usha yadav

Abstract

4.5  

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कोरोना और भय

कोरोना और भय

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कोरोना का भय चारों तरफ फैला हुआ है। आये दिन नए नए केस बढ़ते जा रहे है। आज कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ 12 लाख के ऊपर पहुँच चुका है। कोरोना के भय को कुछ मैने बहुत करीब से देखा । कोरोना का भय सचमुच वही इंसान बता सकता है, जिसने इसको बहुत पास से देखा या अनुभव किया हो। बात कुछ 13 जुलाई 2020 की है। रोजाना की तरह हम सभी रोजमर्रा के कामों को कर के शाम का भोजन बनाने के लिए इकट्ठा हुए।   8:30 बजे तक सबने खाना बनाया और कुछ समय के लिए  हम सभी अपनी सास के पास बैठे बात करने लगे। तभी सास को सांस लेने में मुसीबत होने लगी। मैंने उन्हें झण्डू बाम लगाया और ऊपर आ गई खाना लेकर।

तभी नीचे से जोरो से आवाज आई जल्दी से नीचे आओ। हम सभी भाग कर नीचे गए। वहाँ देखा सास के चारो तरफ घर के लोग बैठे है, और वो पसीने से भीगी हुई चिल्ला रही है। हम सभी उनके पास बैठे कोई हाथ रगड़ रहा कोई पैर रगड़ रहा था। किसी को कुछ समझ ही नही आ रहा था, कि क्या करें क्या नहीं तभी देवर ने  उनका शुगर चेक किया तो 453 तक पहुच चुका था। फिर थोड़ी देर के बाद उन्हें अपने पेट में भी दर्द होने लगा। किसी को भी कुछ समझ नही आ रहा था क्या करे क्या ना करें। हर दवाइयां हम लोंगो ने उनकी उन्हें खिला दी ताकि आराम तो आये पर कुछ भी फर्क नही पड़ रहा था। देखते ही देखते रात के 11:30 बज चुके थे और वो जोरों से चिल्ला ही रही थी । हम लोग उनके डॉक्टर को फ़ॉलो कर रहे थे। डॉक्टर ने सलाह दी कि हॉस्पिटल लेकर आओ।

जब हॉस्पिटल लेकर गए तो वहाँ बेड ही नहीं खाली । अब हम सबकी जान पर बन आयी, क्या करे। डॉक्टर से फिर सलाह ली कि क्या करें? डॉक्टर ने कहा " आप लोग लेकर आओ मै इमरजेंसी डॉक्टर से बात करके उनकी सुई और दवाई करवा दूँगा"। हम लोगों ने वैसा ही किया और उन्हें लेकर तुरंत हॉस्पिटल की तरफ रवाना हुए। वहाँ जाकर वॉच मैन ने थोड़ी दिक्कत तो की पर  अंदर जाने दिया।

सुई दवाई होने के बाद डॉक्टर ने उन्हें दूसरे हॉस्पिटल में जाने को कहा" कि आप लोग इन्हें सिटिज़न हॉस्पिटल में लेकर जाये"। अब रात के 2 बज चुके थे हम लोग उन्हें कार में लेकर इधर उधर फिर रहे थे । हम सभी को कोरोना का भय अलग लग रहा था। थोड़ी देर बाद उन्हें देख कर लग रहा था कि कुछ आराम आने लगा है। फिर भी हम उन्हें घर ना ला कर हॉस्पिटल ही ले गए । वहाँ जाकर डॉक्टर लोंगो ने कहा" कि हम इन्हें तभी एडमिट करेंगे जब इनका कोरोना का टेस्ट हुआ हो नही तो नही। हमने कहा कि आप लोग कर लीजिए कौन सा यह बाहर जाती है सभी निश्चिंत थे उन्हें क्वॉरेंटाइन किया गया"।

जब उन्हें  हॉस्पिटल के अंदर ले जाया गया तो वे पूरी तरह डर गई। सभी ने पी पी टी शर्ट पहन रखी थी। जिन्हें देखकर वह डरने लगे सब को गालियां देने लगी और कहने लगी मुझे घर ले चलो। वहां भी वह शांत नहीं बैठी बार-बार हर नर्स डॉक्टर को परेशान करने लगी। खाना ना खाना और मेरे घर से किसी को बुलाओ जोरों से चिल्लाने लगी। देखते-देखते सुबह हो गई फिर हम सभी घर आए तो थोड़ी देर में हॉस्पिटल से कॉल आया कि आपकी मां आपको बुला रही हैं। फिर हॉस्पिटल गए तो उनके रूम में जाने के लिए पीपीटी किट पहनना अनिवार्य  था।

जिसे देखकर वो बोलने लगी कि सभी नकली है। मुझे घर ले चलो थोड़ी देर बाद उनकी कोरोना की रिपोर्ट आई,तो उसमें उनका कोरोना पॉजिटिव आया। हम सभी हक्का-बक्का रह गए। अब क्या करें? पॉजिटिव सुनकर हॉस्पिटल वालों ने भी कहा इन्हें घर ले जाओ हम सभी डर गए। क्योंकि हम सभी रात भर इन्हीं के साथ बैठे थे। क्या होगा अब सास ने भी तंग करने लगी। उनके लिए पी पी टी किट खरीदा गया था।

वो भी उन्होंने पहना ही नही। जब एबुलेंस से घर लाया गया तो उससे भी वो उतरने को तैयार ही नही बोली ये मेरा घर नही है। बहुत मुश्किलो से उन्हें अंदर लाया गया। अब उन्हें सभी से मिलना है। कोई भी उनके पास नही गया तो वो जोरो से चिल्लाने लगी। तुम सभी बदल गए हो। जाओ चले जाओ यहाँ से सारे ऐसा बोलने लगी। हम सभी मायूस हो गए। और कर भी क्या सकते थे। अगले दिन सास और ससुर दोनों का सरकारी हॉस्पिटल में टेस्ट करवाया गया तो वह सास और ससुर दोनों पॉजिटिव आए। अब क्या करे हम कहाँ रखे दोनों को कुछ समझ नही  आ रहा था। इतना होने पर भी हम लोगों ने उम्मीद नही छोड़ी। हम सभी लोगों ने उचित दूरी रखी । हम सभी लोगों ने भी अपनी अपनी जाँच करवाई तो भगवान का शुक्र है कि हम सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आयी। ये होता है कोरोना का भय! सचमुच बहुत भयावक है कोरोना, सबका नजरिया ही जैसे बदल देता। ये वही समझ सकता है जिसके ऊपर गुजरती है।


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