सब से ऊँची उड़ान.....
सब से ऊँची उड़ान.....
एक बार ग्रेट ब्रिटेन मे एक भारतीय नौजवान का पढ़ने के लिए बड़े महा विद्यालय मे दाखिला होता है। पर उस लड़के को गाड़ियों से बहुत लगाव था। बचपन से ही वो खिलौना गाड़ियों का संग्रह करता था। उसे सभी गाड़ियाँ अच्छी लगती थी। पर सबसे ज्यादा पसंद उसे उसके पिताजी द्वारा दी गई लाल रंग की दौड़ गाड़ी ( रेसिंग) पसंद थी। हमेशा वही गाड़ी लेकर खेलता था।
अब भी वो खिलौना गाड़ी उसके साथ थी। उस लड़के का नाम था आभास। पढाई मे उसका मन कम ही लगता था। इसलिए वो पढाई के अलावा बड़े लोगों की गाड़ी चलाने की सेवा भी देने लगा। इससे आभास का शौक भी पूरा हो जाता और आमदनी भी। वो बहुत खुश था। अपने सपने की सोपान ओर पहला कदम बढ़ा दिया था। अब वो गाड़ी की गति भी बढ़ाने का अभ्यास करने लगा। क्योंकि उसे स्वयम की रेसिंग कार चलानी थी।
देखते ही देखते आभास एक सुशिक्षित व अमीर कार चालक सेवा केंद्र का मालिक बन गया। पर अब भी वो अपने सपने से दूर था। वो रेसिंग कार का रोज अभ्यास करता, गति भी बढ़ाता। उसने धन संग्रह भी कर लिया। पर, वो मंज़िल ही क्या जो आसानी से हासिल हो जाय....
एक बार गतिरोधक मोड पर गल्ती से गाड़ी पलट गई। बेचारे आभास को गंभीर चोटें आई और दायाँ भाग शरीर का सुन्न हो गया था। डॉक्टर के अनुसार वो शायद ही कभी चल पाए। पर आभास की जिद के समक्ष खुदा की खुदाई भी हार गई। क्योंकि ना ही वो अपने लक्ष्य से भटका और ना ही कोशिश मे कोई कमी कर रहा था.....
आखिर वो दिन भी आ गया। आभास एकदम तैयार था अपनी नई नवेली लाल रेसिंग कार के साथ। तन पर रेसर सूट सजाकर उतरा......
थोड़ी देर मे चम चमाती ट्रॉफी आभास के हाथ मे चमक रही थी, डॉक्टर बधाई देने के लिए सबसे आगे थे.......
