STORYMIRROR

Diwa Shanker Saraswat

Drama Classics Inspirational

3  

Diwa Shanker Saraswat

Drama Classics Inspirational

पुनर्मिलन भाग २०

पुनर्मिलन भाग २०

3 mins
132

 " देवियों, वेदों में जिसे सृष्टि का निर्माता कहा गया है, जिसका न कोई नाम है, न रूप, जो सृष्टि के कण कण में समाया हुआ है, मैं उसी निर्गुण, निराकार ब्रह्म की बातें बता रहा हूँ। उसी में ध्यान लगाने से सांसारिक दुखों से मुक्ति मिलती है। फिर यह संसार ही एक स्वप्न रूप में प्रतीत होता है। जो हो रहा है, सब प्रकृति द्वारा नियंत्रित है और गुण ही गुणों में प्रवृत्त हो रहे हैं। फिर किसके लिये शोक करना और किसके लिये आनंद मनाना। "

 अभी तक उद्धव की बातें चुपचाप सुन रहीं राधा जी कहने लगी।

" भैय्या। हम इतना नहीं जानतीं। बचपन से ही गायों की सेवा के अतिरिक्त और कुछ जाना नहीं है। जिन वेदों की आप चर्चा कर रहे हैं, उन वेदों के पढने का हमें कब अवसर मिला। फिर भी लगता है कि हम पूरी तरह अज्ञानी नहीं हैं। संभवतः यह गौ माता की सेवा का प्रभाव है कि कभी कभी उन विषयों को भी समझ लेती हैं जिन्हें हमने इस जन्म में तो नहीं पढा। भैय्या। मुझे तो लगता है कि जिस निर्गुण की आप बात बता रहे हैं, उन्हें भी लगा होगा कि मैं एक से अनेक बन जाऊं। फिर विभिन्न प्रकृति के रूप में उन्होंने रूप धारण कर लिया होगा। भैय्या। हमें तो यही लगता है कि वेदों में भी निर्गुण की अपेक्षा प्रकृति के विभिन्न रूपों जैसे सूर्य, चंद्र, पवन, अग्नि, जल आदि की ही उपासना अधिक की गयी होगी। हमारा गोप समुदाय बहुत काल तक इंद्र की पूजा करता रहा है। बताया जाता है कि इंद्र देवताओं के स्वामी हैं और वेदों में उनकी पूजा की गयी है। वैसे भी क्या जिसे देखा नहीं जा सकता, जिसे अनुभव नहीं किया जा सकता, उस निर्गुण और निराकार रूप में उसकी कैसे आराधना की जा सकती है। मन को स्थिर करने के लिये किसी न कोई न कोई रूप ही आवश्यक होगा। "

 उद्धव अवाक, कोई गोप कन्या वेदों के विषय में इतना सत्य बता देगी, इसका उन्हें अनुमान भी न था। जिन्हें भोले भाले ग्रामीण समझ रहे थे, वे भी वेदों के ज्ञाता निकले। सत्संग हमेशा अच्छा प्रभाव दिखाता है। निश्चित ही महर्षि शांडिल्य के साथ ने अनपढ ग्रामीणों को भी ज्ञानी बना दिया है। फिर ज्ञान के अथाह सागर के बाद भी यह मोह क्यों। परम ज्ञानियों का श्री कृष्ण के वियोग में इस तरह अधीर होना क्यों। क्या ज्ञान होने के बाद भी उसे आत्मसात नहीं किया गया है अथवा क्या इनका ज्ञान उस सीमा से भी आगे है जितना मुझे ज्ञात है। सत्य है कि ज्ञान वास्तव में अनंत है, अनंत आकाश की भांति, न जाने कितने तारागणों को खुद में समेटे, न जाने कितने ब्रह्मांडों का आश्रयदाता।

 उद्धव का ज्ञान का अहंकार चकनाचूर हो गया। गुरु के रूप में आये उद्धव शिष्य बनने को अधीर हो गये। सीमा के पार के ज्ञान को जानने के लिये मन बैचेन होने लगा।

क्रमशः अगले भाग में


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Drama