पश्चाताप की ज्वाला पार्ट -2

पश्चाताप की ज्वाला पार्ट -2

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अन्तिम भाग

रवीश अपने ससुर के कमरे में जाता है जहाँ वह किसी गहन सोच व चिन्ता से ग्रसित आराम कुर्सी पर आँखे बन्द किये हुए थे। रवीश के कदमों की आहट से आँखें खोलते है, वह उनसे पूछता है, "आप अस्पताल चलोगे?"

"क्या हुआ रवीश ? जिया ठीक तो है न ?"

"हाँ वह ठीक है।"

"चलो फिर, अरे कालू मेरी छड़ी तो ले आ, मैं जिया बिटिया के पास जा रहा हूँ !"

"अरे तुम कहाँ जा रहे हो !" तभी रवीश की सास वहाँ आ धमकी, "रिया की ससुराल से कुछ मेहमान आ रहे हैं, दीपू से मिलने।"

"तुझे उस कमीने के मेहमानों की पड़ी है। अपनी लड़की की कोई चिन्ता नहीं, जो इतने दिनों से अस्पताल में भर्ती है।"

"मरने दो उसे हर वक्त बीमार-बीमार, पिंड छुटे।" बड़बड़ाती हुई वह चली गयी, उसने एक बार भी यह न सोचा रवीश व बच्चों के दिल पर क्या बीत रही होगी। रिन्कू ने जब यह सुना तो नानी के सर पर गिलास फेंक कर मार दिया ! "बुढ्डी नानी, तू मर जा मेरी मम्मा नहीं मरेगी", वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "अरे मार दिया रे, कैसी लड़की जनी जिया तूने, दोनों माँ-बेटी एक जैसी हैं !" रवीश को हँसी आ गयी, लेकिन उन्होंने रिन्कू को डांटा,"बड़ों के साथ ऐसे नहीं करते।" रिन्कू ने गुस्से से मुँह फूला लिया और छोटी बहन को अपनी गोद में उठा कर बोली चलो, " पापा मम्मा वहाँ अकेले हैं।"

रास्ते में रवीश ने ससुर को बताया, उन्होंने नौकरी छोड़ दी है, क्योंकि जिया नहीं चाहती, अब वह उसकी और बच्चों की देखभाल खुद ही करेंगे। "कोई बात नहीं रवीश बेटा, एक बार जिया ठीक हो जाये, फिर जो कहोगे वही कर देंगे, रूपये-पैसे की चिन्ता न करें, बस बच्चों व जिया का ध्यान रखें।

'मम्मा' रिन्कू अस्पताल में जा कर माँ के कानों में बोली, "देखों कौन आया है ! यह देखो निक्कू " और उसे माँ के पास ही बैठा दिया, इतने दिनों के बाद माँ को देख निक्कू उससे लिपट गयी और अपनी तोतली आवाज में मम्म म मम्म करने लगी। उसकी आवाज सुन जिया उठ गयी, "निक्कू मेरा बेबी, आ जा मेंरे पास" और उसे खुद से चिपका लिया, यह देख पिता और पति की आँखे छलछला उठी।

"जिया घर चलोगी ?" रवीश ने जिया से पूछा। असपताल में बहुत दिन हो गये थे, डॉक्टर्स ने भी डिस्चार्ज करने को बोल दिया।

जिया ने कोई जवाब न दिया, निक्कू को अपनी आगोश में लिए रही। सभी जिया को वापस घर ले आये। जैसे ही जिया अपने कमरे में पहुँची, उसने आँखे पलटनी शुरू कर दी, उसकी साँसें तेज-तेज चलने लगी। "जिया मैं तुम्हे यहाँ से कल ही ले जाऊँगा, हाँ मम्मा-पापा ने नया घर भी ले लिया है, रिन्कू बोली नाना ने भी कह दिया जहाँ जिया कहेगी, वहाँ ही रहेंगे, वो भी हमारे साथ जाएँगे।"

जिया, रवीश की आँखों में आँसु आ गये, तब तक नन्नू भी वहाँ आ गया, "पापा मम्मी को तुरंत ले चलो, अस्पताल जल्दी करो !" आनन फानन में नन्नू ने गाड़ी निकाली। सभी वापस अस्पताल चल पड़े। दीपक और रिया ने कहा, "वह भी आएँगे लेकिन रवीश ने इन्कार कर दिया।

अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टर चौक गये, "क्या हुआ इन्हें, ठीक तो थी यह किसी ने कुछ कहा तो नहीं ?"

"नहीं डॉक्टर किसी से कोई बात हुई ही नहीं ! घर जाते ही जिया की हालत खराब होनी शुरू हो गयी थी, हम तुंरत ले गये, " वहाँ गेट पर मौसा खड़ा था, मम्मा को घूर रहा था।"

जिया की पल्स बहुत धीमी चल रही थीं। कुछ ही देर में उसके शरीर ने हरकते करनी बन्द कर दी, " शी इज डेड, वी कैन डू नथिंग !!"

"नहीं, जिया, मुझे छोड़ कर मत जाओ, तुम नहीं जा सकती !" रवीश पागलों की तरह चिल्लाने लगा, पापा नन्नू रिन्कू भी रोने लगे। सबको रोता देख छोटी बच्ची भी रोने लगी। नन्नू ने रिन्कू से उसे ले लिया, "मत रो मेरी बहन, मैं हूँ न, आज से मैं ही तेरी मम्मा हूँ। हमारी माँ मर गयी, सबने ताने दे दे मार डाला।" वह जोर-जोर से रोने लगा, "मार डाला मेंरी माँ को !"

होनी बेरहम थी, मासूस बच्चों को रोता बिलखता छोड़ जिया दूसरी दूनिया में जा चुकी। वह हार गयी थी अपनों की नफरत से घूरती आँखों से। रवीश रो रहा था, " काश तुमने थोड़ा-सा वक्त दिया होता, जिया मैं तुम्हे वहाँ से दूर ले जा रहा था, तुम खुद ही इतनी दूर चली गयी।" वातावरण बहुत गमगीन हो चला, डॉक्टर व नर्सों ने हौसला दिया कि वह खुद को संभालें, बच्चों की खातिर।

शमशान में चिता पर जिया का मृत शरीर जल रहा था और रवीश पश्चाताप की ज्वाला में।

यह कहानी कैसी लगी आपकी प्रतिक्रयाओं का न्तजार रहेगा ।


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