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Varsha abhishek Jain

Drama

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Varsha abhishek Jain

Drama

मुझे रोके ऐसी लाल बत्ती नहीं

मुझे रोके ऐसी लाल बत्ती नहीं

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"मम्मी जी मैं आज प्रीति के साथ मार्केट जा रही हूँ, उसका फोन आया था कि उसे कुछ शॉपिंग करनी है और सुपर मार्केट में सेल लगी है तो आज जाके घर का समान ले आऊं।"

"अरे बहू पहले क्यों नहीं बताया? अभी तो घर का काम बाकी है। खाना बनाना है, साफ सफाई और मुझे भी शाम को कीर्तन मे जाना है, तू और कभी चली जाना"।

"मम्मी जी मुझे 3 बजे जाना है और कीर्तन में तो अपको 6 बजे जाना है। जाने से पहले सब काम निपटा लूगीं और आपके जाने से पहले आ जाउंगी।"

आज तो सिया ने भी इरादा पक्का कर लिया था कि आज तो बाजार जाके रहेगी।

सिया की सासू माँ हमेशा ही उसे कहीं जाने नहीं देती। कभी बहाने से रोक लेती तो कभी जबर्दस्ती, सिया मन मसोस के रह जाती।

कल ही सासू माँ की सहेली सविता जी आई हुई थी। पिछले सप्ताह उनके घर संगीत का प्रोग्राम था, उन्होंने सिया को कहा तुम आई क्यों नहीं पूरी सोसाइटी आई थी? बस तुम ही नहीं आई।

सासू माँ ने बीच में अपनी बात शुरू कर दी हम भी बोल बोल के परेशान हो गए हैं सविता कि घर के बाहर भी निकला करो, सोसाइटी वालों से मेल जोल करो। पर इसे तो बस घर के काम से ही फुर्सत नहीं है। कहीं भी नहीं जाती, हम तो कभी मना नहीं करते कही जाने से, ये ही तो दिन हैं घूमने फिरने के।

सिया को ये बात बहुत बुरी लगी, सासू माँ हमेशा काम के लिए उसे कहीं भी जाने नहीं देती, हमेशा खुद ही चली जाती ये बोल के कि तू जाए या मैं एक ही बात है।

अब उसने सोच लिया कुछ भी हो अब वो घर से बाहर जाएगी। वैसे भी सब ये ही बोलते हैं ये नहीं जाती हम कौनसा मना करते हैं।

"मम्मी जी मैंंने कीट्टी जॉइन कर ली, सब सहेलियाँ पीछे ही पड़ गयी तो सोचा कर लेती हूँ। महीने में बस एक बार जाना है, आप ही बोलती हैं बाहर जाया करो तो सोचा शुरुआत कर देती हूँ। शाम को सोचती हूँ रोज़ाना आपके साथ पार्क में घूम आऊं, ऐसे स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और सोसाइटी में जान पहचान बढ़ जाएगी।"

"और घर का काम कौन करेगा? कोई जरूरत नहीं है, घर में रहो" सास ने गुस्से से कहा। 

"काम का क्या है मम्मी जी, आप और मैं मिल कर निपटा लेंगे। वैसे भी आप मुझे कोई चीज़ के लिए मना थोड़ी करती हैं !


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