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zahera A

Drama


4.8  

zahera A

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कस्तूरी

कस्तूरी

4 mins 427 4 mins 427

पार्क की हरी घास दोपहर की तीखी धूप से नहाई हुई और मखमली लग रही थी। चिड़ियों की चहचहाहट और पार्क के आखरी छोर पर बहती छोटी नदी के पानी की कल कल पूरे माहौल में मौसिकी का काम कर रही थी । चारों तरफ फूलों की रंगत और खुशबू से पूरा माहौल मुअत्तर हो रहा था।पार्क में लंबे बड़े पेड़ खड़े पूरे पार्क की खूबसूरती की चौकीदारी मदमस्त हो के कर रहे थे। इसी खूबसूरती में चार चांद लगाती वो लड़की अपने सुनहरे बालों को चेहरे पर से बार बार हटा रही थी। उसकी आंखों में गहरा काजल उसको और भी दिलकश बना रहा था। एक पेड़ के तने के सहारे अपने आप को टिकाए हुए दूर से सूरज को क्षितिज की तरफ जाते देख रही थी। उसके चेहरे पे पड़ती धूप उसकी खूबसूरती को और निखार रही थी।

लड़़की अपने आप मेंं खोई किसी का इंतजार कर रही थी। दूर सेे पार्क केे गेट पर खड़ा लड़का उसकी हर एक अदा को बहोत गौर से देख रहा था और आंखों के ज़रिए उसपे प्यार लूटा रहा था। वो धीरे धीरे लड़़की की तरफ बढ़ने लगा और बिल्कुल उसके नजदीक आ खड़ा हुआ। लड़की ने उसको देखते ही अपनी नजरे झुका लीं गाल शर्म सेे लाल हो गए। लड़के ने उसे बड़ी मोहब्बत से देखा  और उसकी झुकी हुई नजरों को अपनी तरफ किया। दोनो की आंखें एक दूूसरे से बातें करने लगी। तभी लड़के ने उसेे अपनी बाहों केे घेरे में समेटते हुए अपनी आगोश मेंं ले लिया।लड़़की ने अपनेेे आस पास नजरें घुमाई और महसूस किया की सारी कायनात उनके इस प्यार भरे लम्हे की गवाही दे रही है। लड़के ने लड़़की की पेेेशानी को चूमा, लड़़की ने अपनी आंखे बंद करली। लेकिन जब आंखें खोली तो वहां कोई नहीं था। उसकी आंखों में आंसू भर आए। और तभी कानों में घड़ी का अलार्म ज़ोर सेे बजने लगा और ज़िया चौंक के उठ गई। 

उफ़़! ये कैसा ख्वाब था? ज़िया ख्वाब केेे बारे मेंं सोचने लगी क्योंंकि उसमे जो लड़़की थी वो ज़िया थी 

और वो लड़का ? वो तो जुनैद था, उसका दोस्त जिसे वो दिलों जां से चाहती थी। ज़िया और जुनैद दोनो एक ही कॉलेज में पढ़़ते थेे। एक सड़क हादसे ने जुनैद को ज़िया से छीन लिया था कुछ महीनों पहलेे। जुनैद और उसका दोस्त ताबिश एक ही साथ थे जब ये हादसा गुजरा। ताबिश उसमे बच गया लेकिन जुनैद दुनिया को अलविदा कह  गया। 

आज जुनैद को गुज़रे पूरा एक साल हो गया था। ज़िया केे मां बाप ने उसकी शादी ताबिश से तै कर दी। उनकी नजर में ताबिश एक सुलझा हुआ लड़़का था और जुनैद के जानेे के बाद से उसने ही तो ज़िया का ख्याल रखा था और आज भी उसकी फिक्र करता है। इससे बेहतर ज़िया के लिए कोई और नहीं हो सकता ।लेकिन अब भी ज़िया केे दिल के किसी कोनेे में जुनैद का ही बसेरा था। अपने दिल के उजड़े पड़े घरौंदे में आज भी जुनैद केे साथ बिताए लम्हों की यादोंं की शमा  जलाए हुए रो पड़ती थी ।

ताबिश ज़िया से मिलने उसके घर आता है तो उसे उसी उदासी और मायूसियोंं के सायों में घिरा हुआ पाता है और परेशान हो उठता है। वो उसके करीब आके उसे समझाता है और कहता है "ज़िया, कब तक यूं अपनी जिंदगी मायूसियों के अंंधेरों में गुजारोगी? मैं तो समझा था कि ज़ख्म है अपने वक्त से भर ही जाएगा। क्या खबर थी की तुम इसे अपनेे रगो जान में बसा लोगी। अगले हफ्ते हमारा निकाह है अगर तुम नहीं चाहती तो मैं इनकार कर देता हुं।"  

ज़िया अपने आप को संभालतेे हुए कहती है, "ताबिश

मुझे डर है कि मैं तुम्हे वो खुशियां नहींं दे पाऊंंगी जो तुम्हें मिलनी चााहिए क्योंकि मेरे दिल मेंं जुनैद की यादों की कस्तूरी आज भी महकती है। मैं उसे दिल से कैसेे निकाल दूंं ? " ताबिश कहता हैै " मुझे तुमसेे  

कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला और जिसे 

आप प्यार करते हैं उसे तकलीफ मेंं नहीं देख सकते, लिहाजा मैं भी तुम्हे तकलीफ में नहीं देख सकता। और किसने कहा तुम मुझे खुशियां नहीं दे सकती, तुम्हारी मुस्कुराहट है जो मुझे जीने की ताकत देती है। अगर मेरी मोहब्बत सच्ची होगी तो एक दिन मेरे प्यार की कस्तूरी तुम्हारी रूह को मेहकाएगी और तुम खुद ब खुद मेरी मोहब्ब्त की गिरफ्त में आ जाओगी।" तुम मुझे चाहो न चाहो मैं तुम्हे तमाम उम्र प्यार करता रहूंगा।" ताबिश की आंखों में ज़िया ने अपने लिए बेइंतहा प्यार देखा। वो हैरान थी ताबिश का ये रूप देख केे।

आज ताबिश और ज़िया का निकाह हो गया। दुल्हन बनी ज़िया बला की खूबसूरत लग रही थी। ताबिश 

कमरे में दाखिल हुआ और एक निगाह ज़िया पर डाली और उसकेे पास आकेे बैठ गया । उसका हाथ अपने हाथों में लेकर उससे एक वादा किया " ज़िया मैं 

शौहर सेे पहले तुम्हारा दोस्त हूं, तुम मुझे हमेशा अपने साथ खड़ा पाओगी, दोस्त से शौहर तक का सफर जब भी तै हो , उसकी मुझे कोई परवाह नहीं, खुशी तो इस बात की है कि अब मैं तुम्हारा खयाल पूरे हक़ से रख सकता हूंं।" 

ज़िया ने उसे एक रूखी नजर सेे देखा और आंखें

नीचे कर लींं। ताबिश सोफे पे सोने चला गया। ज़िया उसे ताज्जुब से एक टक देखती रही और सोचनेेे लगी ये वही ताबिश है जिसके बारे में वो हमेशा यही सोचती थी की वो एक गैरजिम्मेेेेदार शक्स हैै, वो किसी से प्यार नही कर सकता। उसका ये रूप देखकर वो फिर हैरान रह गई।

जिंदगी का कारवां आगे बढ़ता रहा । ताबिश की ज़िया के लिए मोहब्बत बढ़ती ही गई। ज़िया के दिल में भी ताबिश के लिए जज़्बात पैदा होने लगेे लेकिन फिर भी ज़िया खुद को ताबिश के नजदीक नहीं ला पा रही थी।

एक दिन ज़िया केे मोबाइल पे कॉल आई की ताबिश का एक्सीडेंट हो गया है वो हॉस्पिटल में है। ज़िया का दिल बैठ गया। उसे अजीब बेचैनी महसूस हुई, और फौरन हॉस्पिटल पहुंच गई और जाते ही ताबिश के सीने से लग गई और कहा "तुमनेे कस्तूरी महका दी !"


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