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Sajida Akram

Inspirational

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Sajida Akram

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शांति काकी (अनकहे रिश्ते)

शांति काकी (अनकहे रिश्ते)

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मेरी प्राइमरी स्कूल में एक शहर के पास गाँव में पोस्टिंग हुई पहले तो घर वालों को फिक्र हुई अकेली लड़की कैसे रहेगी गाँव में, फिर ये डिसाइड हुआ के रोज़ाना अप-डाउन करो गाँव इतना पास भी नहीं था। कुछ डेली जाना-आना करती रही, पर बहुत थक जाती थी घर पहुंचते सात बज जाते थे। आखिर में मेरे साथ जो टीचर थी, लीना वो भी रुम लेकर रहती थी वहाँ ज्यादा किराया नहीं था और उसने ही बताया गाँव का माहौल बहुत अच्छा है बड़े बुज़ुर्ग टीचर्स का सम्मान करते हैं। लीना ने कहा अनिता तुम्हारे घर वाले इजाज़त दे तो यहीं घर किराये पर ले लो चाहो तो मम्मी को ले आओ। 

घर में मुझसे छोटे दो भाई-बहन थे फिर पापा का सरकारी सर्विस थी। इसलिए मम्मी नहीं आ सकती थी, मैंने घर पर बात की क्या मैं वहाँ पर रुम लेकर रह सकती हूँ पापा -मम्मी बहुत सुलझे हुए ख़्यालात के थे, उन्होंने जब मेरी थकान और रोज़ाना के सफ़र की परेशानी देखी तो पापा-मम्मी ने ख़ुद जाकर घर तलाश किया और पूरी तरह से मुझे सैटेल किया, जो घर लिया था वो एक शांति काकी का था मेरी दोस्त लीना ने बताया था। वो विधवा है। मैं अच्छे से रहने लगी। 

कुछ दिनों में ही मुझे सब गाँव के लोगों से बड़ी ही आत्मियता मिलने लगी सब कभी अपने घर कथा है तो बुलाते, कभी शादी है तो, किसी के यहाँ मुंडन का प्रोग्राम है तो बुलाया जाता, मैनें देखा शांति काकी हर घर में बहुत इज़्ज़त से बुलाई जाती और हर फंक्शन में बड़े मज़े से लोक गीत गाना, कभी भजन गाना कभी सब औरतों के साथ ख़ूब नाचना शांति काकी जहाँ पहुंच जाती रौनक ला देती, मुझे भी बड़े प्यार से रखती अपने साथ ही ले जाती और अपने साथ ही वापस लाती जैसे माँ अपने बच्चों का ख़्याल रखती हो, मेरा भी खूब ख़्याल रखती ज़रा मैं घर की याद में उदास हो जाती तो मुझे गाँव के तरह -तरह की रोचक किस्से सुनाती, जैसे मेरा दिल बहलाने की कोशिश करती। 

एक दिन मैनें लीना से शांति काकी के बारे में पूछा क्या उनका कोई अपना सगे रिश्तेदार नहीं है क्या, तो लीना ने जो बताया उसको सुनकर तो मेरे दिल में उनके लिए और भी इज़्ज़त बढ़ गई। 

लीना ने बताया "शांति काकी जब शादी होकर आई तो उनके पति सेना में थे, एक लड़ाई में शहीद हो गए, शांति काकी का एक ही बेटा था, पर बड़ी जिगर वाली थी उसको पढ़ाया -लिखाया शांति काकी चाहती थी कि वो भी अपने पिता की तरह ही देश की सेवा करें बेटे लोकेश में भी अपने पिता की ही तरह जज़्बात थे उसका भी सेना में सेंकंडलेफ्टिनेट में पोस्टिंग हो गई, अभी कुछ साल पहले ही कश्मीर में आंतकी हमले में वह भी शहीद हो गया। 

बस अब अपने इस गाँव से अनकहे सा रिश्ता है वो सबकी घर सदस्य है, किसी की माँ है, किसी की काकी है, तो किसी की भोजाई है ....

सरपंच से लेकर हर इंसान उनकी इज़्ज़त करता है उनकी सलाह-मशवरा के किसी भी घर के कार्य-क्रम नहीं होते। बड़ी सी बड़ी रसोई बनवाना हो, मंडप में रस्में होनी हो शांति काकी खुद अपनी देखरेख में करवाती हैं जिस भी घर का कार्यक्रम हो बेफिक्र रहते हैं शांति काकी सब सम्भाल लेगी। 

बस यही उनकी कहानी है वो सबको अपना परिवार समझती है सब उनको दिल से अपना परिवार मानते हैं। 



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