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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy Abstract Drama Thriller Classics


4.0  

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy Abstract Drama Thriller Classics


खेल कूद

खेल कूद

1 min 237 1 min 237

 

वो जब देखो खेलने लगता.

माँ उसे मना करती पर वो कहाँ मानने वाला था.

बाद में 'भूख लगी है' कर के माँ के पास चला आता.

माँ उसे रोज़ समझाती –

"बेटा...खेलने कूदने से भूख बढ़ती है

और वैसे भी भूख मिटाना कोई खेल कूद तो है नहीं!"


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