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Prateek Tiwari (तलाश)

Abstract Drama Inspirational

5.0  

Prateek Tiwari (तलाश)

Abstract Drama Inspirational

नौकर

नौकर

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प्रेरणा यूँ तो शांत स्वभाव की थी, मगर आज अपनी नौकरानी शीला पर ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी । शीला, प्रेरणा के घर पर एक साल से काम कर रही थी । सुबह आठ बजे से लेकर शाम के छः बजे तक घर का हर काम बिना रुके करती थी । आज शीला ने अपनी बीमार माँ को डॉक्टर के पास लेकर जाने के लिए प्रेरणा से दो घंटे पहले जांने की इजाज़त माँगी थी ।हालाँकि प्रेरणा ने इजाज़त दे दी थी, पर इस असमय की छुट्टी से वो क्रोधित हो गयी थी ।

शीला के जाने के बाद प्रकाश ने प्रेरणा के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा “क्यों ग़ुस्सा हो भई ? दो घंटे की ही तो छुट्टी ली है ।”

प्रकाश के प्रश्न ने जैसे प्रेरणा के किसी ज़ख़्म पर नमक छिड़क दिया हो । “हाँ हाँ तुम तो कहोगे ही, तुम्हें तो कुछ करना पड़ता नहीं, करना तो मुझे ही है, तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है ? तुम्हारा बस चले तो इसे निकाल भी दो । हूँ न मैं काम करने के लिए ।” प्रकाश का हाथ हटाते हुए प्रेरणा ने कहा ।

इससे पहले की प्रकाश कुछ बोले, प्रेरणा अपनी भड़ास निकालते हुए बोली, “ महीने में दो छुट्टी लेती है फिर भी मैडम को शर्म नहीं आयी । दो घंटे पहले निकल गयी ।मुफ़्त के पैसे लेना चाहते हैं ये लोग। कामचोरी की हद होती है। अभी पिछले महीने ही एक साल हो जाने पर उसके बिना कहे , मैंने अपनी तरफ़ से पूरे दो सौ रुपए पगार बढ़ाई थी , लेकिन नहीं ! कोई क़द्र ही नहीं । और पता नहीं, क्या क्या बड़बड़ाते हुए मोबाइल फ़ोन हाथ में लेकर प्रेरणा बालकनी में चली गयी । प्रकाश भी अपने काम में व्यस्त हो गया ।

अचानक फ़ोन के पटकने की आवाज़ से प्रकाश का ध्यान भंग हुआ । “अरे अब क्या हुआ मेरी जान । अब किसी ने क्या किया।" प्रकाश ने प्यार भरे लहजे में प्रेरणा को शांत करते हुए कहा ।

“ दीज़ बॉसेज़ । टू हेल विद देम।”

“अरे कुछ बताओगी या यूँ ही गरियाती रहोगी।"

प्रेरणा पानी पीते हुए ग़ुस्से में बोली, “ कल मम्मी को देखने जाने के लिए एक दिन की छुट्टी क्या माँग ली, ऐसा लग रहा है जैसे उस साले की दौलत माँग ली हो । पैसे देते नहीं, काम पूरा लेते हैं और छुट्टी देते समय इनकी नानी मर जाती है।"

प्रशांत उसे देखकर मुस्करा रहा था ।

“तुम क्या मुस्करा रहे हो । देखा नहीं ? इस बार का मेरा इंकरेमेंट लेटर । सिर्फ़ दस प्रतिशत का इंकरेमेंट दिया है । मेरे साथ वाले सभी लोग पचीस लाख के ऊपर का पैकेज ले रहे हैं और मैं अभी बस अठरा लाख पर हूँ । पैसे बढ़ाते नहीं और छुट्टी देनी नहीं । बताओ दस प्रतिशत कोई इंकरेमेंट होता है पगार में और छुट्टी वो तो मेरा राइट है न ? बंधुआ मज़दूर हूँ क्या ? अब देखती हूँ कैसे काम करवाता है मुझसे ।” ग़ुस्से ग़ुस्से में वह दो तीन गिलास पानी पी गई ।

प्रकाश ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा ।

“अब क्या ? “

कुछ नहीं सोच रहा था कि तुम सही कह रही हो “ दीज़ बॉसेज़ । टू हेल विद देम।” ये कहते हुए प्रकाश एक क़ातिल अन्दाज़ में मुस्करा रहा था ।

प्रेरणा प्रकाश का इशारा समझ गई थी और निराश होकर रात के खाने की तैयारी में जुट गयी ।


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