आधुनिकता के चटकारे या भविष्य खराब
आधुनिकता के चटकारे या भविष्य खराब
शाम का समय और गांव के बस स्टैंड पर बने चबूतरे पर कुछ लोग ताश खेल रहे कुछ लोग महेश काका की चाय की दुकान पर बैठे चाय पी रहे हैं और आने वाली गर्मी की बात कर रहे थे ।
पिछले साल बहुत ज्यादा गर्मी थी तुमने देखा था ना नारायण कितने ही जानवर और पंछी मर रहे थे । दस बजे के बाद तो घर से निकलना कितना मुश्किल हो गया था । बाजार का कोई काम भी होता था वो या तो सुबह दस बजे से पहले या शाम को पांच बजे बाद ही करना हमारी मजबूरी सी हो गई थी । पर कर भी क्या सकते है कुदरत के आगे तो हम सब मजबूर ही है ।
हां गोपाला तू सही कह रहा है बहुत कुछ दिखा था और देख अभी भी देख रहे है । पर इसमें हम भी तो जिम्मेवार है । हम ही तो है जो पेड़ काट कर आधुनिकता की और भाग रहे हैं । हमें भी तो चटकारे चाहिए नए जमाने के ।
ओ भाई नारायण क्या कह रहा है । हमें भी चटकारे चाहिए नए जमाने के इसका क्या मतलब है तेरा ?
देख भाई गोपाल । जब हम छोटे थे तब हमारे गांव में कितने सारे पेड़ थे हर तरफ हरियाली ही हरियाली थी । सबके पास बड़े बड़े खेत थे । बहुत फसल होती थी । सब आपस में मिल जुल कर रहते थे । और अब देख भाई भाई के पास नहीं रहना चाहता थोड़ा सा समझदार हो गया जमीन में हिस्सा चाहिए किसी एक के खेत में एक पेड़ ज्यादा आ गया तो पहले उसे कटवाएंगे और तो और जो थोड़ी बहुत जमीन हिस्से में आई है उसके लिए भी हर साल लड़ते रहेंगे । शादी ब्याह में ऐसी छोटी छोटी लड़ाईयों के कारण अपने सगे भाई को भी नहीं बुलाते इसलिए तो वो कहावत कही गई है "भाईबंद बाकी सब आवो जावो" ।
चल ये तो अपनी ही बात हो गई । तू देख रहा है ना अब हमारे आस पास कितनी हरियाली रह गई है । गांव में चार पांच साल पहले रेल्वे का काम चला था और हमारे खेत गए थे तब हमने कितने ही पेड़ काट डाले थे । रूड़ा बाबा के खेत में सबसे ज्यादा पेड़ थे और जब उस खेत में सीमेंट की फैक्ट्री लगी थी तब सारे पेड़ काटे गए और तो और तेरे खुद के पास वाली जमीन में मोबाइल टॉवर लगा तब उस खेत के सारे पेड़ काटे गए । और आजकल तो हर कोई अपने अपने खेतों में सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पन कर पैसे कमाने के लालच में सारे के सारे पेड़ काट रहे है । ये सब हमारे आधुनिकता के चटकारे ही तो है और क्या है ये सब ।
जब हम सारे के सारे पेड़ काट देंगे तो हरियाली कहा बचेगी और जब हरियाली नहीं बचेगी तो बादल कहा से बनेंगे और जब बादल नहीं बनेंगे तो बरसात कहा से होगी और जब बरसात नहीं होगी तो गर्मी ही रहेगी लू चलेगी जानवर और पंछी मरेंगे और हम सब घर से बाहर निकलने के लिए सुबह दस बजे से पहले और शाम के पांच बजने का इंतजार करेंगे ।
भाई नारायण तू ये जो सब कह रहा है ये सब थोड़ा थोड़ा मुझे समझ में आ रहा है तेरे कहने का मतलब ये है कि ये सारा खेल पेड़ काटने की वजह से हो रहा है ।
हां भाई ये सारा का सारा खेल पेड़ काटने की वजह से ही हो रहा है । हम सबको मिलकर पेड़ लगाने चाहिए नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ियों हमें गलत समझेगी कि हमने उनका भविष्य खराब कर दिया ।
श्याम{राज}...✍️
