रिया खामोश रही और उसने पास ही मिट्टी में खेल रहे एक छोटे बच्चे की तरफ इशारा किया। वह बच्चा एक टूटी हुई खिलौना गाड़ी के पहिये जोड़ने की कोशिश कर रहा था। पहिया बार-बार निकल जाता, लेकिन बच्चा रोने के बजाय हर बार खिलखिलाकर हँसता और फिर से जुट जाता। रिया ने आर्यन की आँखों में देखकर कहा, "आर्यन, देखो उस बच्चे को। उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कोई उसे देख रहा है या नहीं, या कोई उसकी तारीफ करेगा या नहीं। वह बस अपनी कला और अपनी कोशिश का आनंद ले रहा है।" रिया आगे बोली, "असली विजेता वह नहीं होता जो सिर्फ मंच पर खड़ा होकर इनाम जीते, बल्कि वह होता है जिसका हौसला हारने के बाद भी न टूटे। तुम्हारी हर छोटी कोशिश तुम्हारी एक 'अदृश्य जीत' है। बस लिखते रहो, पहचान तो एक दिन तुम्हारे पीछे आएगी।" आर्यन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अपनी डायरी निकाली और एक नई कहानी लिखना शुरू कर दिया। उसे समझ आ गया था कि उसकी सबसे बड़ी जीत उसकी कभी न हार मानने वाली ज़िद है।
