STORYMIRROR

सड़क

सड़क

1 min
405

सड़क गुलजार हो गई, फिर भी खामोश रहती है

उदासी हाल पूछो तो कहानी फिर वही कहती ,

ना पूछो हाल मेरा तुम, उदासी का सबब तुमसे ,

जंहा बीता तुम्हारा मन, जंहा खेला तुम्हारा तन।

वही अब भीड़ होती है, तुम्हारी याद होती है, 

ना मेरी शाम होती है ना मेरी रात होती है ।

गुज़रते लोग मुझसे है, और मेरी आह होती है 

सड़क गुलजार हो गई, फिर भी खामोश रहती है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi story from Dr Abhishek Kumar Srivastava(अपने रीति-रिवाजों, परंपराओं में विश्वास, पूर्वजों के मान-सम्मान के दृष्टीकोण से कार्यों का संपादन,जयप्रकाश नारायण जी एवं गुरुदेव टैगोर जी को मार्गदर्शक मानना। )

Similar hindi story from Abstract