seema Sharma

Inspirational


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लॉक डाउन

लॉक डाउन

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डियर डायरी

मम्मी ये लॉक डाउन क्या होता है ? १२ साल की बेटी तृषा और १० साल के बेटे यथार्थ के इस सवाल का जवाब राधिका के पास था तो सही ,पर अब इस छोटे से मन को किस भाषा में समझाया जाए कि इस लॉक डाउन में वो किसी के साथ ना तो मिल सकते है ,ना ही किसी के घर आ जा सकते है ! जो बच्चे एक मिनट तक घर में नहीं टिकते थे ,अब कैसे इतने दिन एक जगह टिक कर बैठ सकेंगे ? आपदा की इस घडी में सारा देश परेशान है पर राधिका अपने बच्चोँ को कुछ ऐसा भी बताना चाहती थी जिससे वो निराश ना हो और कुछ ऐसी बातें सुन करउन्हें भी सुकून का अहसास हो सके ! राधिका ने इसके लिए थोड़ा इंटरनेट का सहारा लिया थोड़ा अपने बड़े लोगों से फ़ोन में बातचीत से उसे पता चला कि इस "लॉक डाउन" से देश को जो नुक्सान हुआ है उसकी भरपाई तो शायद ताउम्र ना हो पाए ,सबकी दुआएं ,प्राथनाएं जुडी है समस्त भारतबसियोँ और विश्व के साथ जिनको कोरोना ने अपने शिकंजे में जकड़ कर रखा है ! जो बढ़िया बातें राधिका को पता चली और उसने तृषा और यथार्थ को बताई वो बातें में आपसे बाँटना चाहती हूँ !

१) इस लॉक डाउन में हमने लाखों टन पेट्रोल और डीज़ल बचा लिया है ,कयोंकि बहुत से बाहन अभी सड़को से दूर शांत मुद्रा में खड़े है !

२)आसमान बिल्कुल साफ़ हो गया है ऐसा लग रहा है मानो वायु प्रदूषण कुछ दिन पहले की नहीं सदियोँ पहले की बात हो !

३) हमने अपनी कुदरत और अपने आप को बहुत सा समय फिर से तरोताजा करने के लिए दे दिया है !

४) हमे अब अपने लिए इतना समय मिल गया है ,जिसमे हमे ना जल्दी उठने की टेंशन है ना ही जल्दी सोने की ,कुल मिला कर हम जीवन की छोटी छोटी चिंताओं से मुक्त से मह्सूस कर सकते हैं”।

५) हम वास्तव में परिवार के साथ मूल्यवान समय बिता रहे है और अपने मित्रोँ और सहयोगियों को भी वही करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। !

६)कोरोना ने हमे अपने देश ही नहीं विदेश की जानकारी लेने के लिए भी विवश कर दिया है ,पर हमे अपनेदेश के साथ साथ उनकी भी चिंता है ,कयोंकि हमारा देश तो " वासुदेव कटुम्ब्कम " वाला देश है !

७) हम अब अपनी साफ़ सफाई के अलाबा अपने घर की साफ़ सफाई के प्रति और सजग हो गए है ,और ये आदत हमारे अपने लिए ,परिवार के लिए देश के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगी !

८) हम ये जान रहे है कि ' सेहत ही असली धन है " अपना देश ही सर्वोत्तम देश है ,और अपना घर ही सर्तवोत्मतम ठिकाना !

९) बेकार के शोर शराबे की जगह अब चहचहाते पंछियों ने ले ली है ! अब पेड़ पौधे भी अपनी ही मस्ती में मगन है ! जीव जंतु अपनी मर्ज़ी से बिना डर के आज़ादी से घूमने में व्यस्त हैं !

दोनों बच्चोँ ने बड़े ही ध्यान से अपनी माँ की बात सुनी और उसे ये भरोसा दिलाया कि वो जितने दिन लम्बा ये लॉक डाउन चलेगा, उसमे घर से बाहर कदम नहीं रखेंगे ,जो चीज़े घर में हो सकती है उन्हें करके अपने आप को व्यस्त रखेंगे ! माँ की घर के कामोँ में पूरी मदद करेंगे ,साथ ही साथ रोज़ सुबह शाम रामायण भी देखेंगे जोकि हमारी सरकार ने फिर से शुरू करवा दी है ! राधिका को अब इस बात की ख़ुशी है कि अब लॉक डाउन उसके और तमाम देश के बच्चोँ को ये समझा पायेगा कि "जब जब इंसान कुदरत के नियमोँ का पालन नहीं करेगा ,तब तब कुदरत विकराल रूप लेकर ऐसा तांडव करेगी कि इस मुश्किल घडी में भगवान् को भी अपने दरवाजे बंद करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचेगा ! कुदरत तो फिर से अपने पुराने रूप में आ ही जाएगी ,पर प्राणोँ की आहुति इंसानोँ को ही देनी पड़ेगी ! इस लॉक डाउन से आइये हम सब संयम और धैर्य के साथ पालन करके ये दिखा दें कि मुसीबत की इस घडी़ में हम अपनी सरकार ,देश के उन तमाम लोगों के साथ है जो इस महामारी को हारने में वीर योद्या जैसे खड़े हैं ! आईये अपने देश और पुरे विश्व के लिए पार्थना करे कि सब ठीक से हो जाए और आगे से हम कोई भी ऐसी गलती ना करें जिससे हमारा देश बुरी तरह प्रभाबित हो ! आपका क्या मानना है ?


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