Ragini Sinha

Tragedy Inspirational


4.4  

Ragini Sinha

Tragedy Inspirational


पछतावा

पछतावा

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मोहित अपने माँ बाप का इकलौता सन्तान है। उसके माँ बाप मजदूरी करके भरण पोषण करते थे। उनका एकमात्र जीविका मजदूरी और खेती थी। अपने बेटे की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी। उसे अच्छी अच्छी शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका सपना है कि उनका बेटा भी पढ़ लिखकर शहर में कोई अच्छी जॉब करे। ताकि वो भी बेटे के साथ शहर में रह सके।

आज मोहित का किसी कम्पनी से नियुक्ति पत्र आया है। उसे पाकर मोहित और उसके माँ बाप बहुत खुश है। माँ की खुशी का ठिकाना नहीं ।अभी से शहर जाने की तैयारी करने लगी। मोहित ने समझाया माँ अभी मुझे ही कोई आइडिया नहीं है शहर के बारे में। पहले जाकर पता तो कर लूं। वहाँ रहने का घर कैसा दिया है कम्पनी ने। ये सब पहले समझ तो लूं।उसके बाद आप दोनो को भी ले चलूँगा। भारी मन से माँ बाप ने मोहित को विदा किया। पहुँचते ही फ़ोन करना बेटा। डबडबायी आँखों से माँ ने विदा किया।

पहली बार शहर आकर मोहित मानो सातवे आसमान पर उड़ रहा था। बहुत खुश था अपना छोटा सा फ्लैट पाकर। फ़ोन पर माँ से शहर की बहुत सारी बातें बताता। माँ भी बहुत खुश होती बेटे की बातें सुनकर।

मोहित अपने कम्पनी में सबका चहेता बन गया था। बनता क्यों नहीं नाम के अनुसार ही वो सबका दिल जीत लेता और अपनी ओर मोहित कर लेता। मोहित के साथ ही नैना भी काम करती थी। नैना मोहित की ओर कुछ ज्यादा ही आकर्षित हो गयी थी। धीरे धीरे दोनो की दोस्ती मोहब्बत के रंग में रंग गयी।

बॉस और अन्य सहयोगियों के नजर से बच न पाये और दोनो को शादी के पवित्र बंधन में बांध दिया गया। मोहित के बॉस ने ही शादी का सारा कार्यभार सम्भाला। मोहित ने अपने माँ बाप को बताना जरूरी भी नहीं समझा। नैना ने एकदिन टोका भी की गाँव से माँ पिता को यही बुला लीजिए। हम सब एक परिवार ही तो है, लेकिन मोहित को लगता था शादी के बारे में कुछ नहीं पता है, अगर उन्हें ये सब पता चलेगा तो बहुत बुरा लगेगा। नैना भी इसके आगे कुछ न बोल सकी।

वक्त पंख लगा कर उड़ता रहा मोहित अपनी जिंदगी में इतना रम गया कि माँ पिता को अब फ़ोन करना भी भूल जाता। रोज कल पर ताल कर भूल ही जाता। उधर माँ बाप चिंता में रहते की कब उनका बेटा उन्हें लेने आएगा।

एक दिन मोहित बाजार से लौटते वक्त सब्जी खरीदने लगा। उसकी नजर एक वृद्धा पर पड़ी। देखने में काफी कमजोर और सुस्त लग रही थी। मोहित ने उससे पूछा क्या हुआ माई आपकी तबियत ठीक नहीं है। वृद्धा ने डबडबायी आँखों से मोहित को देखा और बताई की उसका पति लम्बे समय से बीमार है।उसकी दवाई खत्म हो चुकी है और आज सब्जी भी नहीं बिका। मोहित ने पूछा घर मे कोई नहीं है।बेटा बेटी नहीं है। उसने बताया बेटी ससुराल में है कभी कभी आकर देखभाल कर जाती है। और बेटा शहर में रहता है।उसे छुट्टी नहीं है हमसब के लिए। बोलकर गया कि शहर लेकर चलूँगा आप दोनो को।लेकिन कई साल हो गए बीबी बच्चे के साथ उसने अपनी दुनिया वही बसा ली। कभी खबर भी नहीं लेता। मोहित के आगे अपनी माँ की डबडबायी आँखें तैर गयी, जो गाँव छोड़कर शहर आते वक्त देखा था। उसने तुरंत अपनी पॉकेट के सारे पैसे वृद्धा को देते हुए कहा-माँ जी आप इससे दवा ले लेना। और ये रहा मेरा नंबर जरूरत हो तो एक फ़ोन कर देना। आनन फानन में उसने सब्जी भी नहीं ली और तुरन्त अपने फ्लैट में लौट गया। अंदर घुसते ही मोहित ने नैना को कहा नैना अपने घर चलने की तैयारी करो। कल सुबह ही निकलेंगे। नैना समझ गयी थी कि उसे अपने ससुराल जाना है। वो बहुत खुश हुई। रात भर मोहित करवटे बदलता रहा कब सुबह हो और अपने माँ पिता को गले लगाकर माफ़ी मांगे। उसे पछतावा हो रहा था कि माता पिता के बिना हमारा घर परिवार कभी पूरा नहीं हो सकता।


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