पांच साल
पांच साल
देखो अब से कुछ दिनों बाद वो दिन आने वाला है जब मैंने पहली दफा देखा था तुम्हें... सफेद सूट और वो लाल चुन्नी... शॉर्ट हाइट, साइड क्रॉस पर्स के साथ... एक दम गुड़िया सी लग रही थी.... या यूं कहूं गुड़िया ही तो हो आज भी.... मासूम और एकदम नादान....!
पांच साल हो गए तुमको जानते हुए और कुछ दिन बाद अपनी उस पहली मुलाक़ात को चार साल हो जाएंगे ......ये पांच साल तुम्हारे लिए बहुत से नये तजुर्बे लेकर आया होगा... नये दोस्त...नयी ऊंचाइयां और बहुत कुछ!
लेकिन मेरे तो ये पांच साल पांच सौ साल की तरह बीते हैं... जिनको शब्दों में पिरोने बैठूं तो शायद कई साल लग जायें....इतना कुछ हुआ तुम टूटी मैं टूटा और आज देखो टूट गया हमारा वो रिश्ता। बहुत कोशिश करने के बाद भी आज खुद को जोड़ने की हिम्मत नही जुटा पाता यही कारण है की अनकही रह गई मुहब्बत मेरी.... एक अनछुए ख्वाब की तरह.... जिसे देखता तो रोज हूँ मगर न कभी पूरा कर सका ना उम्मीद बनी पर उम्मीद कभी टूटी भी नहीं.. तुम्हें कभी दिल का हाल बताया भी नहीं और तुमसे कुछ छुपाया भी नहीं.....
तुमसे नजरें कभी मिलाई भी नहीं और तुम्हारे सामने होने पर तुमसे नजरें कभी हटाई भी नहीं.....!
इस फेसबुक की सर्च लिस्ट में आज तक सबसे ऊपर तुम ही रहती हो और रहोगी.....कितनी ही बार तुमको खुद से अनफ्रेंड किया फिर ब्लॉक किया फिर खुद ही अनब्लॉक करके ऐड किया.....जाने कितनी बार तुम्हारा नम्बर डायल कर करके हटाया... जाने कितने मैसेज टाइप करके मिटाये......!
ये सब यादें तो यादें हैं अतीत के पन्नों में हमेशा रहेंगी वैसे ही जैसे मेरा इश्क है तुमसे जो सदैव रहेगा और वक्त के साथ बढ़ेगा सिर्फ बढ़ेगा .....!
हा ये वही वाला इश्क़ था जो मासूम होता है एक दम उम्र के शुरुआत में होने वाला इश्क़ । जानती हो भले ही मेरा इश्क़ मुक्कमल नहीं हुआ भले ही इसको छीन के गए वो तारे जो मुझसे ज्यादा चमकने की काबिलीयत रखते है लेकिन इस इश्क़ ने मुझे टूट कर भी मुस्कुराना और सब कुछ ठीक न रहते हुए भी सब ठीक लगना सीखा दिया ।
आज से सालो बाद जब कभी किसी जगह मिलेगी हमारी नजरें तो शायद वो इतनी कमजोर हो चुकी होंगी की एक दूसरे को पहचान न पाए लेकिन फिर भी उस फ़िज़ा की सुगंध हमें एहसास करा देगी हमारे होने का। जानती हो तुमको जितना बचाना चाहा मैंने तुम उतना ही दूर गयी मुझसे । तुम भले ही कहि चली जाओ... मैं तुममें उतना ही मौजूद रहूंगा जितना होता है आँखों में काजल , जितनी सजाती हो तुम अपने माथे पर बिंदिया ।
मेरे होने का एहसास तमको कभी हुआ ही नहीं जानता हूँ मैं, तमको रोशनी पसन्द है तुमने तभी तो चुना था उस तारे को जो चमका था सबसे ज्यादा । देखो आज ये वक़्त फरेबी और मैं कितना मतलबी सा हो गया हूँ।
आंसुओं को पीते पीते कब शराब पीना शुरू कर दिया मुझे पता तक नहीं चला , पीना अच्छा नहीं होता लेकिन अब ये शराब मुझे मुझसे जब मिलो दूर ले जाती है जहाँ मेरी कैफियत पूछने वाला कोई नही होता तो ये मुझे मेरी हमनवा लगने लगती है और यकीन मानो मैं ज़िंदा तो हूँ और उम्मीद करता हूँ की ये ज़िन्दगी मुझसे उतना ही प्यार करेगी जितना मैंने किया था उस लड़की से जिसने अपने नाम से साथ साथ खुद को भी बदल दिया ।

