कमरे की चुड़ैल
कमरे की चुड़ैल
नवीन जोशी का नया नया ट्रांसफर हुआ था, वह शिक्षा विभाग में ऑब्जर्वर के पोस्ट पर कार्यरत थे, उन्हे अचानक पंचगनी में ट्रांसफर कर दिया गया, बस का सफर था, सोलापुर से वहां पहुंचने में दो बस बदलना पड़ा, और रास्ते में बस का टायर पंचर हो जाने के कारण रात करीब ग्यारह बजे वह पंचगनी पहुंचे, ठंड का महीना था, पूरा पंचगनी सो गया था, वह अपने स्टाफ के लोगो को फोन लगा रहे थे पर किसी का भी फ़ोन लग नही रहा था, दरअसल नेटवर्क ही प्रॉपर काम नही कर रहा था, ,*"!!
नवीन जोशी परेशान हो जाते हैं, नई जगह थी, शाम को तो स्टाफ वालो से बात हुई थी, ऑफिस का ऐड्रेस तो उनके पास था, पर इस वक्त ऑफिस में कौन मिलता, और सबसे बड़ी बात इतनी रात को कोई साधन भी नही थी, सभी लोग चले गए थे, वह अकेले ही थे, उन्हे कुछ सुझाई नही दे रहा था कि वह कहां जाए, वह आस पास होटल देखने के लिए एक और बढ़ते हैं , ठंड के महीने में पंचगनी बहुत ही ठंडा हो जाता है, वह वैसे तो ठंड के कपड़े पहने हुए थे पर ठंड तो ठंड है, वह उन्हे कप कपा दे रही थी, वह थोड़ा आगे बढ़ते हैं, !!
अभी वह मुश्किल से सौ कदम चल होंगे की एक बुजुर्ग सा आदमी उनसे पूछता है, *" बेटा रात काटने के लिए कमरा चाहिए, *"!!
नवीन उन्हे ऐसे देखते हैं, जैसे रेगिस्तान में जल मिल गया हो, *"!
नवीन कहता है, *" हां रात गुजारनी है, एक साफ सुथरा कमरा मिल जाए, तो अच्छा होगा, *"!!
वह बुजुर्ग अपने साथ आने का इशारा करते हुए उन्हें एक और ले जाता है, थोड़ी दूर जाने पर एक छोटा सा कॉटेज दिखाई देता है, वह बुजुर्ग नवीन को लेकर अंदर जाते हैं, अंदर तीन कमरे थे, वह बुजुर्ग एक कमरा खोलता है, नवीन अंदर जाता है तो कमरा साफ़ सुथरा था, वह इस कमरे का किराया पूछते हैं तो वह बुजुर्ग कहता है, दो हजार दे देना वैसे तो लोग यहां पर ऐसे कमरे का तीन से चार हजार रूपए ले लेते हैं, *"!!
नवीन अपना सामान रखता है, बुजुर्ग आदमी जाते हुए कहता है *",पीने का पानी अंदर ही है, और फ्रिज में कुछ खाने का सामान होगा भूख लगी हो तो लेकर खा लेना, *"!!
वह बुजुर्ग चला जाता है, !!
नवीन कपड़े बदलता है, और बिस्तर पर लेटते हुए बत्ती बंद करता है, और आंखे बंद करता है, *"!!
थोड़ी देर ने उसे लगता है जैसे लाइट ऑन हो गई, वह आंखे खोलता है, तो सच में लाइट जल रही थी, वह फिर लाइट बंद करता है तो फिर से लाइट जल उठती है, वह घबरा गया उसे समझ नहीं आता है की यह क्या हो रहा है, *"!!
उसी समय किसी के सिसकने की आवाज आती है तो वह चौक उठता है, ध्यान से सुनता है तो किसी लड़की के सिसकने की आवाज थी, *"!!
वह उठकर इधर उधर देखता है तो लगता है, जैसे कमरे के बाहर से आवाज आ रही है, वह धीरे से दरवाजा खोलता है और बाहर निकल कर देखता है, तो उसे वहां कोई नही दिखता है, पर सिसकने की आवाज बराबर आ रही थी, अब उसे ऐसा लगता है जैसे वह आवाज उसके कमरे से आ रही है, वह हैरान होकर अपने कमरे में जाता है तो भौचक्का रह जाता है, उसके शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया था, उसके बेड पर दुल्हन के भेष में एक लड़की मुंह ढके हुए बैठी थी, जबकि वह बाहर निकला था कमरा एकदम खाली था, उसके तो ठंड में ही पसीने छूटने लगे थे, वह घबरा कर पूछता है, "" तु, तु, तुम, कौन हो अंदर कैसे आई, और तुम रो क्यों रही हो, *"!!
वह घूंघट के अंदर से कहती है, *" अंदर मैं नही तुम आए हो, ये मेरा कमरा है, और ये मेरा बेड है, जिस पर तुमने कब्जा किया था, जाओ दूसरे कमरे में सो जाओ, *"!!
नवीन घबरा कर कहता है, *" वो अंकल ने मुझे इसी कमरे को दिया है, दूसरे कमरे में दूसरे कस्टमर हैं, वैसे मुझे अब तक यह नही समझ आ रहा हैं, तुम अंदर कैसे आई, *"!!
वह औरत वहा से हवा में उड़ती हुई गायब होती है और फिर वापस आती है और कहती है, *" ऐसी आई, अब समझ गए, *"!!
नवीन के तो होश उड़ जाते हैं, उसे लगता हैं वह बेहोश हो जाएगा, पर वह खुद को सम्हाल कर कहता है, *" ठीक है ठीक है, मैं बाहर जा रहा हूं, तुम रहो इस कमरे में, !!
वह कहती है *" अब तुम कहीं नही जाओगे, अब मेरी इच्छा पूरी करोगे, *"!!
उसका ऐसे कहते ही कमरे का दरवाजा तेज़ी से बंद हो जाता है, !!
यह देख घबराकर नवीन की मुंह से चीख निकलती है, पर ये क्या उसके मुंह से तो आवाज बाहर ही नहीं निकल रही थी वह चाह कर भी चीख नही पा रहा था, तभी वह औरत खड़ी होती है, आज बहुत वर्षो बाद मेरी प्यास बुझेगी, और वह अपना चेहरा नवीन को ओर करती है, तो इतना भयानक चेहरा देख नवीन के होश उड़ जाते हैं, उसके सामने एक भयानक चेहरे वाली चुड़ैल खड़ी थी, उसके नुकीले दांत उसकी ओर बढ़ रहे थे, नवीन को उसके दांत अपने गले तक पहुंचता दिखाई देता है, उसके बाद उसके होश उड़ जाते हैं, *"!!
सुबह सुबह सड़क किनारे नवीन की लाश पड़ी थी, उसके ही ऑफिस का एक स्टॉफ उसको देख पहचानता है, क्योंकि उसने ही उनका फोटो देखा था, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिल का दौरा पड़ने से मौत बताते हैं।

