पश्चाताप की ज्वाला [ भाग 1 ]

पश्चाताप की ज्वाला [ भाग 1 ]

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"रीया ! रीया !"

माँ ने पूरा घर छान लिया, छोटी बेटी का कहीं अता - पता नही। कहाँ गयी है किसी को कुछ पता नही !

माँ बडी बेटी के कमरे में आती है जो बच्चों को खाना खिला रही थी,

"जीया, तुमने रीया को देखा कही गयी है ? नही क्या? तुम्हे बता के नही गयी ?"

"नही माँ, मुझे नही पता। मै तो बच्चों के कामों में व्यस्त थी| आ जायेगी, अपनी किसी सहेली के घर गयी होगी|"

तभी नन्नू भागा - भागा गया और बैठक से एक पत्र लेकर आया माँ को थमा दिया ,

"यह क्या है ? किसका खत है ?"

"मौसी ने दिया था सुबह और कहा था जब सब मेरे बारे में पूछेगे तब देना।"

"अरी जल्दी पढ जीया !"

माँ के होश उड रहे थे,

"क्या लिखा है इसमें !"

जीया ने खत पढा और वही पडे सोफे पर निढाल हो गिर पडी |

"क्या हुआ तू बताती क्यो नही ?" - माँ चीख रही थी।

माँ को ऐसे देख जीया ने बताया कि रीया ने दीपक से शादी कर ली है और वह उसके साथ उसके घर जा रही है। तुम कभी उसकी शादी दीपक से नही करते इसलिए दोनों ने चुचचाप कोर्ट मैरिज कर ली है। अगर वह उसको खुश देखना चाहते है तो कोई बवाल न करना | वह उसके साथ बहुत खुश है |

छोटी बहन घर से चली गयी अपने प्रेमी के साथ। माँ ने अपने को बचाने के लिए इल्जाम बडी बहन पर लगा दिया कि उसी ने उसे घर से भगा दिया ताकि पूरे घर में आराम से रह सके क्योकि वह पिता की लाडली थी और उनका कोई पुत्र भी न था जबकि बडी बहन अपने बच्चों में व छोटी बहन में भेद न करती थी जितना प्यार वह अपने बच्चों से करती थी उतना ही अपनी छोटी बहन से भी करती लेकिन छोटी बहन , बडी बहन की परवाह न कर मौज मस्ती में रहती उसने घर से जाने से पूर्व अपनी बहन-जीजा माँ व पिता के बारे एक पल भी न सोचा कि उसके इस तरह जाने से सब पर क्या फर्क पडेगा |

थोडे दिन तक माँ रोती कलपती घुमती रही फिर चुप रहने लगी पिता की इज्जत पर जो बट्टा लगा उसकी वजह से उन्होने घर से निकलना छोड दिया , बडी बहन ने बिस्तर पकड लिया | इन सबसे परे छोटी बहन अपने प्रेमी के साथ ब्याह कर आराम से ससुराल में थी |

एक दिन रीया के पति को पता चलता है वह गर्भवती है तो तो वह उससे कहता है कि अपने पिता को इसके बारे में बता दो |

"नही, नही मै नही बता सकती वह मुझे कभी माफ न करेगे हमने उन्हे बिना बतायें विवाह किया अब मेरा रिश्ता नाता सब उनसे टूट चुका , मेरे हर बंधन अापसे जुडा है "

"वह तुम्हारे पिता है जब उन्हे पता चलेगा कि तुम पेट से हो तो वह में स्वीकार कर लेंगे।"

रीया चुप हो गयी और कुछ सोचने लगी, जब हम घर में बिना बतायें विवाह कर रहे थे तब तो एक बार भी नही कहाँ कि अपने पिता को बता दो अब जब खुद के पिता बनने की बारी आयी तो कहते है अपने पिता को बता दो , क्या बताऊ क्या वह यह न कहेंगे कि मेरी अनुमति ले थी जब चुपके चुपके ब्याह किया तब क्यों न बताया |

उसको यह लगने लगा कि दीपक अब बदल गया है बार बार मुझ पर घर में बात करने का दबाव बनाता है यदि ऐसा था तो घर से बिना बताये विवाह क्यों किया | ऐसे ही रीया सोचती रहती | बहुत सोचने के बाद उसने अपनी बडी बहन को पत्र लिखा अपना हाल चाल बताया व अपनी गल्ती के लिए माफी माँगी कि उन्होने किसी बिना बताये विवाह किया क्योकि वह जानती थी पिताजी दीपक से ब्याह के लिए कभी राजी न होंगे क्योकि वह उनकी नजरों बेकार व आवारा है जो सिर्फ दौलत के लिए उससे प्यार करता है जबकि दीपक ने कभी उससे ऐसी बात न की न ही कभी उसे पैसों के लिए तंग किया जबकि अपने ब्याह का सारा खर्च भी उसने खुद ही उठाया, वह अपने पति के साथ बहुत खुश है उसे उन सबकी बहुत याद आती है |‎रीया ने पत्र में अपनी दीदी को कहा कि वह पिताजी से बात करे और उन दोनों को माफ कर दे क्योकि वह अब माँ बनने वाली है |


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