मेरे प्रेरक
मेरे प्रेरक
बात 1970 की है, जब मैंने म्युनिसिपल स्कूल ,दुर्ग (छत्तीसगढ़) में नवीं कक्षा में प्रवेश लिया था।
हमारे एन सी सी (राष्ट्रीय छात्र सेना )के शिक्षक थे, श्री के के यादव।
शिक्षक ने मुझसे कहा "देखो विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, मेहनत, कार्य के प्रति निष्ठा आवश्यक होते हैं। तभी तुम किसी भी कार्य में, सफलता प्राप्त कर सकते हो।"
मेरा तथा शिक्षक का संबंध, गुरू और शिष्य से कुछ ज्यादा का ही था। वे मुझे हर बात जो, भविष्य को मजबूत बना सकती थी, सिखाते थे और अपना समझकर बताते थे, वह भी प्रायोगिक रुप से।
स्कूल में, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। मुझे देश भक्ति का एक गीत और नृत्य, अपने साथियों के साथ स्टेज में करना था।
मुझे अपने ग्रुप का नेतृत्व, करने के लिए चुना गया था।
शिक्षक रिहर्सल करवा रहे थे और मैं प्रयास करने के बाद भी, परफेक्ट नहीं कर पा रहा था।
शिक्षक ने मुझसे कहा "आओ, मेरे साथ, कुछ देर रिहर्सल का विश्राम समझ लो।"
वे मुझे लेकर अपने रूम में बैठ गये। मुझसे कहा "देखो तुम ग्रुप लीडर हो। पहले देखो कि जो कर रहे हो ,उसमें तुम कितना इन्वाल्व हो रहे हो। मैंने देखा है कि तुम गीत और नृत्य में पूरी तरह से डूब कर, आत्मसात नहीं कर पा रहे हो। मुझे, तुम में आत्मविश्वास की कमी नजर आ रही है और इसका प्रभाव ,दूसरे साथियों पर भी पड़ रहा है। इस तरह तो तुम अपना बेस्ट नहीं दे पाओगे और जब मेरी बात को मानोगे, तभी बेस्ट प्राइज भी जितोगे।"
उनकी बातें सुनकर मैं, बहुत ही प्रभावित हुआ। उसके बाद उन्होंने वह एक्ट प्रायोगिक रुप से करके भी दिखाया। इस प्रस्तुति के बाद, स्कूल प्रबंधन ने मुझे, बेस्ट परफार्मर का एवार्ड भी दिया था।
यादव जी (हमारे शिक्षक) की बातें, मेरे जीवन में हमेशा, प्रेरित करने का कार्य करती रही।।
