Shishpal Chiniya

Inspirational


3.5  

Shishpal Chiniya

Inspirational


किताबें

किताबें

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हमें जितना जीना जिंदगी सिखाती है, जाहिर है कि किताबें नहीं सीखा सकती है। लेकिन जितना जीने का ढंग किताबें सिखाती है। वो जिंदगी नहीं सीखा सकती है।

गौर करें कि आप अपनी जिंदगी जी रहे है, ना जाने कितने आयामों से गुजर चुके हो और कितने ही आयामों से गुजरोगे।

लेकिन जब बात हो आपके व्यक्तित्व की, आपके व्यवहार की और आपके ज्ञान की तो जाहिर है आपका अंदाजा किताबों से लगाया जायेगा। वहीं अगर आपके संस्कार और वाचन शैली के साथ आपकी आँखों की शिकायतों को देखकर अंदाजा लगाया जाता है आपकी जिंदगी का , कि आप किसी मोड़ से गुजरकर कितना सीखे हो औऱ क्या सीख सकते हो।

हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा हम अपनी किताबी दुनियाँ को देते है और हम जो कुछ सीखते है, हमारी जिंदगी का एक अहम मार्ग बन जाता है।

कहने को तो किताबों को बहूत से लोगों ने अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया है ।

लेकिन हकीकत यह है कि किताबों से हम दोस्ती कर ही नहीं रहे हैं। क्योंकि दोस्ती एक जीवन भर साथ चलने वाला जीवन का हिस्सा है लेकिन जो कुछ हम क़िताबों से सीखते है वो सब कुछ हम अपना नहीं सकते है।

क्योंकि हमें अपनी जीवन की उस भीड़ में जीना पड़ता है, जिसमें हमारी पहचान खो चुकी सिर्फ नाम बचा है। अगर कोई पुकारे तो चले जाओ। नहीं तो धक्के खाते रहो।

जिंदगी में कुछ इतने बड़े बदलाव हो जाते है, कि खुद को पहले की तरह देखने के लिये खुद ही तरस जाओगे।

वो बस एक झोंका होता है कि हम बदल सकते हैं , लेकिन जिस दिन बदल गये। खुद से ही बदल जाओगे।

मैं जितना किताबों को पढ़ सकता था , मैंने पढ़ी है , इतना किताबी कीड़ा था कि किताब के नाम पर जी उठता था लेकिन कब बदल गया पता ही नहीं चला। आज किताब खोलने से पहले अगर खुद को देखना चाहूँ तो आँखें अपने आप बंद हो जाती है।

जिंदगी बड़ी बेरहम है , आपको जर्रे - जर्रे का हिसाब बराबर करना होगा कि आप क्या जी रहे हो ओर आपको क्या जीना चाहिये।

यकीन मानिए मैं पैसों की बात नहीं कर रहा हूँ क्योंकि पैसे सिर्फ जिंदगी कटवाते है। जीवन जीना तो आपको आपका दिल सीखता है।

क्योंकि सड़क पर दुर्घटना को देखकर कभी अमीर गाड़ी नहीं रोकता है लेकिन एक गरीब पैर थाम लेता हैं।

मैं बात कर रह हूँ आपके गहने की, यानी आपकी मर्दानगी की आपके न्यायप्रिय स्वभाव की, आपकी दीन भावना की, आपके जीवन संघर्ष की, आपके तर्क शील और विचारशील दिल और दिमाग की।

आपकी उस नजर की जो एक औरत ओर एक मर्द में कोई फर्क न देखें।

पता नहीं किताबें क्या सिखाती है, जब भी पढ़ने लगता हूँ खुद ही भूल जाता हूँ।


दुःखी आत्मा



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