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Ekta shwet

Inspirational

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Ekta shwet

Inspirational

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफ. डी)

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफ. डी)

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शर्मा जी के 3 पुत्र थे और तीनों पुत्रों की उन्होंने शादी कर दी थी।शर्मा आंटी का स्वर्गवास हुए 1 साल हो चुका था।शर्मा जी का अब रिटायरमेंट होने वाला था।शर्मा जी को जितना रिटायरमेंट का पैसा मिला उससे उन्होंने एक जमीन ली और बाकी पैसों की एफ डी करवाई। और यह एफ डी उनकी पुत्र वधूओं के लिए थी।शर्मा जी का यह मानना था कि बेटे तो बाहर रहते हैं पर असली सेवा बहुएं ही करती हैं अतः उनके प्रति सोचना बहुत आवश्यक है।यह विचारधारा उनके तीनों बहुओं को ही पता थी।वह शर्मा जी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ती थी।शर्मा जी की बड़ी बहू शर्मा जी का कमरा साफ करती एक टाइम के भोजन की व्यवस्था करती थी, छोटी बहू कपड़े धोती व शाम के भोजन की व्यवस्था करती थी, मंझली बहू कोई मेहमान आते उनके चाय नाश्ते की जिम्मेवारी और पिताजी को रामायण का पाठ सुनाना, पिताजी की हर जरुरत की चीज बाजार से बिना कहे लाना|तीनो बहुऐं अपना काम फर्ज और दिल से कर रही थी|

 एक दिन शर्मा जी का की तबीयत बहुत बिगड़ गई उन्हें ऐसा लगा मानो अब उनका जीवन बहुत कम है।उन्होंने तीनों बहुओं को बुलाया। तीनों से उन्होंने एक ही प्रश्न किया " तुम्हें मेरी एफ डी और जमीन सौंप दूं तो तुम उसका क्या करोगे।" 

बडी बहू ने तीनो का प्रतिनिधित्व करते हुए जवाब दिया "सबसे पहले तो मैं पिताजी हम तीनों की तरफ से आपको बहुत-बहुत धन्यवाद करूंगी कि आपने अपने भविष्य निधि से हमारे बारे में सोचा। जब हमें आपके इस फैसले के बारे में पता चला तो हमारे मन में आपके प्रति सम्मान और प्यार और बढ़ गया और महसूस किया कि हमें आपने बहू होते हुए भी पुत्रियों का दर्जा दिया है। और उसी दिन हमने आपके प्रश्न के लिए उत्तर सोच लिया था।पिताजी सबसे बड़ा अमूल्य उपहार तो आप ही हैं जिन्होंने हमारे परिवार को जोड़े रखा है।यह जो भविष्य निधि आपने हमारे लिए रखी है।उससे हम मिलकऱ एक छोटे बच्चों का स्कूल खोलना चाहेंगे।जिसका नाम आपके नाम पर रखा जाये और हम तीनों बहुएंं स्कूल को उसी भाव से संभालेंगे जिस भाव से आप की सेवा करी हैं, ताकि हमें एहसास रहे कि आप आज भी हमारे बीच में हैं।हमारे स्कूल के सभी बच्चों में वही संस्कार आये जो आपने और मां ने हमारे बच्चों को प्रदान किए हैं।हम तीनों के लिए बहुत गर्व की बात होगी कि हम अपनी आर्थिक स्थिति को भी उस स्कूल के माध्यम से सुदृढ़ कर पाएं|"

यह सुनकर शर्मा जी की आधी तबीयत ठीक होने लगी और उन्हें अपनी बहुओं पर गर्व सा महसूस होने लगा। उन्होंने यह तय किया कि उनकी जमीन पर एक स्कूल बनाया जाएगा और उसे वह तीनों बहुऐ संभालेंगी। 

शर्मा जी तो स्कूल की नींव रख गए।और चल बसे।लेकिन उनकी बहुओ ने एफ डी को विद्यालय का साकार रुप देकरें हमेशा के लिए शर्मा जी को अमर कर दिया|


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