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Ankur Singh

Horror Thriller

4  

Ankur Singh

Horror Thriller

खौफ़नाक जंगल

खौफ़नाक जंगल

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जंगल में बहुत सारी खूबसूरत चीजे होती हैं जैसे नदी , झरने , पक्षी , पौधे आदि वही कुछ खतरनाक और डरावनी चीजे भी होती है जैसे - जंगली जानवर ।

वहीं कुछ जंगल में डरावनी चीजों का अर्थ - ऐसी चीजों से होता है जिन्हें इंसान समझ नहीं पाता है । कुछ ऐसी शक्तियां जो अतिविशिष्ट , शक्तिशाली और परालौकिक सी होती है ।

जैसे - मानव-भेड़िया , सिर कटा घुड़सवार , खून चूसने वाली डायन या रास्ता भटकाने वाली आत्मा ।

हालांकि इन सब का साक्ष्य किसी के भी पास मौजूद नहीं है, चाहे उसने इसे महसूस किया हो या नहीं ।

ऐसा ही एक जंगल - भोपाल से इंदौर की तरफ जाती रोड पर 25 किमी. शहर से दूर 15 - 16 किमी. के दायरे में फैला है । इस रोड पर रात के 12 बजे के बाद सफर करना खतरनाक हो जाता है । किसी को नहीं पता कि असलियत में है क्या, बस कुछ किवंदितियां है किसी भूत - प्रेत या परालौकिक शक्तियों के होने का जो रात में अपना शिकार करती है ।

टी.वी. चैनल पर एक प्रोग्राम आया करता है सत्य की खोज - इस प्रोग्राम के तहत कुछ रिपोर्टर और पैरानॉर्मल रिसर्चर की एक टीम ऐसी जगहों पर जाती है जहां परालौकिक शक्तियों के होने की खबर होती है और वहां जा कर ये टीम सत्य का पता लगाती है । अब तक इस टीम ने 3-4 जगह जा कर सत्य की खोज की है और अब तक उन्हें हर जगह सिर्फ अफवाहें ही मिली है । उन स्थानों पर उन्हें सिर्फ लोगो द्वारा बनाई गयी कथाएं ही मिली कोई परालौकिक शक्तियां नहीं । ऐसे ही एक स्थान पर सत्य की खोज कर ये 8 सदस्यीय टीम वापस लौट रही थी । इस टीम में रिपोर्टर के 4 सदस्य और पैरानॉर्मल के 4 सदस्य थे । रिपोर्टर टीम के सदस्य - अजित , रैना , मयंक और अंकिता वहीं पैरानॉर्मल टीम के सदस्य - जिम्मी , सुचिता , हरीश और मेघना ।

एक वैन में सभी सदस्य भोपाल से वापस आ रहे थे । आपस में हँसी-मजाक और बातें हो रही थी तभी मेघना के फ़ोन पर किसी की कॉल आती है । मेघना अनजान नं. देख कर फ़ोन नही उठाती है । कॉल अपने आप कट जाती है .. थोड़ी देर बाद फिर से उसी नं से कॉल आती है । मेघना को मजबूरी में फोन उठाना पड़ता है । दूसरी तरफ से आवाज़ आती है -

हेलो सत्यखोजी टीम , नकली घटनाओं को सुलझाते - सुलझाते अगर थक गए हो तो और एक नए और असली घटना की तलाश में हो तो भोपाल से 25 किमी. दूर एक जंगल पड़ता है जो 'छलित वन' के नाम से प्रसिद्ध है । मुख्य रोड पे एक ढाबा है 'सूचित ढाबा' उस ढाबे से दाएं हाथ पे एक रोड मिलेगी जिसपर छलित वन का बोर्ड और रात में न जाने की सावधानी दर्ज होगी । ये वन करीब 15 किमी. के दायरे में फैला है वहां जा कर देखों मेरा दावा है तुम लोगों का आज तक ऐसी चीजों से पाला नहीं पड़ा होगा ।

इससे पहले कि मेघना कुछ कह पाती कॉल कट गयी । उसको घबराहट होने लगी । उसने तुरंत कॉल बैक किया पर कॉल नॉट रिचेबल बताने लगा । उसके बाकी साथी उसे आश्चर्य से देख रहे थे । अटकते - अटकते उसने कॉल पर सुनी पूरी बात बता दी । उसके साथी कॉल के बारे में सुनकर परेशान हो गए पर उन्होंने फैसला किया कि वो जंगल रास्ते में ही है तो वे वहां जरूर जाएंगे , देखे तो सही आखिर वहां ऐसा है क्या ।

कुछ समय बाद वो वैन सूचित ढाबे के सामने खड़ी हो गयी । वैन को अजित चला रहा था । उसने इशारों से सबको बताया कि जहां जाना था वहां पहुंच गए है । अजित ने ध्यान से देखा ढाबे के बगल में एक रोड गयी है जो अंधेरे में साफ नजर नहीं आ रही थी । ढाबे के एक पास खड़े व्यक्ति ने उनसे पूछा - कहा जाना है -

छलित वन जाना है - अजित ने बताया

ये आगे से दाएं घूम जाए , 2 किमी. आगे जंगल है ।

मैंने सुना है वहां भूत-प्रेत रहते है - अजित ने पूछा

नहीं साहब .. बहुत बढ़िया जंगल है घूमने लायक । आप बेफिक्र हो कर जाइये । - उस आदमी ने कहा

अजित ने उस आदमी का शुक्रिया अदा किया और अपनी वैन को उस रोड पर मोड़ दिया । अभी थोड़ा से ही आगे बढ़े होंगे उन्हें छलित वन का बोर्ड और सावधानी का बोर्ड दोनों दिख गया । इससे सब को ये तो यकीन हो गया की वे सब सही रास्ते पर है । थोड़ी ही देर में उनकी वैन जंगल के अंदर प्रवेश कर गयी । चारों तरफ घुप अंधेरे में सिर्फ घने पेड़ और कच्चे रोड के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था ।

थोड़ी दूर जाने पर अचानक गाड़ी का एक पहिया कीचड़ में फस गया । जिम्मी और मयंक दो लोग गाड़ी से उतरे और गाड़ी को धक्का देने लगे पर गाड़ी निकली ही नहीं । धीरे - धीरे करके सभी लोग गाड़ी से उतर गए और इधर - उधर देख कर जंगल का मुआयना करने लगे । सब मिल कर गाड़ी को धक्का देने लगे पर गाड़ी का पहिया इस तरह फस गया की निकला ही नही । अचानक उन्हें गाड़ी के अंदर से लॉक होने की आवाज सुनी और वे घबराहट में गाड़ी का दरवाज़ा खोलने का प्रयास करने लगे पर गाड़ी का दरवाज़ा खुला ही नही और अजित गाड़ी के अंदर ही फस गया । न अजित गाड़ी से बाहर आ पा रहा था और न ही बाकी सदस्य गाड़ी के अंदर जा पा रहे थे ।

अभी इस समस्या से समाधान सोच ही रहे थे की तभी मौसम ने करवट बदल ली । मौसम बदल कर बारिश वाला हो गया , बादल ने आसमान पर कब्जा कर लिया और और गरज - चमक दिखाने लगा । साथी सदस्यों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान गाड़ी के अंदर था पर लाख कोशिश के बाद भी वे सभी वैन के अंदर नही जा पा रहे थे । कुछ ही देर में मौसम ने हवा को आंधी - तूफान का रूप दे दिया और उसका मुख वैन की तरफ कर दिया । आंधी - तूफान का वेग करीब 50-60 किमी. प्रतिघंटा की रफ्तार तक था । इस आंधी ने टीम को सोचने का कोई मौका ही नही दिया वे सभी गाड़ी के पीछे छुपने का प्रयास करने लगे पर ये संभव नही हुआ । आंधी के वेग से गाड़ी हिलने लगी उनके पास अब भागने के अलावा कोई और चारा नही था पर वे सभी अजित को छोड़कर जाना नहीं चाहते थे कि तभी कहीं से एक विशाल पेड़ उड़ता हुआ आया और गाड़ी पर ड्राइवर वाले स्थान पर बहुत तेज़ी से गिरा । गाड़ी का आगे का हिस्सा और अजित दोनों उस पेड़ के नीचे दब कर खत्म हो गए ।

पूरी टीम में रोना - पीटना मच गया वे अपनी जान बचाने को बेतहाशा इधर - उधर हो कर भागने लगे और वापस जाने की बजाए दिशा - ब्रह्म होने के कारण जंगल के और अंदर जाने लगे और 3 अलग - अलग ग्रुपों में बंट गए ।

पहला ग्रुप -

पहले ग्रुप में 3 सदस्य है - रैना , सुचिता और हरीश

तीनों जंगल में अंदर ही अंदर भागते जा रहे थे उन्हें घने पेड़ो के अलावा कुछ नही दिख रहा था मोबाइल के फ्लैशलाइट की रोशनी में किसी तरह आगे बढ़े जा रहे थे । आगे बढ़ते - बढ़ते थक गए और एक जगह बैठ कर अजित के लिए दुःख व्यक करने लगे कि तभी हरीश को थोड़ी दूर पर रोशनी का आभास हुआ जैसे वहां कोई रहता हो .. तीनों धीरे - धीरे रोशनी की तरफ पहुंचे तो देखा वो रोशनी एक लालटेन से आ रही थी जो एक छोटी सी झोपड़ी नुमा घर से आ रही थी और अब उन्हें लगने लगा कि इसके अंदर जा कर बचा जा सकता है । तीनों डरते - डरते , धीरे - धीरे उस झोपड़ी के अंदर चले गए ।

दूसरा ग्रुप -

दूसरे ग्रुप में 2 सदस्य थे - मयंक और मेघना

दोनों बेतहाशा भागे जा रहे थे , भागते भागते दोनों थक गए और एक जगह बैठ गए । तभी उन्हें एहसास हुआ की कोई झाड़ियों से उन्हें से देख रहा है थोड़ी ही देर में झाड़ियों से निकल कर एक भेड़िया सामने आ गया । टोर्च और फ्लैशलाइट की रोशनी में वो भेड़िया बहुत बड़ा और भयानक लग रहा था । दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया की - अभी ये अकेला है , इससे पहले केई और आ जाये या तो इसे निपटा दिया जाए या यहां से बच कर भाग निकले । मेघना की नजर तभी अपने बगल में पड़ी एक लकड़ी के टुकड़े पर पड़ी । भेड़िया ने जैसे ही मेघना को झुकते हुए देखा उसने उन दोनों पर छलांग लगा दी ।

तीसरा ग्रुप -

तीसरे ग्रुप में 2 सदस्य थे - जिम्मी और अंकिता

ये दोनों एक दूसरे को पसंद किया करते थे इस वजह से जब भागने का मौका मिला तो दोनों साथ में एक तरफ भाग निकले । भागते - भागते दोनों ऐसी जगह रुके जहां सामने झरना दिख रहा था । अंकिता ने पहले बैठ कर सांस ली फिर झरने की तरफ देखा तो उसे ऐसा लगा जैसे की झरना उसे बुला रहा है । उसे प्यास भी लग रही थी वो झरने के अंदर गयी और झुक पर पानी पीने लगी । 2 घूंट पी कर तीसरा पीने के लिए उसने हाथ पानी के अंदर डाला कि तभी किसी ने उसके दोनों हाथ पकड़ कर खींच लिया और वो पानी में डूबने लगी तभी जिम्मी उसके पीछे पानी में कूद गया और बड़ी मुश्किल से उसने अंकिता को बाहर खीच कर उसकी जान बचाई ।

पहला ग्रुप -

हरीश ने दरवाजा खोला , रैना और सुचिता झोपड़ी के अंदर जा कर देखने लगे और उन्हें जो नजारा दिखा उससे उन्हें लगने लगा कि वो गलत जगह आ गए है । झोपड़ी में कोई नही था सिवाए एक छोटे से स्थान पर महिला के कटे सर को छोड़कर । इसके पहले की दोनों यहां से बाहर भाग पाते की तभी एक इंसानों जैसा दिखने वाला जीव एक हाथ में हरीश का कटा हुआ सिर और एक हाथ में कुल्हाड़ी लिए झोपड़ी के अंदर प्रवेश कर गया और उसने उन दोनों लड़कियों पर हमला कर दिया 10 मिनट तक चले संघर्ष के बाद उस दानव ने उन दोनों लड़कियों के सिर भी काट लिए और तीनों सिर को उस चबूतरे वाली महिला के सिर के सामने रख कर पूजा करने लगा ।

दूसरा ग्रुप -

मयंक और मेघना - एक भेड़िये से उलझते हुए लगभग थक गए की तभी उनकी कमजोरी का फायदा उठा कर भेड़िया मेघना के ऊपर उछला लेकिन रास्ते में मयंक ने रोक लिया और दोनों आपस में ही भीड़ गए । भेड़िये ने पहले पंजे से मयंक को घायल किया और फिर उसकी गर्दन में अपने दांत गड़ा दिए कि तभी मेघना ने लकड़ी के एक सिरे को इतना जोर से मारा भेड़िये के सिर पर कि वो मयंक को छोड़ दूर जा गिरा और फिर मेघना ने भेड़िये के सिर पर तब तक मारा जब तक की वो मर नहीं गया । भेड़िये को मारने के बाद वो मयंक के पास गयी तो पता चला वो मर गया है । रोते हुए मयंक को छोड़ा और जंगल से बाहर निकलने का रास्ता खोजने लगी ।

कुछ ही दूर गयी होगी की उसे चक्कर आया और वो वहीं गिर गयी ।

तीसरा ग्रुप -

जिम्मी और अंकिता एक मुसीबत से बड़े मुश्किल से बचे थे । जैसे तैसे उन्होंने भी बाहर निकलने के बारे में प्रयास करना शुरू किया कि तभी उसे एहसास हुआ की अंकिता जंगल से बाहर जाने की बजाए जंगल के अंदर ले जा रही थी इससे पहले की जिम्मी कुछ सोच पाता । अंकिता ने उस पर हमला कर दिया अपने तेज दांत और नाखुनो से उसके सीने को चीर कर उस पिशाचिनी ने उसका दिल निकाल लिया और अपने रास्ते जाने लगी । तभी झरने के ऊपर एक लाश तैरती हुई दिखने लगी जो अंकिता की थी ।

अगली सुबह -

पुलिस का एक दल उस ढाबे वाले इंसान के फोन करने पर जंगल के अंदर गया और उन्हें बहुत खोजने के बाद भी उन्हें मेघना के अलावा कोई नही मिला । उनकी वैन तो मिली पर उसके अंदर उसके साथी अजित की लाश नही मिली । मेघना को हॉस्पिटल भेज कर पुलिस वालों ने उस रोड को पूरी तरह से सील कर दिया और लोगों का आना - जाना बुरी तरह प्रतिबंधित कर दिया ।

3 दिन बाद मेघना की नींद अस्पताल में खुली जहां पुलिस ने उसका बयान लिया उसके मुताबिक उसे बाकी लोगो के बारे में कोई जानकारी नही है सिर्फ अपना और मयंक को छोड़ कर .. पुलिस ने उसे भरोसा दिया की उनकी टीम उनके बाकी साथी को जरूर खोज लेगी ।

1 हफ्ते बाद -

पुलिस को कोई सुराग हाथ नही लगा, न ही कोई लाश मिली .. पुलिस उन्हें गुमशुदा मानने लगी पर कुछ दिन बाद उन्हें भी लगने लगा उन्हें जंगली जानवर खा लिया होगा । मेघना को सिर्फ कुछ खरोंचे होने के कारण उसे जल्द ही छुट्टी दे दी गयी और वह अपने घर चली गयी । घर की छत पर जा कर वो शांति से एक जगह बैठ कर अपनी साथी को याद कर रो रही थी और अपने बचने का शुक्रिया अदा कर रही थी कि तभी बादलों सेके चाँद बाहर निकल आया और उसकी रोशनी में उसका शरीर बदलने लगा । इससे पहले की वो कुछ समझ पाती वो भेड़िया-मानव में परिवर्तित हो गयी और छत से कूद कर शिकार करने चली गयी ।

समाप्त ।



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