STORYMIRROR

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

2  

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

खेल कूद

खेल कूद

1 min
302

 

वो जब देखो खेलने लगता.

माँ उसे मना करती पर वो कहाँ मानने वाला था.

बाद में 'भूख लगी है' कर के माँ के पास चला आता.

माँ उसे रोज़ समझाती –

"बेटा...खेलने कूदने से भूख बढ़ती है

और वैसे भी भूख मिटाना कोई खेल कूद तो है नहीं!"


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Tragedy