STORYMIRROR

Madhu Vashishta

Abstract Inspirational

3  

Madhu Vashishta

Abstract Inspirational

खुशियां

खुशियां

5 mins
158

     प्रिया का बोलना लगातार जारी था। आज वह ऑफिस नहीं गई थी बल्कि मुन्ने को लेकर सीधा ही अपने मम्मी के घर आ गई थी। बहुत दिनों से उसकी इच्छा थी कि अब की मैरिज एनिवर्सरी पर वह लोग सिंगापुर घूमने जाएं।


          ससुराल में उसके सिवा एक जेठ जेठानी और रवि के छोटे भाई बहन भी थे। रवि की बहन का रिश्ता तय होने के बाद लगभग 6 महीने बाद उनके विवाह की तारीख निकली थी। मीना का रिश्ता तय होने के बाद से ही उसके सास ससुर अक्सर रवि की बहन मीना की शादी की खरीदारी के लिए व्यस्त रहते थे। घर खर्चे में जहां जेठ जी केवल 10000 देते थे क्योंकि एक तो जेठ जी की तनख्वाह कम थी और जेठानी जी भी नौकरी नहीं करती थी। रवि हमेशा 20000 देता था। रवि के अनुसार उसके ऊपर घर खर्च के लिए ज्यादा पैसे देने का कोई बंधन नहीं है । पापा ने तो कभी कुछ कहा और मांगा ही नहीं। पापा की पेंशन आ रही थी। सेवानिवृत्त होने के बाद अपनी ग्रेच्युटी और फंड के पैसे से पापा ने इस घर को दो मंजिला बना दिया था। ऊपर दोनों मंजिलों पर किराएदार भी रखे हुए थे जिनसे कि उन्हें किराया भी मिल जाता था। जब तक मीना की शादी ना हो जाए तब तक पापा की इच्छा थी कि सब एक साथ संयुक्त परिवार में ही रहे। इससे जहां घर के बारे में लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और इस तरह से मीना की शादी के लिए कुछ पैसे भी इकट्ठे हो सकते हैं। यूं तो मीना भी घर के नजदीक ही किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी।


       जब पापा अपने सारे पैसे घर को दो मंजिल बनाने में खर्च कर रहे थे तभी रवि ने निर्णय किया था कि मीना की शादी होने तक वह घर में यूं ही पैसे देता रहेगा।


              वह इस बात को बखूबी समझता था कि अगर प्रिया निश्चिंत होकर नौकरी कर पाती थी तो इसका कारण यही तो था कि उसे कभी भी मुन्ने की फिक्र नहीं हुई। घर में भाभी और मां मिलकर मुन्ने को इतने प्यार से पालते थे कि अकेली प्रिया शायद ही इतने अच्छे से संभाल सके। भाभी के , दोनों बड़े बच्चे मिलकर उसे प्यार से खिलाते थे और अपने खिलौने भी मुन्ने को दे दिया करते थे।


               प्रिया का ख्याल था कि इतने पैसे जो कि वह लोग उधर घर में देते हैं इतने में तो वह दफ्तर के पास में ही अगर एक फ्लैट ले लें, तो उनकी गाड़ी के पेट्रोल के पैसे भी बचें और बच्चे के लिए वह घर में पूरे दिन की आया भी रख सकती है या वह मुन्ने को अपने ऑफिस के सामने क्रैश में भी छोड़ सकती थी।


        संयुक्त परिवार में उसको कभी भी प्राइवेसी नहीं मिली। सबसे ज्यादा गुस्सा तो उसे इस बात पर आ रहा था कि अगले सप्ताह उसकी मैरिज एनिवर्सरी थी और रवि ने सिंगापुर जाने के लिए बचाए हुए पैसों से होने वाले जीजा जी के लिए एक डायमंड रिंग खरीदी ली थी। हालांकि रवि ने प्रॉमिस किया था मीना की शादी के बाद हम पैसे जोड़कर सिंगापुर ही क्यों कहीं और दूर का भी टूर पैकेज लेकर घूमने जाएंगे। लेकिन----।


       अपना मन ठीक करने के लिए वह आज दफ्तर की बजाय मुन्ने को लेकर सीधा अपने मायके चली गई थी। वहां जाकर वह अपनी मम्मी को समझा रही थी कि आपको पता है पैसों की कितनी अहमियत होती है जो यूं ही रवि अपने घर वालों पर खर्च कर रहा है ।


      भावना जी (प्रिया की मम्मी) जो तबसे प्रिया की बातें सुन रही थी, अचानक बोली, तुम सही कहते हो बेटा पैसों की बहुत अहमियत और जरूरत होती है लेकिन इंसान को रिश्तों की भी बहुत जरूरत पड़ती है। पैसे तो तुुम अगर सही सलामत और निश्चिंत होकर रहते हो तो और कमा ही लोगे लेकिन यह सब रिश्ते तोड़ कर तुम यह रिश्ते कहां सेे पाओगे?


           माना तुम फ्लैट में अकेली रह सकती हो लेकिन तब क्या तुम इतनी ही निश्चिंतता से नौकरी कर पाओगी? माना तुम्हारे पास पैसे हों लेकिन जरूरत पड़ने पर जो यह सब लोग तुम्हारे साथ खड़े हो जाते हैं, उन्हें अपने साथ उसी प्यार और सम्मान के साथ पा सकोगी। याद करो तुम्हें बुखार होने पर तुम्हारी जेठानी पूरा दिन तुम्हारे साथ अस्पताल में रहीं और मुन्ने को तुम्हारी सासु मां ने कितनी अच्छी तरह से संभाला था।


             क्रैच मैं मुन्ना क्या घर जितना ही सुरक्षित होगा? फ्लैट में केवल तुम्हारे साथ रह कर रवि घर से अलग होकर क्या उतना ही सुखी और निश्चिंत होगा? यदि जीवन में पैसे जरूरी है तो रिश्तों की जरूरत को भी तुम नकार नहीं सकते।


          जरूरत पड़ने पर तुम्हें पैसे देकर बाहर ही किसी को अपने काम के लिए रखना होगा क्या वह तुम्हारा हर काम उतने ही प्रेम और समर्पण से करेगा। बाहर नौकरों से भी पैसे देने के बावजूद भी निभाना है तो अपनों के सुख दुख में साथ देकर उनका प्यार लेने में क्या बुराई है? शायद मां सही ही कह रही थी क्योंकि प्रिया सोच में पढ़ गई थी।


              तभी रवि का फोन आया। प्रिया ने रवि को कहा कि वह गाड़ी लेकर शाम को उसे लेने के लिए आ जाए। अबकी एनिवर्सरी वह लोग घर में सब के साथ ही मनाएंगे।


           अबकी बार उनकी एनिवर्सरी इतवार को पढ़ रही थी तो सुबह सवेरे जब वह देर से सो कर उठे तो सबने उनके लिए बहुत ही सुंदर ड्राइंग रूम को सजाकर सुबह सवेरे ही उन्हें बहुत खुशनुमा सरप्राइस दिया।


     मीना ने भी अपने भाभी भैया के लिए उनकी पसंद का नाश्ता बनाया हुआ था। जेठानी जी ने भी प्रिया की एनिवर्सरी के लिए केक मंगवा रखा था। केक काटने के बाद प्रिया की सासु मां ने उसको एनिवर्सरी के उपहार स्वरूप 5 दिन के सिंगापुर टूर की टिकट दी और कहा अपनी छुट्टियों को देखते हुए एजेंट को इन्फॉर्म कर देना कि तुम कब जा सकते हो?

         प्रिया बहुत हैरान और खुश थी। आज उससे रिश्तों की अहमियत और अपनेपन का जान हो चुका था। उसने खुशी-खुशी सासु मां और जेठानी के पैर छुए और धीरे से बोली क्यों इतने पैसे खर्च करें हम बाद में चले जाते।

       नहीं बेटा, मेरे लिए मेरी हर बेटी की खुशी अहमियत रखती है। ऐसा कहते हुए उन्होंने प्रिया के सर पर अपना हाथ रखा।



ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi story from Abstract