Gurminder Chawla

Tragedy Drama Inspirational


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Gurminder Chawla

Tragedy Drama Inspirational


सौतन बहने (कहानी )

सौतन बहने (कहानी )

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घड़ी की दोनों सुईयाँ भाग रही थी। विमला देवी ने सुबह पाँच बजे उठने का अलार्म दिया था पर न जाने क्यो उसकी आँख फिर लग गयी। वह उठी तो घड़ी में पूरे छह बज चुके थे यानि पूरे एक घंटा लेट। उसने जल्दी जल्दी दातून किया और रसोई घर जाकर सबका नाश्ता और दिन का खाना बनाने में लग गयी। समय बहुत हो चुका था। सब काम जल्दी से करके उसे अपनी बड़ी बेटी गीतिका के घर जाना था। गीतिका की डिलीवरी जो होने वाली थी। माँ उस काम के लिए नहीं पहुंचेंगी तो कौन पहुँचेगा। चलो खाना तो बन गया सबको नाश्ता स्नान करके आने के बाद देती हूँ ऐसा विमला देवी ने सोचा। बाथरूम में वो नल खोलने गयी तो जल्दी की वजह से उसका पाँव फिसल गया। अब उसका उठना मुश्किल हो गया और वो दर्द से कराहने लगी। उसने ज़ोर से अपनी छोटी बेटी कामिनी को पुकारा। विमला का पति और कामिनी दौड़ कर चले आये बड़ी मुश्किल से बाथरूम का दरवाज़ा खोला गया। बाद में वो उसे डाक्टर के पास ले गए जहाँ जाकर पता चला कि विमला देवी के एक पैर में फ़्रेक्चर हो गया है। बूढ़ी हड्डीयाँ थी गिरने से एक आधे का टूटना वाजिब था। माँ को अपनी चिंता कम और बड़ी लड़की की डिलीवरी की चिंता ज्यादा थी। वो लगातार भगवान को कोस रही थी कि ये सब इसी वक्त क्यो होना था। विमला देवी अपनी छोटी बेटी कामिनी के पीछे लग गयी कि तुम अपनी बड़ी बहन गीतिका के पास उसकी डिलीवरी के लिए चले जाओ। ऐसे वक्त में अपनी छोटी-सी भांजी तारा का भी ध्यान रखना। उम्र में कामिनी छोटी न थी पूरे बीस बरस की हो चुकी थी। कामिनी माँ को ऐसे में छोड़ कर जाने को तैयार न थी लेकिन माँ ने यह समझाया कि उसके पास देखभाल के लिए कामिनी के पिता है। माँ की ज़िद और बहन की छोटी बच्ची तारा का ध्यान आते ही वह जाने के लिये राजी हो गयी।

कामिनी अपनी बहन के यहाँ पहुँच गयी। दो तीन दिन बहुत खुशी के बीत गया। साली और जीजू ने जमकर बातें की वैसे भी वह इकलौती और छोटी साली थी। जिस वजह से उसकी अपने जीजू से बहुत बनती थी। आपस मे हँसी मज़ाक भी खूब होता था। कमलेश बहुत अच्छा इन्सान था। तारा भी मौसी के आने से बहुत खुश थी। तीन रोज बाद गीतिका को सबेरे चार बजे हस्पताल जाना पड़ा। गीतिका के घर दूसरी गुड़िया ने जन्म लिया। परिवार में सब दूसरी बेटी हो जाने पर भी खुश थे। रात में कमलेश को घर आते आते देर हो गयी। कमलेश मिठाई के साथ बहुत सा समान लेकर आया। वो साथ में एक आइस्क्रीम का छोटा फैमिली पैक भी ले आया था। तब तक तारा सो चुकी थी। कामिनी ने बड़ी मुश्किल से तारा को थोड़ा जगाकर आइस्क्रीम खिलाई। बाद में जीजू और साली दोनों बिस्तर में ही बैठे बैठे हँसी मज़ाक करते हुये आइस्क्रीम खाने लगे। थोड़ी सी बची हुई आइस्क्रीम के लिए दोनो के बीच मज़ाक मज़ाक में छीना छपटी होने लगी। एक समय ऐसा आया कि कामिनी बिस्तर में नीचे लेट चुकी थी और कमलेश उसके ऊपर था। बिलकुल ऊपर। अल्हड़ उम्र की कामिनी में अब जीजू को दूर करने की न हिम्मत थी न इच्छा। जीजू भी अब कमज़ोर पड़ चुके थे। आखिर वो था तो एक मर्द ही। और बाद में उन दोनो के बीच जो हुआ वो बहुत शर्मनाक था। दीदी के छुट्टी मिल कर घर आ जाने के बाद कामिनी जल्दी ही अपने घर लौट आयी।

समय बीता आज विमला देवी बहुत गुस्से में थी उसने फटाफट दो तीन थप्पड़ कामिनी पर जड़ दिये और बोली बता कलमुंही कहाँ अपना मुंह काला करके आयी है। जवाब सुनकर वो सुन्न रह गयी ऐसा लगा जैसे धरती फट गई हो। कामिनी को गर्भवती करने वाला कोई बाहरी पुरुष नहीं खुद उसका जीजू था। गीतिका और कमलेश दोनों को तुरंत बुलाया गया। गीतिका ने कमलेश से बहुत झगड़ा किया लेकिन यह झगड़ा समस्या का हल नहीं था। समस्या का हल गर्भपात था। जिसके लिये कामिनी बिलकुल राजी न हुई। बहन की इच्छा और उसके होने वाले बच्चे के साथ रिश्ते को ध्यान में रखकर गीतिका ने हकीक़त को गले लगाने की सोची। वो कमलेश का दोषी तो मान रही थी लेकिन शायद उसकी सजा कामिनी के होने वाले बच्चे को नहीं दे सकती थी। वो उस बच्चे से पिता के नाम का हक भी नहीं छिनना चाहती थी। दोनों बहनों ने सोचा ऐसे भी तो समुदाय है जहाँ सौतन मिल कर रहती है फिर हम प्रेम पूर्वक क्यो नहीं रह सकती। दोनों बहनों ने मिलकर समाज के नियमों को चुनौती दे डाली और गीतिका अपनी बहन को कमलेश की दूसरी पत्नी के रूप मे विवाह कर घर ले आयी।

साली आधी घरवाली होती है यह कहावत तो सुनी रखी थी पर साली पूरी घरवाली बन जाये ऐसा तमाशा तो हकीकत में सुन कर अच्छा नहीं लगता। रिश्तेदारों ने संबंध तोड़ लिये। परिचित अब अपरिचित बनने लगे वक्त अब आगे बढ़ने लगा। बहनों का जुनून कम न हुआ वो दो सौतन बहने अपने पति की खुशी में ही जीने लगी। उन तीनों को किसी पास पड़ोस या समाज वालो की परवाह न थी। वो अपनी जिंदगी मे ही खुश थे। दोनों बहनों को अपने पति को बाँटने में भी कोई संकोच न था। दोनों बहने समझदारी से जी रहीं थी। बाद मे कामिनी ने एक सुन्दर लड़के को जन्म दिया।

तीनों बच्चे अब बड़े होने लग। अब गीतिका की बेटियों का कामिनी के बेटे के साथ अक्सर पिता को लेकर झगड़ा होने लगा। कामिनी का बेटा अब करीब छह सात साल का हो चुका था। एक दिन पिता को लेकर बहनों के साथ झगड़ा इतना बढ़ गया कि उसने अपनी माँ कामिनी को कहा कि तुम गंदी हो और उसके चारित्र को लेकर उसे बहुत कुछ कह दिया। कामिनी यह बातें अपने छोटे से बच्चे के मुँह से सुनकर पूरी तरह टूट कर बिखर गयी। इतना दुख तो उसे किसी की भी बातों से नहीं पहुंचा था। अपने बच्चे की बातों ने उसे झझकोर कर रख दिया।

अगले दिन सबेरे पुलिस की गाड़ी कमलेश के घर के आगे आकर खड़ी हुई। बेड रूम के पंखे से एक महिला लटकी पड़ी थी। यह कामिनी की लाश थी जिसे उसके बच्चे ने कामिनी को अपने जीवन में की गई ग़लती का एहसास दिलाकर यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था। अब गीतिका ने उसके नादान लड़के को अपना पुत्र मानकर गोद में उठा रखा था। जिस तरह भगवान ने सृष्टि की रचना कुछ सिद्धांतों पर की है ऐसे ही हमारा समाज कुछ नियमों पर आधारित है। यदि हम उन नियमों का पालन नहीं करते तो एक न एक दिन उसका अंत दुखद होता है।




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