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सड़क

सड़क

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सड़क गुलजार हो गई, फिर भी खामोश रहती है

उदासी हाल पूछो तो कहानी फिर वही कहती ,

ना पूछो हाल मेरा तुम, उदासी का सबब तुमसे ,

जंहा बीता तुम्हारा मन, जंहा खेला तुम्हारा तन।

वही अब भीड़ होती है, तुम्हारी याद होती है, 

ना मेरी शाम होती है ना मेरी रात होती है ।

गुज़रते लोग मुझसे है, और मेरी आह होती है 

सड़क गुलजार हो गई, फिर भी खामोश रहती है। 


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More hindi story from Dr Abhishek Kumar Srivastava(अपने रीति-रिवाजों, परंपराओं में विश्वास, पूर्वजों के मान-सम्मान के दृष्टीकोण से कार्यों का संपादन,जयप्रकाश नारायण जी एवं गुरुदेव टैगोर जी को मार्गदर्शक मानना। )

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