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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Tragedy

खेल कूद

खेल कूद

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वो जब देखो खेलने लगता.

माँ उसे मना करती पर वो कहाँ मानने वाला था.

बाद में 'भूख लगी है' कर के माँ के पास चला आता.

माँ उसे रोज़ समझाती –

"बेटा...खेलने कूदने से भूख बढ़ती है

और वैसे भी भूख मिटाना कोई खेल कूद तो है नहीं!"


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