STORYMIRROR

Thakkar Nand

Classics

3  

Thakkar Nand

Classics

पैतृक धन

पैतृक धन

3 mins
217

एक बार की बात है कृष्णदेव राजा के दरबार में एक व्यक्ति आया। उस व्यक्ति के हाथ में एक लोहे का बक्सा था। जिसमे ताला लगा हुआ था। वह राजा से बोला की इस बक्से में मेरे पूर्वजो की धन सम्पति है।

आप इसको अपने पास रख लो जिससे की मै उत्तर भारत के सभी मदिरें में दर्शन के लिए जा सकूँ। राजा ने उस व्यक्ति की बात को मान लिया। इसके बाद वह व्यक्ति वहाँ से चला गया।

राजा ने अपने सेनिको से कहा की इस बक्से को राज खजाने में रख दो। इस पर एक मंत्री बोला की महाराज राज खजाने में तो केवल शाही खजाना ही होना चाहिए। आप इसको अपने प्रिय सलाहकार तेनाली राम को दे दीजिये।राजा ने मंत्री की बात को मानकर बक्से को तेनाली राम को रखने के लिए दे दिया। जब तक वह व्यक्ति लौट कर नहीं आता। तेनाली राम ने बक्सा ले जाकर अपने घर में रख दिया। 6 महीने के बाद वह व्यक्ति लौट आया और राजा से अपना बक्सा मांगने लगा।

राजा ने तेनाली राम को बक्सा लाकर व्यक्ति को देने को बोला। जब तेनाली बक्सा लाने घर गया तो उसने देखा की बक्से का वजन पहले से कम हो चूका था।उसको पता चल गया था की व्यक्ति बेवकूफ बना रहा है। इसके बाद वह खाली हाथ ही दरबार में गया और उस व्यक्ति से बोला की मै तुम्हारा बक्सा नहीं ला सकता क्योंकि तुम्हारे पूर्वज हमारे घर आ रखे है।

उस व्यक्ति ने राजा को कहा की तेनाली राम झूठ बोल रहा है यह मेरे खजाने का बक्सा नहीं देना चाहता। तेनाली राम ने राजा से भी वहीं बात कहीं। इसके बाद राजा बोले की हम सब तुम्हारे घर जायेंगे।

यदि तुम्हारे घर में इसके पूर्वज नहीं मिले तो तुमको सजा मिलेगी। तेनाली राम इसके लिए मान गया। इसके बाद सभी तेनाली राम के घर गए। वहाँ जाकर सबने देखा की बक्से के अंदर चीटियाँ जा रही थी।राजा ने बक्से को खोलने का आदेश दिया। जब बक्से को खोला गया तो उसमे चीनी भरी हुई थी। राजा ने उस व्यक्ति को कहा की तुमने हमको बेवकूफ बनाने की कोशिश की।

वह व्यक्ति बोला की यह उसने एक मंत्री के कहने पर किया है जो तेनाली राम को फसा कर सजा दिलाना चाहता था। राजा ने उस व्यक्ति और मंत्री दोनों को जेल में डाल दिया। राजा ने तेनाली से पूछा तुमको यह कैसे पता लगा की बक्से में खजाना नहीं है।

तेनाली राम ने कहा की मै जब भी कभी देखता था तो उस बक्से के आसपास चीटियां ही नज़र आती थी। अगर उसमे खजाना होता तो वहाँ चीटियाँ नज़र नहीं आती। इसलिए मैंने चीटियों को उसके पूर्वज कहा। राजा ने तेनाली की बुद्धिमानी की तारीफ की।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Classics