STORYMIRROR

डॉअमृता शुक्ला

Inspirational

3  

डॉअमृता शुक्ला

Inspirational

मातृभूमि

मातृभूमि

2 mins
144

रवि को पूरा यकीन था कि वह ओलम्पिक में अपना बेस्ट परफॉर्मेंस देगा ।उसके आत्मविश्वास का ही नतीजा था कि वह गोल्ड मैडल का हकदार बन गया।सबसे पहले उसने अपने मेडल को चूमा और अपनी भारत मां का नाम लेकर धरती को प्रणाम किया।सारे देश में , उसके गांव में खुशी की लहर दौड़ गयी,मिठाइयाँ बांटीं गईं।

प्रधानमंत्री से लेकर सभी बड़ी हस्तियां उसे बधाई और शुभकामना संदेश देने लगे।खुशी की बात तो थी ही ,आखिर 13 साल बाद एथलीट मे गोल्ड-मैडल मिला। सारे खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में मीडिया वाले नीरज के माता पिता का इंटरव्यू ले रहे थे।जब रवि से बात चीत हुई तो उसने बताया कि मैं यह सपना कई साल से देखता आ रहा था कि देश के लिए गोल्ड-मैडल ला पाऊं।किसान पिता और गृहिणी माता ने मुझे भरपूर सहयोग दिया।साधन की कमीं नहीं होने दी।फिर मैनें आर्मी ज्वाइन कर ली जिससे मेरे सपने को पूरा होने में पंख मिले। मुझ पर विश्वास के चलते दो कंपनी के स्पांसर करने से मुझे बहुत मदद मिली ।मैं कड़ी मेहनत करता रहा। आज मेरी यह जीत ,मेरी मां बाप का आशीर्वाद तो है ही है ,लेकिन मुझे और उन्हें भी इस बात का गर्व है कि मैंने अपने देश के सम्मान के लिए कुछ किया है।यह गोल्ड-मैडल मेरा नहीं सारे देश का है ।मैं  उस धरती को एक बार फिर नमन करता हूँ , जो हम सब करोड़ भारतीयों की मां है।मै उस मां के लिए कुछ कहना चाहता हूं--

अगर देश पर गर्व न हो तो 

जीने का अधिकार नहीं

लानत है जीवन 

यदि जननी -जन्म भूमि से प्यार नहीं।


 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Inspirational