पेड़ वाला बाबा
पेड़ वाला बाबा
सुबह सुबह मैं छगनू भाई के घर के सामने वाले रास्ते से गुजर रहा था तभी उसके घर के अन्दर से रोने की और कुछ बड़बड़ाने की आवाजें आ रही थी ऐसा लग रहा था कि मानो दो तीन आदमी आपस में बहस कर रहे हो । पर ऐसा कैसे हो सकता है घर में वो तो अकेला ही रहता है तो ये आवाजें..?? घर के अन्दर जाकर देखना चाहिए़ जैसे ही मैं घर के दरवाजे पर पहुंचा तो हक्का बक्का रह गया । छगनू के पास कोई नहीं था वो अकेला ही बड़बड़ाते हुए रो रहा था । जैसे ही मैं घर के अन्दर पहुंचा वैसे ही छगनू मुझे देखते ही मेरे सीने से लग कर और जोर से रोने लगा । क्या हुआ छगनू ? क्यों रो रहे हो ऐसे ? क्या बताऊं बली तुम्हें... मेरा पूरा परिवार । हां भाई तेरा पूरा परिवार । नहीं बली... सब मेरी ही गलती है । नहीं छगनू तेरी गलती नहीं सब भगवान की मर्जी होती है हम सब भगवान के ही नुमाइंदे है वो जैसे हमें रखेगा हमें वैसे ही रहना पड़ेगा । रोते रोते छगनू ये तो है लेकिन मेरे बड़े बेटे का देखा ना वो कैसे मरा था कोरोना के कारण , उस समय मेरे पास उसे अस्पताल में भर्ती करवाने एवं ऑक्सीजन दिलाने के पैसे नहीं थे... फिर कुछ समय के बाद मेरा छोटा बेटा लादू वो भी वैसे ही... फिर मेरी बेटी और फिर तेरी भाभी... मेरे पास किसी के इलाज के लिए पैसे नहीं थे ।
मुझे आज समझ में आ रहा है कि मैं जिन पेड़ों को जिन्दगी भर काटता रहा उनसे मिलने वाली प्राण दायिनी ऑक्सीजन के लिए मेरा पूरा परिवार तड़प तड़प कर मर जाएगा । ये मैं नहीं जानता था । मुझे इन पेड़ों को काट कर घर चलने का काम करना ही नहीं चाहिए था । देखो आज मैं बुढ़ापे में अकेला हो गया कोई मेरे साथ नहीं है ।
भाई तेरा परिवार तो नहीं है लेकिन अब हम सब ही तेरा परिवार है । अब रो मत । तुमने जिन्दगी भर जो काम किया है तुझे उसका पछतावा हो रहा है और तुम्हे ये भी लगता है कि तूने जो किया है भगवान ने तुझे उसका फल दिया है तो चल आज से तू वो कर जिससे तेरा पछतावा कम हो और आने वाली पीढ़ी तुझे याद रखें । क्या कहना चाहता है तू बली ? तुझे लगता है ना तेरे पेड़ काटने की सजा तुझे मिली है तो अब तू पेड़ लगा और इतने लगा कि हर तरफ हरियाली हो जाए.. । हां बली अब मैं ये ही करूंगा मेरी आखिरी सांस तक । अब किसके लिए रोऊं कोई मेरा सगा तो रहा नहीं.. अब तो पेड़ लगाने और उन्हें बचाने का काम ही करूंगा ।
बरसात का समय आया और छगनू ने बहुत सारे पेड़ लगाए और उनकी देखभाल करने लगा । धीरे धीरे गांव के लोग भी छगनू के साथ लग गए और उसके द्वारा लगाए गई पेड़ की देखभाल करने लगे और साथ ही साथ और पेड़ लगाने लगे । देखते देखते पेड़ बड़े होने लगे । छः सात साल में तो पूरा गांव और आसपास का क्षेत्र हरा भरा हो गया ।
एक दिन अचानक से छगनू की तबियत खराब हुई तो मैं और गांव के ही दो तीन लोग उसे अस्पताल लेकर जा ही रहे थे कि रस्ते में ही छगनू ने आखिरी सांस ली फिर भी हम अस्पताल पहुंचे । डॉक्टर साहब ने देखते ही कह दिया ले जाओ अब ये जीवित नहीं है । हम वापस गांव की तरफ चल दिए । छगनू के घर पहुंचे और अंतिम यात्रा से पहले किए जाने वाले सभी विधि-विधान किए और श्मशान घाट की ओर चल दिए ये छगनू की अंतिम यात्रा थी । मैं मन ही मन सोच रहा था कि छगनू अपने लगाए पेड़ों को देख रहा होगा और शकुन महसूस करता हुआ अपनी अंतिम यात्रा की ओर जा रहा है । श्मशान घाट की ओर जाते हुए गांव वाले नारे लगा रहे थे "पेड़ वाले बाबा की जय" "पेड़ वाला बाबा अमर रहे" "जब तक सूरज चांद रहेगा पेड़ वाले बाबा आपका नाम रहेगा" "पेड़ वाला बाबा अमर रहें..."
अब छगनू छगनू ना रखकर "पेड़ वाला बाबा" बन गया । मेरे भी मन में ये चल रहा था "पेड़ वाला बाबा अमर रहे.."
श्याम{राज}...✍️
