पापा याद न आया करो
पापा याद न आया करो
कहते है कि समय सब घाव भर देता लेकिन पता नहीं क्यों आपको खोने की मेरी टीस कम नही हो रही। आपके प्यार ने जितना मेरे मन-जीवन को अपने प्यार की परिपूर्णता से पल्लवित और सुरभित किया था, उतना ही ज्यादा उसको खोने का एहसास मेरे सम्पूर्ण अस्तित्व और अंतर्मन को एक अव्यक्त शून्यता से भरता जा रहा है।
आपके साथ बिताये क्षणों की मिठास की कसक, सपनों को पूरा न कर पाने का अधूरापन, आपकी बीमारी के दौरान हर वक्त आपके साथ न रह पाने का अपराध बोध, अंतिम समय आपके पास न होने का पछतावा- पश्चाताप, ये सब मुझे आपको भूलने नहीं देते।
दसवीं की बोर्ड की परीक्षा के समय, जब सबके पापा केबल कनेक्शन कटवा देते थे, आप मुझे तनाव मुक्त रखने के लिए जबरदस्ती टीवी दिखाते थे।
बचपन में टाइफायड होने पर मई की चिलचिलाती धूप में, इतनी दूर ऑफिस से साइकिल से मुझे देखने के लिए आना।!!
शादी के बाद जब भी वापस आती तो चलती गाड़ी के पीछे देर तक भागते रहना, और मेरे साथ साथ कोच की सभी महिलाओं को भी रूला जाना !!
बच्चों की गर्मियों की छुट्टियाँ होते ही पहली गाड़ी से लेने आ जाना।
मेरे जाने के दिन से दो दिन पहले ही गुमसुम उदास हो जाना !!
कैसे भूल जाऊँ मैं?
इसी न भूल पाने की कसक को भूल जाना चाहती हूँ।
समय सब घाव नहीं भर पाता है तभी तो---
मेरे घाव हैं कि रिस रिस कर आँखो के रास्ते बहते रहते हैं और उन्हें पोंछने के लिए आपके स्नेहासिक्त ,आत्मीयता की गर्माहट भरे हाथ भी नहीं अब।
पापा याद न आया करो
जब भी देर तक सोऊँ मैं
आकर मुझे जगाया करो।
जब भी खाने बैठू मैं
थोड़ा और खिलाया करो।
गलत जब भी कुछ करूँ
डांट के मुझे समझाया करो।
उदास निराश जब भी सोऊँ मैं
सिर पे हाथ फिराया करो।
खुशियों के लम्हों को
संग साथ में बिताया करो
भूलोगे आप कभी नहीं
पर पापा याद न आया करो।
