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Vimla Jain

Inspirational

4  

Vimla Jain

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सद्बुद्धि

सद्बुद्धि

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एक सुखी संपन्न जोड़ा जो करीब 55,60 साल के होंगे एक लग्जरी बस में बरात में जा रहे थे ।पति ने पत्नी से ऐसे ही पूछा 20 ,25 साल पहले यह अपने रिश्तेदार लोग कितने अच्छे लगते थे ।एकदम सुंदर से सौम्य से अब यह लोग कितने बदल गए हैं।सबमे अपने-अपने उम्र को कम करने के हिसाब से कम दिखने के हिसाब से कितनी कृत्रिम आ गई है।बाल काले करवाना, फेशियल ,सौंदर्य उपचार करवाना, और अपनी बढी हुई उम्र को वापस लाने के लिए कितने धम पछाड़े करने लगे हैं। कितनी मेहनत करने लगे हैं। किसी किसी ने तो कपड़े भी इतने बेकार से पहन रखे हैं नहीं ,छोटे छोटे कपड़े और इतने फैशनेबल नजर आ रहे हैं।और कोई बेबस और लाचार नजर आ रहा है। कोई एकदम सौम्य और सरल नजर आ रहा है ।दुनिया कितनी बदल गई है। और कितनी बनावट आ गई है  सबमे। 

सबके व्यवहारों में मुझे तो ऐसा लगता है ,कि भले कितनी भी बनावट कर ले, मगर इनकी बेबसी और लाचारी छिपी नहीं रहती है ।दिल का हाल बता देता है असली नकली चेहरा सबके चेहरे सब का हाल बता रहे हैं। पति का आखिरी बात सुन पत्नी ने उसको टकोर करी कि तुम बंद हो जाओ ।नहीं तो कोई सुनेगा ।मगर पति जोर जोर से हंसने लगा।

अब पत्नी गुस्सा करने लगी बोली तुम छोटे नहीं हो 60 के पार हो गए हो ।तुम्हारे स्टेटस का तो विचार करो। सोसायटी के मंत्री हो ,3,4 संगठनों के प्रमुख हो।दो बच्चों को लाखों रुपए खर्च करके विदेश भेजा है।समाज में तुम्हारा इतना नाम है। तुम्हारा इतना कारोबार चल रहा है, तो ऐसे सबके सामने हंस क्यों रहे हो। लोग तुमको पागल कहेंगे ।थोड़े तो अपने अपने मोभे का सम्मान करो। ऐसा कहकर पत्नी अपने पति को डांटने लगी ,और लड़ने लगी। हंसते हुए उसके पति ने उसकी बात काटी तो उसकी पत्नी बोलती है क्या दांत निकाल रहे हो हंस रहे हो जोर जोर से ।उसके पति ने कहा किसका स्टेटस और किसका मोभा।

मेरे व्यवहार का सादा और सरल व्यवहार, और मेरी आवडत ने ही मुझे समाज में स्थान दिया है ।और मैं अपनी परिश्रम और बुद्धि बल से आगे आया हूं। मैंने कभी किसी की से दो नंबर का धंधा नहीं किया है ।ना ही कोई भ्रष्टाचार किया है ।और मेरे चरित्र पर एक भी दाग नहीं लगने दिया है। तु जिसको मोभा स्टेटस और प्रतिष्ठा समझ रही है, वह मेरे लिए कुछ नहीं है। मैं जैसा हूं, वैसा ही रहूंगा। मुझे मेरे 60 साल में भी मेरा बचपन, मेरी मस्ती, मेरा आनंद, सब ऐसा ही रखना है। मेरे को प्रतिष्ठा और स्टेटस के भार के तले नहीं दबना है। और मेरी जिंदगी की जिंदादिली हर कुछ नहीं गवाना है। बिजी रहना और ईजी रहना मेरी आदत है। मैंने कौन सी गलत बात बोली है। जो परिवर्तन की वास्तविकता है वही कही है। उसकी पत्नी बहुत गुस्सा हो जाती है। और वह बोलती है ठीक है, ठीक है, तुम अपना भाषण बंद रखो। मैंने कंहा तुमको कुछ कहा है।उसका पति बोलता है मोभा, प्रतिष्ठा स्टेटस यह एक तरीके का वहम है। एक कहावत है 

" उतरीयो अमलदार कोड़ी नो"

यह मान और सम्मान तो यह सब ऊपरी है। इसके पीछे स्वार्थ डर और अच्छा लगाने की, और दिखावा करने की भावना काम करती है। बाकी तो कुर्सी से उतरे और सब खत्म।कौन अपना है और कौन पराया सब पता लग जाता है।कितनों को तो ऐसा लगता है कि हाश ये रिटायर हो गया यह अच्छा है। मुझे कुर्सी मिलेगी। सब ऐसा ही समझते हैं। सच कहूं, तो मौभा और इज्जत तो अच्छी इंसानियत की होनी चाहिए। इंसान को अपने सही स्वरूप में रहना चाहिए, कृत्रिम स्वरूप में नहीं। यही सच्ची प्रतिष्ठा है।सच्चा स्टेटस तो वह है जो अपने जाने के बाद भी जिंदा जीवंत रहे भगवान को अच्छा लगे। ऐसा हर एक काम मेरे मन स्टेटस है ।इसीलिए बनावटी स्टेटस की मुझको जरूरत नहीं है ।भगवान से आखिर में मैं एक ही प्रार्थना करता हूं, कि हे भगवान तू सच्चा स्टेटस क्या है, इसकी सद्बुद्धि मुझे भी दे ।और मेरी पत्नी को भी दे ।और इतना बोल कर वह पत्नी की तरफ देख कर के हंसने लग गया पत्नी को भी उसकी बात पसंद आई।

फिर वह कुछ नहीं बोली और उसने अपना सिर हिला दिया।जब तक उनका बरात का स्थल आ गया था। इस रास्ते में पति ने पत्नी को सद्बुद्धि ,स्टेटस के बारे में और बनावटी पन के बारे में अपने सुविचार बताएं। 



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