खौफ की वो रात
खौफ की वो रात
डर से उसकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। उसके सामने जो था उसे देखकर उसके रोयें तक डर से खड़े हो गये वह थर-थर कांपने लगे। जिस बात का डर था वही हुआ। इतना सब करके भी कुछ हासिल न हुआ आखिर वह आजाद हो ही गयी जिसे रोक कर रखने के लिए उसने अपने परिवार तक की बलि दे डाली और अपना जीवन भी तबाह कर लिया। वह साक्षात् उसके सामने खड़ी थी।
सफेद चांदी जैसे कमर तक लंबे बाल, लाल-लाल आँखे जिनमें काली नहीं बल्कि सफेद पुतलियाँ थीं , अनगिनत झुर्रियों से भरा चेहरा , लंबे घुटनों तक लटके हाथ जिनपर किसी को फाड़कर रख देने की ताकत रखने वाले बड़े बड़े नाखून, उल्टे तलवे वाले दो बड़े-बड़े, चौड़े-चौड़े पैर। उसके शरीर पर मांस की पतली पर्त थी जिसके पार से उसकी नसें तक दिख रहीं थीं। वह चॉक की तरह सफेद थी और मुर्दे की तरह सर्द
“नामुमकिन। ऐसा ... ऐसा कैसे हो गया ?”
“हा हा हा हा हा हा।“ उसकी हँसी बढ़ती गयी इतना कि उसके लिए कान खुले रखना मुश्किल हो गया। वह कानों को ढककर वहीं जमीन पर बैठ गया और अपनी नादानियों पर रोने लगा। काश कि उसने अपनी पत्नी की बात मानी होती और उस रात रुक गया होता तो आज कम से कम उसका परिवार जीवित होता उसकी बेटी और उसकी पत्नी जीवित होते। वासना इन्सान को अंधा बना देती है। धन की वासना हो या शरीर की।
दस दिन पूर्व........................
“कहां जा रहे हो ?” काजल ने पूछा।
“अब क्या तुमसे पूछे बिना कहीं जा ही नहीं सकता ? मैं मर्द हूँ चार काम होते हैं मुझे तुम्हारी तरह घर पर दिनरात आराम करूँगा तो तुम्हारे खर्चे कैसे उठाऊँगा ?” संदीप को काजल के सवाल हमेशा नागवार गुजरते थे।
“अच्छा तो मैं दिन भर घर पर आराम करती हूँ, तो तुम्हारे बूढे माँ बाप को रोटियाँ ठेपकर क्या वो तुम्हारी ऑफिस वाली रखैल खिलाती है, या वो चार्टेड अकाउंटेंट जो तुम्हारे फाइनैंशियल और फिजिकल अकांउट का ख्याल रखती है। “
“तो ? मेरे माता पिता का ख्याल रखना तुम्हारा फर्ज है। मैं भी तुम्हें खाना कपड़ा और घर दे रहा हूँ तो क्या तुम मेरे माता पिता के लिए इतना भी नहीं करोगी। फिर इससे अच्छा मैं नौकरानी ही रख लेता कम से कम माता पिता की सेवा का अहसान तो न चढ़ाती।“
“ओह तो पत्नी और नौकरानी में कोई फर्क नहीं तुम्हारी नजर में। और तुम कितना खिला दे रहे हो मुझे। आज जो तुम्हारा बिजनेस खड़ा हुआ है इसे खड़ा करने के लिए पैसे मेरे बाप ने दिये थे। वरना तुम्हारी औकात ही क्या थी?”
“बिजनेस पैसे से नहीं दिमाग से चलता है। दहेज तो हर बाप देता है अपनी बेटी को इसमें क्या अहसान किया उन्होंने ? मैंने उनके थोड़े से पैसे को आज कुबेर के खजाने में बदल दिया है। यह सब मैंने अपनी बुद्धि से किया है इसमें तुम्हारे पिता का कोई हाथ नहीं। “
“हाँ बिल्कुल पर वो अगर तुम्हें इतना दहेज न देते तो तुम्हारा क्या होता ?”
“जो होता सो होता कम से कम तुम्हारे जैसी चुड़ैल तो न पल्ले पड़ती। हुंह। हटो मेरे रास्ते से और दोबारा मुझे कभी मत रोकना
वरना .............” उसने अपनी पत्नी को धक्का दिया तो वह गिर पड़ी और रोने लगी पर वह उसके लिए नहीं रुका।
आज सुप्रिया के साथ उसकी खास मीटिंग हैं। वह उसकी कन्स्ट्रकशन एण्ड रियल स्टेट कम्पनी से एक एशोशिएट के तौर पर कुछ महीने पहले ही जुड़ी है और चार फ्लैट हाथों हाथ बिकवा दिये साथ ही वह बहुत खूबसूरत है और संदीप पर फिदा भी है। लड़कियाँ पैसों पर मरती हैं जबसे उसके पास पैसा आया है जाने कितनी ही महिलाएं उस पर फिदा हो गयी हैं जबकि कुछ साल पहले तक लड़कियां उसे ऐसे देखा करती थीं जैसे वो कोई कीड़ा मकोड़ा हो। काजल के पिता ने जब उसकी सहायता की तब वह अपने नये प्रोजेक्ट पर काम करने के कारण कर्ज में डूबा था उन्होंने न सिर्फ अपने रसूख से उसका प्रोजेक्ट डेवेलपमेंट ऑथारिटी से पास करवाया बल्कि बिजनेस के लिए बड़ी रकम भी दी। बदले में उसे उनकी काली कलूटी और घरेलू टाइप लड़की से शादी करनी थी। ऐसी लड़कियाँ शादी के लिए एकदम पर्फेक्ट होती हैं। देखो न उसके माता पिता तो अपनी बहू की तारीफ करते नहीं थकते और बहू के लिए बेटे से भी लड़ जाते हैं। संदीप इसके लिए उसकी प्रशंसा करता है पर इसका अर्थ यह नहीं कि वो उसके चरणों में पड़ा रहे। अरे आज उसे एक से एक खूबसूरत लड़कियाँ भाव दिया करती हैं और वो उनको निराश नहीं कर सकता।
आज ही सुप्रिया ने उसे इशारों इशारों में अपने फ्लैट पर रात में मीटिंग के लिए बुलाया है। रात की मीटिंग के लिए संदीप कैसे इनकार कर सकता है। जिस फूल को दूर से सूँघ रहा था आज उसे पास से सूँघने का अवसर आया है। काजल समझती क्यों नहीं आखिर उसे किस चीज की कमी है? और फिर उसके पास भी तो अब संदीप के लिए न प्रेम बचा है न शक्ति। तो ऐसे में अगर वो बाहर की औरतों का साथ करता है तो क्या गलत करता है ? अरे उसके ऑफिस के अदना मैनेजर ने जो उसका नौकर है दो दो औरतें रख रखीं हैं। दोनों साथ-साथ एक ही घर में रहती हैं फिर भी उन्हें कोई समस्या नहीं है। कम से कम संदीप तो महिलाओं को अपने गले में नहीं लटकाता वह आजाद रहना चाहता है। रात गई बात गई।
सुप्रिया ने अपने घर का जो पता दिया था वो शहर से दूर एक ऐसे एरिया का था जहाँ एक्का दुक्का मकान थे वो भी बहुत दूर दूर बने थे। बाकी के प्लाट्स में बाउंड्री बनाकर छोड़ दिया गया था। ये एक डेवलपिंग प्रोजेक्ट है। संदीप ये देखकर खुश हो गया क्योंकि ऐसी जगहों पर प्रायः लोग ताका झांकी कम ही करते हैं। क्रीम कलर के मकान के सामने काले रंग के लोहे के गेट के बाँयी ओर लगी घंटी बजाने के कुछ देर इंतजार करने के पश्चात् सुप्रिया ने दरवाजा खोला।
“आज तो मैडम एक कत्ल कर चुकीं हैं दूसरा करने का इरादा है।“
“कत्ल? मैंने किसका कत्ल किया है ?”
“किसी का तो कत्ल करके उसका खून पिया होगा तभी तो होंठ इतने सुर्ख हैं। और दूसरा कत्ल तो मेरा ही होने वाला है।“
“हा हा। येस मिस्टर संदीप आपका कत्ल तो मैं जरूर करूँगी। भीतर आइये।“ उसने मादक अंदाज में उसे भीतर आने की दावत दी।
एक बड़े और सुसज्जित ड्राइँगरूम में टेबल पर वाइन के साथ कुछ खाने पीने का सामान सजा था। संदीप ने बहुत सी औरतों की संगत की थी पर ऐसी शानदार औरत उसे पहली बार मिली है। इससे पहले जो भी थीं वो दबी सिकुडी बुद्धू टाइप लड़कियाँ ही थीं जो उसके ऑफिस में काम करती थीं। उनमें से कुछ तो उसपर शादी करने का दबाव डालने लगीं तो उसने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। पर सुप्रिया, वो खुले विचारों की है, वो वाइन पीती है , सिगरेट पीती है , भड़काऊ कपड़े पहनती है और रोज किसी नये पुरुष के साथ नजर आती है। ये गले पड़ू टाइप मैटेरियल नहीं है। वह इंग्लिश भी बहुत अच्छी बोल लेती है। संदीप तो उसका साथ पाकर फूला न समाया।
“क्या लेंगे मिस्टर भाटिया चाय या कॉफी ?”
“सामने वाइन रखकर चाय कॉफी की बात करती हो। मैं तो यही लूँगा। “
“गुड च्वाइस।“
वाईन पीते हुए वो सुप्रिया के डीप नेक गाऊन की ओर बेशर्मी से देखकर बातें करता रहा और प्रिया ने कोई ऐतराज नहीं किया। वाईन का नशा और सुप्रिया का नशा जब दोनों उस पर हावी हो गये तो उसने सुप्रिया को अपने पास खींच लिया वो खिलखिलायी।
“कब से इस पल का इंतजार था आज तो मैं अपनी इच्छा जरूर पूरी करुँगा।“
“तो रोका किसने है चलो बेडरूम उस तरफ है।“
अगले कुछ सेकेण्ड्स में वो दोनों बेड पर थे। सुप्रिया उसके ऊपर सवार थी।
“यकीन मानों मुझे पता है कि मुझे तुमसे क्या चाहिए और तुम्हें भी इसमें बहुत मजा आने वाला है।“
इसके बाद जो कुछ भी हुआ वह बताने के योग्य नहीं पर जब सुबह उसकी आँख खुली तो वो बिस्तर पर अकेला पड़ा था। उसका शरीर फोड़े की तरह दर्द कर रहा था। शरीर पर कई स्थानों पर गहरे खरोंच के निशान थे जिनसे खून निकल रहा था।
“उफ ये तो जंगली बिल्ली है। पर ........... मुझे रात का कुछ भी याद क्यों नहीं। वो मेरे ऊपर थी और............. उसके बाद की मेमोरी तो मानों डिलीट हो गई हो। लगता है हमने बहुत इन्ज्वाय किया। सुप्रिया कहाँ हो तुम ?” उसे आवाजें देता वो पूरे घर में ढूँढता रहा पर वो कहीं नहीं दिखी। वॉशरूम से शावर की आवाज से पता चला की वो वहीं है। संदीप के चेहरे पर चमक आ गयी। उसने वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया तो भीतर से आवाज आई। “दरवाजा खुला है आ जाओ।“
सुप्रिया नग्न अवस्था में टब में बैठी थी वो खुद इतनी नशीली थी कि कल रात संदीप को नशे की जरूरत नहीं थी। उसने भी अपने कपड़े उतारे और टब में घुस गया सुप्रिया फिर खिलखिलाई। और उसकी गोद में बैठ गयी।
“तुम तो एकदम जंगली हो मुझे कितने घाव दिये तुमने।“
“मैंने कहा था न कि मैं जानती हूं कि तुम्हें और मुझे क्या चाहिए ? अपने आपको पूरी तरह मुझे सौंप दो और मेरे हो जाओं फिर तुम्हें इस संसार की जरूरत ही नहीं रहेगी। मैं तुम्हारी हर रात अनोखी कर दूँगी। हर रात तुम्हें एक नया अनुभव दूँगी। तुम्हें किसी और की जरूरत ही नहीं रहेगी। “ वो उसकी आँखों में झंकते हुए बोली।
“हाँ मैं जानता हूँ कि तुम ऐसा कर सकती हो।“ उसने सुप्रिया को चूमना शुरु कर दिया और सुप्रिया ने उसे। फिर अचानक उसे महसूर हुआ कि सुप्रिया किसी जोंक की तरह उसकी गरदन पर चिपक गयी है। उसके दाँत गरदन को छेद कर संदीप का खून चूस रहे थे। संदीप ने झटके से उसे दूर किया तो देखा कि सुप्रिया के दो बड़े बड़े दाँत बाहर की ओर निकले थे जिनपर खून लगा था और उसकी गरदन से भी खून बह रहा था।
“ये ये क्या ?”
“दर्द का अपना मजा है जानेमन।“
संदीप की आँखों में आतंक छा गया ओह तो कल रात ये उसका रक्त चूस रही थी और संदीप को नशे के कारण कुछ भी याद नहीं था।
“तुम तुम हो क्या ?”
“पिशाचिनी। नाम सुना है कभी। मैं शमशान की एक पिशाचिनी जिसका नाम यक्षिणी है उसकी उपासक हूँ। उसी ने मुझे ये शक्ति दी है कि मैं अनन्त काल तक सुन्दर और जवान रह सकती हूं। मैं तुम्हें किसी भी औरत के रूप में प्यार कर सकती हूँ तुम बस कल्पना तो करो। तुम्हारी फेवरेट एक्ट्रेस कौन है ? ऐस्वर्य राय। “ अगले ही पल ऐश्वर्य राय उसकी गोद में बैठी थी। फिर वो सोनाक्षी सिन्हा में बदल गई फिर आलिया भट्ट और फिर ऐंजेलीना जोली फिर सनी लियोनी से होते हुए वापस अपने असली रूप में आ गयी।
“देखा। किस औरत के साथ सोना चाहते हो तुम? मैं तुम्हें हर औरत का सुख दे सकती हूँ न सिर्फ उसके जैसी दिख सकती हूँ बल्कि उसके जैसा ही व्यवहार व विचार भी व्यक्त कर सकती हूँ एकदम कार्बन कॉपी या यूँ कहो मैं किसी के भी क्लोन में स्वयं को बदल सकती हूँ। तो अब तुम्हें बहुत सी औरतों के साथ फलर्ट करने की जरूरत नहीं बस मुझे खुश रखो और खुद खुश रहो। बस बदले में तुम्हें मुझे जवान और बच्चों का खून देना होगा। अगर तुम अपना रक्त बचाना चाहते हो तो मुझे दूसरों का ताजा गर्म रक्त लाकर दो। “ उसकी उंगलियाँ संदीप के शरीर पर फिर रहीं थीं पर उसके दिमाग से काम वासना भाग चुकी थी।
उसकी आँखों के सामने अब अपनी पत्नी का चेहरा घूम रहा था जो उसका कितना ध्यान रखती थी। उसके कहे बिना उसका हर काम समय पर कर देती। वो नहाकर निकलता तो उसके कपड़े तहकिये बिस्तर पर होते , जूते मोजे बेड के पास रखे होते और नाश्ता टेबल पर उसके लंच बॉक्स के साथ रखा मिलता। बच्चे स्कूल जा चुके होते और माँ बाबू जी को चाय नाश्ता के बाद दवा की पहली खुराक भी मिल चुकी होती।
अगर पिछले साल काजल पिताजी की तबीयत बिगड़ते देख कर तुरंत हार्ट अटैक का अंदाजा लगा कर उन्हें शहर के बड़े हार्ट हॉस्पिटल न ले जाती तो आज पिताजी जीवित ही न होते। वह सबकी जरूरत का ख्याल रखती रही और बदले में उसे क्या मिला ? एक स्वार्थी पति जिसे उसकी कोई परवाह नहीं वह तो उसे देखने हॉस्पिटल भी नहीं गया जब उसने बच्ची को जन्म दिया था। उसने काम में बिजी होने का बहाना बनाया था पर वो अपनी प्राइवेट स्क्रेटरी के साथ मजे कर रहा था। उसके माता पिता व सास ससुर ने मिलकर काजल की देखभाल की। संदीप के माता पिता जहाँ अपनी बहू की तारीफ करते नहीं थकते और उसका पूरा ध्यान रखने की कोशिश करते हैं, वहीं उसकी नजर में शायद वो नौकरानी से भी गयी गुजरी थी। पर अब वो सोच रहा है कि काश उस देवी को उसने धोखा न दिया होता तो आज यह दिन देखना न पड़ता। काश वो अपनी पत्नी की बात मानकर वो कल रात रुक गया होता।
“मुझे छोड़ दो मैं माफी मांगता हूँ अब मैं किसी औरत के चक्कर में नहीं पड़ूँगा।“ उसने हाथ जोड़कर सुप्रिया से कहा।
“हा हा हाऊ फनी ................. मैं किसी दूसरी औरत के चक्कर में पड़ने ही नहीं दूँगी। “ सुप्रिया ने जीभ निकाली जो दो भागों में बँटी हुई थी और उसने संदीप को सीने से लेकर माथे तक अपनी लार टपकाती जीभ से चाट लिया। अगले ही पल वो एक बहुत सुंदर लड़की में बदलकर उसके साथ संभोग करने लगी पर संदीप को अचानक ही वासना के प्रति विरक्ति हो गयी। जो ज्ञान ऋषि मुनी वर्षों तपस्या करके हासिल कर पाते हैं वह ज्ञान उसने एक रात में प्राप्त कर लिया कि वासना का दास होने में कोई लाभ नहीं।
बेल बजाने के कुछ देर बाद काजल ने दरवाजा खोला तो संदीप को देख कर चौंक गयी।
“ये क्या हुआ आपकी तबीयत तो ठीक है ? कल तक तो ठीक थे अचानक एक रात में क्या हो गया ? क्या आप बीमार हैं?” ये वही काजल है जिसके प्रश्न संदीप के कानों में पिघले शीशे की तरह घुलते थे पर आज उसकी आवाज लता मांगेशकर के समान सुरीली लग रही थी।
“वो मेरा एक छोटा सा ऐक्सिडेंट हो गया था पर अब ठीक हूँ। माँ बाबूजी कहाँ हैं?” काजल फिर चौंकी संदीप तो कभी अपने माता पिता के हाल चाल भी नहीं लेता था। कपड़े बदलकर चाय नाश्ता कर बाहर कॉलोनी में टहलने निकल जाता फिर डिनर पर लौटता। कहता था कि बिजनेस कॉल्स करनी है पर वो जानती है कि वो लड़कियों से बात किया करता था।
“दोनों अपने कमरे में हैं। आराम कर रहे हैं।“
“मेरे लिये चाय और नाश्ता वहीं ला दो। गुड़िया कहाँ है।“
“दादी के पास ही खेलते खेलते सो गयी। “
संदीप कपड़े बदलकर माता पिता के कमरे में पहुँचा तो माँ ने उसका चेहरा देखते ही पहचान लिया।
“क्या हुआ संदीप तू कुछ परेशान है ?” माँ ने पूछा।
“बेटा बिजनेस में अप्स और डाऊन लगे रहेंगे। इसमें परेशान होने की क्या बात है ? जिन्दगी हमेशा खूबसूरत है। आज ज्यादा है तो ज्यादा सही, कल कम होगा तो कम सही। हम हर तरह से खुश रह लेंगे। तू हिम्मत न हार।“ पिताजी ने धौल देकर कहा। पता नहीं कितने सालों के बाद वो आज इस तरह अपने परिवार के पास बैठा था। अपनी दो वर्षीय सोती हुई बेटी का गाल चूमा तो एहसास हुआ कि वो रुई सी नर्म और नाजुक थी। इससे पहले उसने कभी उसे गोद में लिया ही नहीं। उसके पास समय ही कहाँ था इन सब सेंटिमेंटल दिखावों के लिये।
आज परिवार मे सभी खुश थे। आज से पहले तो मानों कोई बोलना ही नहीं जानता था सभी चुपचाप अपने काम में लगे रहा करते थे, पर आज सबके साथ समय बिताकर उसे बहुत अच्छा लगा, वो ऑफिस भी नहीं गया। रात में काजल जब उसके बगल में आकर लेटी तो वो खिसककर उसके करीब गया और उसकी कमर में हाथ फँसा कर लेट गया काजल दूसरी तरफ देख रही थी।
“कुछ तो है जो तुम छुपा रहे हो।“
तभी उसका फोन बजा ये सुप्रिया थी वो काजल से एक्सक्यूज मी बोलकर छत पर भागा। काजल ने मुंह बिचका दिया। उसे अंदाजा था कि किसी न किसी लड़की का फोन होगा।
“डार्लिंग। तुम तो मुझे भूल ही गये। जल्दी मेंरे पास आ जाओ वरना मैं तुम्हारे पास आती हूँ। और मेरे लिए गर्म रक्त का बंदोबस्त करना न भूलना वरना आज भी तुम्हारा ही खून पियूँगी। “
संदीप ने ऑफिस में काम करने वाली एक लड़की को फोन लगाया जो अपने माता पिता से अलग इस शहर में नौकरी की तलाश में आई है और अपने बॉस को खुश करके प्रोमोशन पाने के लिए कुछ भी कर सकती है। संदीप ने कई बार उसे सांकेतिक रूप से छुआ है और उसने कभी विरोध नहीं किया बल्कि एक मोहक मुस्कान के रूप में रिप्लाई किया।
“देविका इस समय क्या कर रही हो ?”
“सर मैं बस एक क्लायंट से ही बात कर रही कल वो साइट विजिट करेगा और दो फ्लैट खरीदेगा।“
“गुड मैं तुम्हारे काम से खुश हूँ। अगर तुम्हें कोई परेशानी न हो तो क्या मैं तुम्हे इस समय तुम्हारे घर से पिक कर सकता हूँ। मैं सुरक्षित तुम्हें वापस छोड़ भी दूँगा। एक जरूरी मीटिंग में जाना पड़ रहा है जहाँ मुझे एक और कम्पनी चाहिए। मैं तुम्हें ओवर टाइम दूँगा और कल ही तुम्हारी सैलरी भी बढ़ा दूंगा। समझी।“
“जी सर आप साथ है तो डर किस बात का है। मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आ जाइये। “
सुप्रिया को देखकर देविका चौंकी पर इससे पहले कि वह कुछ समझती सुप्रिया ने उस पर छलांग लगा दी और उसे जमीन पर गिराकर उसके चारों ओर अपने हाथ पाँव कस लिये और उसके गले में अपने दाँत गड़ा दिये। संदीप यह विभत्स्य सीन नहीं देख सका तो बेडरूम में चला गया। कुछ देर बाद –
“अब उसकी लाश को ठिकाने लगा देना।“
“लाश? पर तुमने उसे जान से क्यों मारा ?”
तो क्या अपने राजदारों को पनपने दूँ ? वो बाहर किसी को मेरा राज बता देती तो। तुम्हें तो इसलिये छोड़ा था मेरी जान क्योंकि तुमपर दिल आ गया था मेरा और मेरी यक्षिणीमाता का भी। और तुम्हारे जरिये हमें रोज गर्म रक्त भी तो मिलेगा। बदले में मैं तुम्हें दूँगी आनन्द, परमानन्द।“ सुप्रिया देखते ही देखती अत्यंत रूपवान खूबसूरत स्त्री में बदल गयी पर कामवासना तो मानों संदीप के दिमाग से गायब हो चुकी थी वो यही सोच रहा था कि कैसे वो रोज एक शरीर का इंतजाम करेगा इस चुड़ैल की भूख मिटाने के लिये।
अपनी इच्छा पूर्ति के बाद सुप्रिया ने उसे छोड़ा तो वह उसी के गार्डन में गड्ढा खोदने लगा और देविका की लाश वहीं दफना दी। अब वह रोज कभी किसी तो कभी किसी कॉलगर्ल को लेकर आता और देविका के हवाले कर देता। वो स्वयं कमजोर होता था रहा था मानों देविका उसका भी खून पी रही हो।
“कहाँ जा रहे हो ? मैं तुम्हें नहीं जाने दूँगी रोज रात तुम कहीं चले जाते हो, दस दिन से ऑफिस भी नहीं गये। देखो खुद को? कैसे सूखे जा रहे हो जैसे तुम्हारे शरीर से खून चूस लिया हो किसी ने। तुम्हें मेरी कसम हम सबकी कसम मुझे बताओ क्या हुआ है ?” काजल ने तड़पकर कहा।
“मुझे जाने दो काजल आज रात मैं फैसला करके ही आऊँगा। “ काजल के साथ साथ उसकी आँखों में भी आँसू उतर आये।
वो सुप्रिया के घर अकेला पहुँचा।
“ये क्या आज किसी को नहीं लाये चलो कोई बात नहीं आज थोड़ा सा तुम्हारा खून पीकर डायटिंग कर लूँगी।“ सुप्रिया उसे किस करने आगे बढ़ी तो उसने हाथ से रुकने का इशारा किया।
“मैं अब कभी तुम्हारे लिए खून का बंदोबस्त नहीं करूँगा। चाहे तुम मुझे मार ही क्यों न दो। “
“मैं तुम्हें नहीं मारूँगी मैं तो तुम्हें प्यार करुँगी। “ तभी डोर बेल बजी। सुप्रिया चौंकी और दरवाजा खोला तो पाया कि दरवाजे पर काजल अपनी एक साल की बच्ची को लिए खड़ी थी। वो सुप्रिया को धक्का देकर भीतर आ गयी।
“काजल तुम यहाँ क्यों आईँ ?” संदीप उसे देखकर भय से पागल ही हो गया।
“मैं तुम्हें लेने आई हूँ। मैं नहीं जानती कि इस औरत के और तुम्हारे बीच क्या चल रहा है? मैं बस इतना जानती हूँ कि आज मैं अपनी बच्ची के पिता और अपने पति को यहाँ लेकर जाऊँगी। “
“ये बच्ची विशेष नक्षत्रों में जन्मी है यही है जो मुझे जिला सकती है।“ सुप्रिया के भीतर से जैसे एक भारी आवाज स्वतः निकली।
“क्या मतलब ?” संदीप ने पूछा।
“मैं जिस यक्षिणीकी पूजा करती हूँ वह मेरे शरीर के भीतर रहती हैं और अब वो बाहर आना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें विशेष नक्षत्रों में जन्मी बच्ची का खून मांस चाहिए। तुम्हें मैनें इसी कारण चुना था मेरा असली मकसद तो यही था। मैं यक्षिणी के हाथों स्वयं मजबूर हूँ और उसे भोजन देने के लिए ही तुमसे रक्त की मांग करती रही हूँ। पर अब मेरी देवी इस बच्ची की बलि लेकर स्वयं का शरीर हासिल कर सकेंगी। “ सुप्रिया के चेहरे पर संतोष का भाव था।
“क्या बकवास कर रही है ये औरत ?” काजल ने कातर निगाहों से अपने पति को देखा। तभी अचानक इससे पहले कि कोई कुछ समझता सुप्रिया ने बच्ची को काजल से छीन लिया। काजल चीखी और उसकी ओर झपटी पर वो एक सेंकेण्ड में उससे बहुत दूर खड़ी थी उसका मुंह खुला और खुलता गया जबतक कि वह बच्ची को निगलने लायक न हो गया।
संदीप सुप्रिया को रोकने उसपर झपटा पर कोई फायदा नहीं तबतक वो बच्ची को निगल चुकी थी।
“चुड़ैल तूने मेरी मासूम बेटी को खा लिया। मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूँगा।“ उसने सुप्रिया की गरदन पकड़ ली पर सुप्रिया गायब होकर कमरे के दूसरे कोने पर प्रकट हो गयी। काजल यह देखकर बेहोश ही हो गयी कि अभी अभी एक चुड़ैल ने उसकी बच्ची जिंदा निगल ली थी।
“ये तो मेरी देवी का भोजन था और अब मेरा भोजन।“ सुप्रिया बेहोश काजल के ऊपर बैठ गई और चारों हाथ पैरों से उसे जकड़कर उसका खून पीने लगी। संदीप ने उसे छुड़ाने का बहुत प्रयास किया और कमरे मे रखे फर्नीचर सुप्रिया के सिर पर फोड़ दिये पर वो टस से मस न हुई तब तक जबतक कि काजल का पूरा खून न चूस लिया। फिर उसने भयानक डकार ली। एक सुंदर लड़की भी कितनी भयानक लग सकती है कोई यह दृश्य देखता तो जानता।
“अब मेरा समय पूरा हुआ। मेरी देवी को संसार में आने का रास्ता मिल गया। अब तुम उन्हें नहीं रोक पाओगे और आज से तुम पूरी तरह उनके सेक्स गुलाम हो। इतना कहते ही वह हंसने लगी। और हंसते हंसते उसका पेट फट गया और उसमें से निकली एक भयानक बूढ़ी औरत सफेद चांदी जैसे कमर तक लंबे बाल, लाल-लाल आँखे जिनमें काली नहीं बल्कि सफेद पुतलियाँ थीं , अनगिनत झुर्रियों से भरा चेहरा , लंबे घुटनों तक लटके हाथ जिनपर किसी को फाड़कर रख देने की ताकत रखने वाले बड़े बड़े नाखून, उल्टे तलवे वाले दो बड़े-बड़े, चौड़े-चौड़े पैर। उसके शरीर पर मांस की पतली पर्त थी जिसके पार से उसकी नसें तक दिख रहीं थीं। वह चॉक की तरह सफेद थी और मुर्दे की तरह सर्द।
डर से उसकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। उसके सामने जो था उसे देखकर उसके रोयें तक डर से खड़े हो गये वह थर-थर कांपने लगा। जिस बात का डर था वही हुआ। इतना सब करके भी कुछ हासिल न हुआ आखिर वह आजाद हो ही गयी जिसे रोक कर रखने के लिए उसने अपने परिवार की बलि तक दे डाली और अपना जीवन भी तबाह कर लिया। वह साक्षात् उसके सामने खड़ी थी।
वह यक्षिणी नामक पिशाचिनि जिसके विषय में सुप्रिया ने उसे बताया था। सुप्रिया के अनुसार जबतक वो उसे रक्त देता रहेगा वो उस बूढ़ी यक्षिणी को रोक कर रखने की ताकत रखेगी और उसे बचाकर रखेगी पर जिस दिन उसने उसे रक्त न दिया उस दिन वो बूढ़ी यक्षिणी सुप्रिया पर हावी हो जाएगी और संदीप को सदा के लिए अपना सेक्स गुलाम बना लेगी और वो अपने सेक्स गुलाम के साथ बहुत ही बुरा बर्ताव करती है। संदीप के पास अब कोई चारा नहीं बचा था उसकी वासना उसे घोर अंधकार में ले आई थी। उसे मृत्यु साफ दिखाई दे रही थी पर यक्षिणीउसे आसानी से मरने भी न देगी।
कुछ समय पश्चात् वो बिस्तर पर था और यक्षिणीउसके ऊपर सवार थी। “यकीन करो मैं जानती हूँ कि मुझे तुमसे और तुम्हें मुझसे क्या चाहिए ? मैं तुम्हें खुश कर दूँगी और तुम मुझे खुश कर दो। अब मुझे सुप्रिया की खाल की आवश्यकता नहीं। अब मैं खुलकर तुम्हें प्यार कर सकती हूँ। “ सुप्रिया के साथ बिताई वो पहली रात जो वो भूल गया था वो उसे पूरी तरह याद आ गयी। वो रात उसने इसी यक्षिणीके साथ बितायी थी। उसे सिर्फ सुप्रिया का साथ याद रहता था जब पिशाचिनी सुप्रिया पर हावी होती तो वह सबकुछ भूल जाता था। उसके शरीर पर गहरे घाव भी इसी पिशाचिनी ने दिये थे। अब वो कभी इस कैद से जीते जी आजाद नहीं हो सकता।
दो सप्ताह के पश्चात् पुलिस को पड़ोसियों ने शिकायत की कि उस घर से तेज दुर्गन्ध आ रही थी। ताला तोड़ा गया तो उस खाली पड़े घर के ड्राइँगरूम में एक स्त्रि और बेडरूम में एक पुरुष की लाश थी। दोनों के शरीर से सारा खून निचुड़ चुका था और रक्त की कमी के कारण ही दोनों की मृत्यु हुई थी। पुलिस ने मीडिया के सवालों से बचने के लिए आनन फानन रिपोर्ट बनाई कि आवारा पति अपनी प्रेमिका के साथ पकड़ा गया तो उसने पत्नी और बच्ची को मारकर स्वयं आत्महत्या कर ली। अगर गार्डन की तलाशी लेते तो और भी कुछ मिलता पर पुलिस को केस बंद करने की ज्यादा जल्दी थी।
डर से उसकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। उसके सामने जो था उसे देखकर उसके रोयें तक डर से खड़े हो गये वह थर-थर कांपने लगे। जिस बात का डर था वही हुआ। इतना सब करके भी कुछ हासिल न हुआ आखिर वह आजाद हो ही गयी जिसे रोक कर रखने के लिए उसने अपने परिवार तक की बलि दे डाली और अपना जीवन भी तबाह कर लिया। वह साक्षात् उसके सामने खड़ी थी।
सफेद चांदी जैसे कमर तक लंबे बाल, लाल-लाल आँखे जिनमें काली नहीं बल्कि सफेद पुतलियाँ थीं , अनगिनत झुर्रियों से भरा चेहरा , लंबे घुटनों तक लटके हाथ जिनपर किसी को फाड़कर रख देने की ताकत रखने वाले बड़े बड़े नाखून, उल्टे तलवे वाले दो बड़े-बड़े, चौड़े-चौड़े पैर। उसके शरीर पर मांस की पतली पर्त थी जिसके पार से उसकी नसें तक दिख रहीं थीं। वह चॉक की तरह सफेद थी और मुर्दे की तरह सर्द
“नामुमकिन। ऐसा ... ऐसा कैसे हो गया ?”
“हा हा हा हा हा हा।“ उसकी हँसी बढ़ती गयी इतना कि उसके लिए कान खुले रखना मुश्किल हो गया। वह कानों को ढककर वहीं जमीन पर बैठ गया और अपनी नादानियों पर रोने लगा। काश कि उसने अपनी पत्नी की बात मानी होती और उस रात रुक गया होता तो आज कम से कम उसका परिवार जीवित होता उसकी बेटी और उसकी पत्नी जीवित होते। वासना इन्सान को अंधा बना देती है। धन की वासना हो या शरीर की।
दस दिन पूर्व........................
“कहां जा रहे हो ?” काजल ने पूछा।
“अब क्या तुमसे पूछे बिना कहीं जा ही नहीं सकता ? मैं मर्द हूँ चार काम होते हैं मुझे तुम्हारी तरह घर पर दिनरात आराम करूँगा तो तुम्हारे खर्चे कैसे उठाऊँगा ?” संदीप को काजल के सवाल हमेशा नागवार गुजरते थे।
“अच्छा तो मैं दिन भर घर पर आराम करती हूँ, तो तुम्हारे बूढे माँ बाप को रोटियाँ ठेपकर क्या वो तुम्हारी ऑफिस वाली रखैल खिलाती है, या वो चार्टेड अकाउंटेंट जो तुम्हारे फाइनैंशियल और फिजिकल अकांउट का ख्याल रखती है। “
“तो ? मेरे माता पिता का ख्याल रखना तुम्हारा फर्ज है। मैं भी तुम्हें खाना कपड़ा और घर दे रहा हूँ तो क्या तुम मेरे माता पिता के लिए इतना भी नहीं करोगी। फिर इससे अच्छा मैं नौकरानी ही रख लेता कम से कम माता पिता की सेवा का अहसान तो न चढ़ाती।“
“ओह तो पत्नी और नौकरानी में कोई फर्क नहीं तुम्हारी नजर में। और तुम कितना खिला दे रहे हो मुझे। आज जो तुम्हारा बिजनेस खड़ा हुआ है इसे खड़ा करने के लिए पैसे मेरे बाप ने दिये थे। वरना तुम्हारी औकात ही क्या थी?”
“बिजनेस पैसे से नहीं दिमाग से चलता है। दहेज तो हर बाप देता है अपनी बेटी को इसमें क्या अहसान किया उन्होंने ? मैंने उनके थोड़े से पैसे को आज कुबेर के खजाने में बदल दिया है। यह सब मैंने अपनी बुद्धि से किया है इसमें तुम्हारे पिता का कोई हाथ नहीं। “
“हाँ बिल्कुल पर वो अगर तुम्हें इतना दहेज न देते तो तुम्हारा क्या होता ?”
“जो होता सो होता कम से कम तुम्हारे जैसी चुड़ैल तो न पल्ले पड़ती। हुंह। हटो मेरे रास्ते से और दोबारा मुझे कभी मत रोकना
वरना .............” उसने अपनी पत्नी को धक्का दिया तो वह गिर पड़ी और रोने लगी पर वह उसके लिए नहीं रुका।
आज सुप्रिया के साथ उसकी खास मीटिंग हैं। वह उसकी कन्स्ट्रकशन एण्ड रियल स्टेट कम्पनी से एक एशोशिएट के तौर पर कुछ महीने पहले ही जुड़ी है और चार फ्लैट हाथों हाथ बिकवा दिये साथ ही वह बहुत खूबसूरत है और संदीप पर फिदा भी है। लड़कियाँ पैसों पर मरती हैं जबसे उसके पास पैसा आया है जाने कितनी ही महिलाएं उस पर फिदा हो गयी हैं जबकि कुछ साल पहले तक लड़कियां उसे ऐसे देखा करती थीं जैसे वो कोई कीड़ा मकोड़ा हो। काजल के पिता ने जब उसकी सहायता की तब वह अपने नये प्रोजेक्ट पर काम करने के कारण कर्ज में डूबा था उन्होंने न सिर्फ अपने रसूख से उसका प्रोजेक्ट डेवेलपमेंट ऑथारिटी से पास करवाया बल्कि बिजनेस के लिए बड़ी रकम भी दी। बदले में उसे उनकी काली कलूटी और घरेलू टाइप लड़की से शादी करनी थी। ऐसी लड़कियाँ शादी के लिए एकदम पर्फेक्ट होती हैं। देखो न उसके माता पिता तो अपनी बहू की तारीफ करते नहीं थकते और बहू के लिए बेटे से भी लड़ जाते हैं। संदीप इसके लिए उसकी प्रशंसा करता है पर इसका अर्थ यह नहीं कि वो उसके चरणों में पड़ा रहे। अरे आज उसे एक से एक खूबसूरत लड़कियाँ भाव दिया करती हैं और वो उनको निराश नहीं कर सकता।
आज ही सुप्रिया ने उसे इशारों इशारों में अपने फ्लैट पर रात में मीटिंग के लिए बुलाया है। रात की मीटिंग के लिए संदीप कैसे इनकार कर सकता है। जिस फूल को दूर से सूँघ रहा था आज उसे पास से सूँघने का अवसर आया है। काजल समझती क्यों नहीं आखिर उसे किस चीज की कमी है? और फिर उसके पास भी तो अब संदीप के लिए न प्रेम बचा है न शक्ति। तो ऐसे में अगर वो बाहर की औरतों का साथ करता है तो क्या गलत करता है ? अरे उसके ऑफिस के अदना मैनेजर ने जो उसका नौकर है दो दो औरतें रख रखीं हैं। दोनों साथ-साथ एक ही घर में रहती हैं फिर भी उन्हें कोई समस्या नहीं है। कम से कम संदीप तो महिलाओं को अपने गले में नहीं लटकाता वह आजाद रहना चाहता है। रात गई बात गई।
सुप्रिया ने अपने घर का जो पता दिया था वो शहर से दूर एक ऐसे एरिया का था जहाँ एक्का दुक्का मकान थे वो भी बहुत दूर दूर बने थे। बाकी के प्लाट्स में बाउंड्री बनाकर छोड़ दिया गया था। ये एक डेवलपिंग प्रोजेक्ट है। संदीप ये देखकर खुश हो गया क्योंकि ऐसी जगहों पर प्रायः लोग ताका झांकी कम ही करते हैं। क्रीम कलर के मकान के सामने काले रंग के लोहे के गेट के बाँयी ओर लगी घंटी बजाने के कुछ देर इंतजार करने के पश्चात् सुप्रिया ने दरवाजा खोला।
“आज तो मैडम एक कत्ल कर चुकीं हैं दूसरा करने का इरादा है।“
“कत्ल? मैंने किसका कत्ल किया है ?”
“किसी का तो कत्ल करके उसका खून पिया होगा तभी तो होंठ इतने सुर्ख हैं। और दूसरा कत्ल तो मेरा ही होने वाला है।“
“हा हा। येस मिस्टर संदीप आपका कत्ल तो मैं जरूर करूँगी। भीतर आइये।“ उसने मादक अंदाज में उसे भीतर आने की दावत दी।
एक बड़े और सुसज्जित ड्राइँगरूम में टेबल पर वाइन के साथ कुछ खाने पीने का सामान सजा था। संदीप ने बहुत सी औरतों की संगत की थी पर ऐसी शानदार औरत उसे पहली बार मिली है। इससे पहले जो भी थीं वो दबी सिकुडी बुद्धू टाइप लड़कियाँ ही थीं जो उसके ऑफिस में काम करती थीं। उनमें से कुछ तो उसपर शादी करने का दबाव डालने लगीं तो उसने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। पर सुप्रिया, वो खुले विचारों की है, वो वाइन पीती है , सिगरेट पीती है , भड़काऊ कपड़े पहनती है और रोज किसी नये पुरुष के साथ नजर आती है। ये गले पड़ू टाइप मैटेरियल नहीं है। वह इंग्लिश भी बहुत अच्छी बोल लेती है। संदीप तो उसका साथ पाकर फूला न समाया।
“क्या लेंगे मिस्टर भाटिया चाय या कॉफी ?”
“सामने वाइन रखकर चाय कॉफी की बात करती हो। मैं तो यही लूँगा। “
“गुड च्वाइस।“
वाईन पीते हुए वो सुप्रिया के डीप नेक गाऊन की ओर बेशर्मी से देखकर बातें करता रहा और प्रिया ने कोई ऐतराज नहीं किया। वाईन का नशा और सुप्रिया का नशा जब दोनों उस पर हावी हो गये तो उसने सुप्रिया को अपने पास खींच लिया वो खिलखिलायी।
“कब से इस पल का इंतजार था आज तो मैं अपनी इच्छा जरूर पूरी करुँगा।“
“तो रोका किसने है चलो बेडरूम उस तरफ है।“
अगले कुछ सेकेण्ड्स में वो दोनों बेड पर थे। सुप्रिया उसके ऊपर सवार थी।
“यकीन मानों मुझे पता है कि मुझे तुमसे क्या चाहिए और तुम्हें भी इसमें बहुत मजा आने वाला है।“
इसके बाद जो कुछ भी हुआ वह बताने के योग्य नहीं पर जब सुबह उसकी आँख खुली तो वो बिस्तर पर अकेला पड़ा था। उसका शरीर फोड़े की तरह दर्द कर रहा था। शरीर पर कई स्थानों पर गहरे खरोंच के निशान थे जिनसे खून निकल रहा था।
“उफ ये तो जंगली बिल्ली है। पर ........... मुझे रात का कुछ भी याद क्यों नहीं। वो मेरे ऊपर थी और............. उसके बाद की मेमोरी तो मानों डिलीट हो गई हो। लगता है हमने बहुत इन्ज्वाय किया। सुप्रिया कहाँ हो तुम ?” उसे आवाजें देता वो पूरे घर में ढूँढता रहा पर वो कहीं नहीं दिखी। वॉशरूम से शावर की आवाज से पता चला की वो वहीं है। संदीप के चेहरे पर चमक आ गयी। उसने वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया तो भीतर से आवाज आई। “दरवाजा खुला है आ जाओ।“
सुप्रिया नग्न अवस्था में टब में बैठी थी वो खुद इतनी नशीली थी कि कल रात संदीप को नशे की जरूरत नहीं थी। उसने भी अपने कपड़े उतारे और टब में घुस गया सुप्रिया फिर खिलखिलाई। और उसकी गोद में बैठ गयी।
“तुम तो एकदम जंगली हो मुझे कितने घाव दिये तुमने।“
“मैंने कहा था न कि मैं जानती हूं कि तुम्हें और मुझे क्या चाहिए ? अपने आपको पूरी तरह मुझे सौंप दो और मेरे हो जाओं फिर तुम्हें इस संसार की जरूरत ही नहीं रहेगी। मैं तुम्हारी हर रात अनोखी कर दूँगी। हर रात तुम्हें एक नया अनुभव दूँगी। तुम्हें किसी और की जरूरत ही नहीं रहेगी। “ वो उसकी आँखों में झंकते हुए बोली।
“हाँ मैं जानता हूँ कि तुम ऐसा कर सकती हो।“ उसने सुप्रिया को चूमना शुरु कर दिया और सुप्रिया ने उसे। फिर अचानक उसे महसूर हुआ कि सुप्रिया किसी जोंक की तरह उसकी गरदन पर चिपक गयी है। उसके दाँत गरदन को छेद कर संदीप का खून चूस रहे थे। संदीप ने झटके से उसे दूर किया तो देखा कि सुप्रिया के दो बड़े बड़े दाँत बाहर की ओर निकले थे जिनपर खून लगा था और उसकी गरदन से भी खून बह रहा था।
“ये ये क्या ?”
“दर्द का अपना मजा है जानेमन।“
संदीप की आँखों में आतंक छा गया ओह तो कल रात ये उसका रक्त चूस रही थी और संदीप को नशे के कारण कुछ भी याद नहीं था।
“तुम तुम हो क्या ?”
“पिशाचिनी। नाम सुना है कभी। मैं शमशान की एक पिशाचिनी जिसका नाम यक्षिणी है उसकी उपासक हूँ। उसी ने मुझे ये शक्ति दी है कि मैं अनन्त काल तक सुन्दर और जवान रह सकती हूं। मैं तुम्हें किसी भी औरत के रूप में प्यार कर सकती हूँ तुम बस कल्पना तो करो। तुम्हारी फेवरेट एक्ट्रेस कौन है ? ऐस्वर्य राय। “ अगले ही पल ऐश्वर्य राय उसकी गोद में बैठी थी। फिर वो सोनाक्षी सिन्हा में बदल गई फिर आलिया भट्ट और फिर ऐंजेलीना जोली फिर सनी लियोनी से होते हुए वापस अपने असली रूप में आ गयी।
“देखा। किस औरत के साथ सोना चाहते हो तुम? मैं तुम्हें हर औरत का सुख दे सकती हूँ न सिर्फ उसके जैसी दिख सकती हूँ बल्कि उसके जैसा ही व्यवहार व विचार भी व्यक्त कर सकती हूँ एकदम कार्बन कॉपी या यूँ कहो मैं किसी के भी क्लोन में स्वयं को बदल सकती हूँ। तो अब तुम्हें बहुत सी औरतों के साथ फलर्ट करने की जरूरत नहीं बस मुझे खुश रखो और खुद खुश रहो। बस बदले में तुम्हें मुझे जवान और बच्चों का खून देना होगा। अगर तुम अपना रक्त बचाना चाहते हो तो मुझे दूसरों का ताजा गर्म रक्त लाकर दो। “ उसकी उंगलियाँ संदीप के शरीर पर फिर रहीं थीं पर उसके दिमाग से काम वासना भाग चुकी थी।
उसकी आँखों के सामने अब अपनी पत्नी का चेहरा घूम रहा था जो उसका कितना ध्यान रखती थी। उसके कहे बिना उसका हर काम समय पर कर देती। वो नहाकर निकलता तो उसके कपड़े तहकिये बिस्तर पर होते , जूते मोजे बेड के पास रखे होते और नाश्ता टेबल पर उसके लंच बॉक्स के साथ रखा मिलता। बच्चे स्कूल जा चुके होते और माँ बाबू जी को चाय नाश्ता के बाद दवा की पहली खुराक भी मिल चुकी होती
अगर पिछले साल काजल पिताजी की तबीयत बिगड़ते देख कर तुरंत हार्ट अटैक का अंदाजा लगा कर उन्हें शहर के बड़े हार्ट हॉस्पिटल न ले जाती तो आज पिताजी जीवित ही न होते। वह सबकी जरूरत का ख्याल रखती रही और बदले में उसे क्या मिला ? एक स्वार्थी पति जिसे उसकी कोई परवाह नहीं वह तो उसे देखने हॉस्पिटल भी नहीं गया जब उसने बच्ची को जन्म दिया था। उसने काम में बिजी होने का बहाना बनाया था पर वो अपनी प्राइवेट स्क्रेटरी के साथ मजे कर रहा था। उसके माता पिता व सास ससुर ने मिलकर काजल की देखभाल की। संदीप के माता पिता जहाँ अपनी बहू की तारीफ करते नहीं थकते और उसका पूरा ध्यान रखने की कोशिश करते हैं, वहीं उसकी नजर में शायद वो नौकरानी से भी गयी गुजरी थी। पर अब वो सोच रहा है कि काश उस देवी को उसने धोखा न दिया होता तो आज यह दिन देखना न पड़ता। काश वो अपनी पत्नी की बात मानकर वो कल रात रुक गया होता।
“मुझे छोड़ दो मैं माफी मांगता हूँ अब मैं किसी औरत के चक्कर में नहीं पड़ूँगा।“ उसने हाथ जोड़कर सुप्रिया से कहा।
“हा हा हाऊ फनी ................. मैं किसी दूसरी औरत के चक्कर में पड़ने ही नहीं दूँगी। “ सुप्रिया ने जीभ निकाली जो दो भागों में बँटी हुई थी और उसने संदीप को सीने से लेकर माथे तक अपनी लार टपकाती जीभ से चाट लिया। अगले ही पल वो एक बहुत सुंदर लड़की में बदलकर उसके साथ संभोग करने लगी पर संदीप को अचानक ही वासना के प्रति विरक्ति हो गयी। जो ज्ञान ऋषि मुनी वर्षों तपस्या करके हासिल कर पाते हैं वह ज्ञान उसने एक रात में प्राप्त कर लिया कि वासना का दास होने में कोई लाभ नहीं।
बेल बजाने के कुछ देर बाद काजल ने दरवाजा खोला तो संदीप को देख कर चौंक गयी।
“ये क्या हुआ आपकी तबीयत तो ठीक है ? कल तक तो ठीक थे अचानक एक रात में क्या हो गया ? क्या आप बीमार हैं?” ये वही काजल है जिसके प्रश्न संदीप के कानों में पिघले शीशे की तरह घुलते थे पर आज उसकी आवाज लता मांगेशकर के समान सुरीली लग रही थी।
“वो मेरा एक छोटा सा ऐक्सिडेंट हो गया था पर अब ठीक हूँ। माँ बाबूजी कहाँ हैं?” काजल फिर चौंकी संदीप तो कभी अपने माता पिता के हाल चाल भी नहीं लेता था। कपड़े बदलकर चाय नाश्ता कर बाहर कॉलोनी में टहलने निकल जाता फिर डिनर पर लौटता। कहता था कि बिजनेस कॉल्स करनी है पर वो जानती है कि वो लड़कियों से बात किया करता था।
“दोनों अपने कमरे में हैं। आराम कर रहे हैं।“
“मेरे लिये चाय और नाश्ता वहीं ला दो। गुड़िया कहाँ है।“
“दादी के पास ही खेलते खेलते सो गयी। “
संदीप कपड़े बदलकर माता पिता के कमरे में पहुँचा तो माँ ने उसका चेहरा देखते ही पहचान लिया।
“क्या हुआ संदीप तू कुछ परेशान है ?” माँ ने पूछा।
“बेटा बिजनेस में अप्स और डाऊन लगे रहेंगे। इसमें परेशान होने की क्या बात है ? जिन्दगी हमेशा खूबसूरत है। आज ज्यादा है तो ज्यादा सही, कल कम होगा तो कम सही। हम हर तरह से खुश रह लेंगे। तू हिम्मत न हार।“ पिताजी ने धौल देकर कहा। पता नहीं कितने सालों के बाद वो आज इस तरह अपने परिवार के पास बैठा था। अपनी दो वर्षीय सोती हुई बेटी का गाल चूमा तो एहसास हुआ कि वो रुई सी नर्म और नाजुक थी। इससे पहले उसने कभी उसे गोद में लिया ही नहीं। उसके पास समय ही कहाँ था इन सब सेंटिमेंटल दिखावों के लिये।
आज परिवार मे सभी खुश थे। आज से पहले तो मानों कोई बोलना ही नहीं जानता था सभी चुपचाप अपने काम में लगे रहा करते थे, पर आज सबके साथ समय बिताकर उसे बहुत अच्छा लगा, वो ऑफिस भी नहीं गया। रात में काजल जब उसके बगल में आकर लेटी तो वो खिसककर उसके करीब गया और उसकी कमर में हाथ फँसा कर लेट गया काजल दूसरी तरफ देख रही थी।
“कुछ तो है जो तुम छुपा रहे हो।“
तभी उसका फोन बजा ये सुप्रिया थी वो काजल से एक्सक्यूज मी बोलकर छत पर भागा। काजल ने मुंह बिचका दिया। उसे अंदाजा था कि किसी न किसी लड़की का फोन होगा।
“डार्लिंग। तुम तो मुझे भूल ही गये। जल्दी मेंरे पास आ जाओ वरना मैं तुम्हारे पास आती हूँ। और मेरे लिए गर्म रक्त का बंदोबस्त करना न भूलना वरना आज भी तुम्हारा ही खून पियूँगी। “
संदीप ने ऑफिस में काम करने वाली एक लड़की को फोन लगाया जो अपने माता पिता से अलग इस शहर में नौकरी की तलाश में आई है और अपने बॉस को खुश करके प्रोमोशन पाने के लिए कुछ भी कर सकती है। संदीप ने कई बार उसे सांकेतिक रूप से छुआ है और उसने कभी विरोध नहीं किया बल्कि एक मोहक मुस्कान के रूप में रिप्लाई किया।
“देविका इस समय क्या कर रही हो ?”
“सर मैं बस एक क्लायंट से ही बात कर रही कल वो साइट विजिट करेगा और दो फ्लैट खरीदेगा।“
“गुड मैं तुम्हारे काम से खुश हूँ। अगर तुम्हें कोई परेशानी न हो तो क्या मैं तुम्हे इस समय तुम्हारे घर से पिक कर सकता हूँ। मैं सुरक्षित तुम्हें वापस छोड़ भी दूँगा। एक जरूरी मीटिंग में जाना पड़ रहा है जहाँ मुझे एक और कम्पनी चाहिए। मैं तुम्हें ओवर टाइम दूँगा और कल ही तुम्हारी सैलरी भी बढ़ा दूंगा। समझी।“
“जी सर आप साथ है तो डर किस बात का है। मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आ जाइये। “
सुप्रिया को देखकर देविका चौंकी पर इससे पहले कि वह कुछ समझती सुप्रिया ने उस पर छलांग लगा दी और उसे जमीन पर गिराकर उसके चारों ओर अपने हाथ पाँव कस लिये और उसके गले में अपने दाँत गड़ा दिये। संदीप यह विभत्स्य सीन नहीं देख सका तो बेडरूम में चला गया। कुछ देर बाद –
“अब उसकी लाश को ठिकाने लगा देना।“
“लाश? पर तुमने उसे जान से क्यों मारा ?”
“तो क्या अपने राजदारों को पनपने दूँ ? वो बाहर किसी को मेरा राज बता देती तो। तुम्हें तो इसलिये छोड़ा था मेरी जान क्योंकि तुमपर दिल आ गया था मेरा और मेरी यक्षिणीमाता का भी। और तुम्हारे जरिये हमें रोज गर्म रक्त भी तो मिलेगा। बदले में मैं तुम्हें दूँगी आनन्द, परमानन्द।“ सुप्रिया देखते ही देखती अत्यंत रूपवान खूबसूरत स्त्री में बदल गयी पर कामवासना तो मानों संदीप के दिमाग से गायब हो चुकी थी वो यही सोच रहा था कि कैसे वो रोज एक शरीर का इंतजाम करेगा इस चुड़ैल की भूख मिटाने के लिये।
अपनी इच्छा पूर्ति के बाद सुप्रिया ने उसे छोड़ा तो वह उसी के गार्डन में गड्ढा खोदने लगा और देविका की लाश वहीं दफना दी। अब वह रोज कभी किसी तो कभी किसी कॉलगर्ल को लेकर आता और देविका के हवाले कर देता। वो स्वयं कमजोर होता था रहा था मानों देविका उसका भी खून पी रही हो।
“कहाँ जा रहे हो ? मैं तुम्हें नहीं जाने दूँगी रोज रात तुम कहीं चले जाते हो, दस दिन से ऑफिस भी नहीं गये। देखो खुद को? कैसे सूखे जा रहे हो जैसे तुम्हारे शरीर से खून चूस लिया हो किसी ने। तुम्हें मेरी कसम हम सबकी कसम मुझे बताओ क्या हुआ है ?” काजल ने तड़पकर कहा।
“मुझे जाने दो काजल आज रात मैं फैसला करके ही आऊँगा। “ काजल के साथ साथ उसकी आँखों में भी आँसू उतर आये।
वो सुप्रिया के घर अकेला पहुँचा।
“ये क्या आज किसी को नहीं लाये चलो कोई बात नहीं आज थोड़ा सा तुम्हारा खून पीकर डायटिंग कर लूँगी।“ सुप्रिया उसे किस करने आगे बढ़ी तो उसने हाथ से रुकने का इशारा किया।
“मैं अब कभी तुम्हारे लिए खून का बंदोबस्त नहीं करूँगा। चाहे तुम मुझे मार ही क्यों न दो। “
“मैं तुम्हें नहीं मारूँगी मैं तो तुम्हें प्यार करुँगी। “ तभी डोर बेल बजी। सुप्रिया चौंकी और दरवाजा खोला तो पाया कि दरवाजे पर काजल अपनी एक साल की बच्ची को लिए खड़ी थी। वो सुप्रिया को धक्का देकर भीतर आ गयी।
“काजल तुम यहाँ क्यों आईँ ?” संदीप उसे देखकर भय से पागल ही हो गया।
“मैं तुम्हें लेने आई हूँ। मैं नहीं जानती कि इस औरत के और तुम्हारे बीच क्या चल रहा है? मैं बस इतना जानती हूँ कि आज मैं अपनी बच्ची के पिता और अपने पति को यहाँ लेकर जाऊँगी। “
“ये बच्ची विशेष नक्षत्रों में जन्मी है यही है जो मुझे जिला सकती है।“ सुप्रिया के भीतर से जैसे एक भारी आवाज स्वतः निकली।
“क्या मतलब ?” संदीप ने पूछा।
“मैं जिस यक्षिणीकी पूजा करती हूँ वह मेरे शरीर के भीतर रहती हैं और अब वो बाहर आना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें विशेष नक्षत्रों में जन्मी बच्ची का खून मांस चाहिए। तुम्हें मैनें इसी कारण चुना था मेरा असली मकसद तो यही था। मैं यक्षिणी के हाथों स्वयं मजबूर हूँ और उसे भोजन देने के लिए ही तुमसे रक्त की मांग करती रही हूँ। पर अब मेरी देवी इस बच्ची की बलि लेकर स्वयं का शरीर हासिल कर सकेंगी। “ सुप्रिया के चेहरे पर संतोष का भाव था।
“क्या बकवास कर रही है ये औरत ?” काजल ने कातर निगाहों से अपने पति को देखा। तभी अचानक इससे पहले कि कोई कुछ समझता सुप्रिया ने बच्ची को काजल से छीन लिया। काजल चीखी और उसकी ओर झपटी पर वो एक सेंकेण्ड में उससे बहुत दूर खड़ी थी उसका मुंह खुला और खुलता गया जबतक कि वह बच्ची को निगलने लायक न हो गया।
संदीप सुप्रिया को रोकने उसपर झपटा पर कोई फायदा नहीं तबतक वो बच्ची को निगल चुकी थी।
“चुड़ैल तूने मेरी मासूम बेटी को खा लिया। मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूँगा।“ उसने सुप्रिया की गरदन पकड़ ली पर सुप्रिया गायब होकर कमरे के दूसरे कोने पर प्रकट हो गयी। काजल यह देखकर बेहोश ही हो गयी कि अभी अभी एक चुड़ैल ने उसकी बच्ची जिंदा निगल ली थी।
“ये तो मेरी देवी का भोजन था और अब मेरा भोजन।“ सुप्रिया बेहोश काजल के ऊपर बैठ गई और चारों हाथ पैरों से उसे जकड़कर उसका खून पीने लगी। संदीप ने उसे छुड़ाने का बहुत प्रयास किया और कमरे मे रखे फर्नीचर सुप्रिया के सिर पर फोड़ दिये पर वो टस से मस न हुई तब तक जबतक कि काजल का पूरा खून न चूस लिया। फिर उसने भयानक डकार ली। एक सुंदर लड़की भी कितनी भयानक लग सकती है कोई यह दृश्य देखता तो जानता।
“अब मेरा समय पूरा हुआ। मेरी देवी को संसार में आने का रास्ता मिल गया। अब तुम उन्हें नहीं रोक पाओगे और आज से तुम पूरी तरह उनके सेक्स गुलाम हो। इतना कहते ही वह हंसने लगी। और हंसते हंसते उसका पेट फट गया और उसमें से निकली एक भयानक बूढ़ी औरत सफेद चांदी जैसे कमर तक लंबे बाल, लाल-लाल आँखे जिनमें काली नहीं बल्कि सफेद पुतलियाँ थीं , अनगिनत झुर्रियों से भरा चेहरा , लंबे घुटनों तक लटके हाथ जिनपर किसी को फाड़कर रख देने की ताकत रखने वाले बड़े बड़े नाखून, उल्टे तलवे वाले दो बड़े-बड़े, चौड़े-चौड़े पैर। उसके शरीर पर मांस की पतली पर्त थी जिसके पार से उसकी नसें तक दिख रहीं थीं। वह चॉक की तरह सफेद थी और मुर्दे की तरह सर्द।
डर से उसकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। उसके सामने जो था उसे देखकर उसके रोयें तक डर से खड़े हो गये वह थर-थर कांपने लगा। जिस बात का डर था वही हुआ। इतना सब करके भी कुछ हासिल न हुआ आखिर वह आजाद हो ही गयी जिसे रोक कर रखने के लिए उसने अपने परिवार की बलि तक दे डाली और अपना जीवन भी तबाह कर लिया। वह साक्षात् उसके सामने खड़ी थी।
वह यक्षिणी नामक पिशाचिनि जिसके विषय में सुप्रिया ने उसे बताया था। सुप्रिया के अनुसार जबतक वो उसे रक्त देता रहेगा वो उस बूढ़ी यक्षिणी को रोक कर रखने की ताकत रखेगी और उसे बचाकर रखेगी पर जिस दिन उसने उसे रक्त न दिया उस दिन वो बूढ़ी यक्षिणी सुप्रिया पर हावी हो जाएगी और संदीप को सदा के लिए अपना सेक्स गुलाम बना लेगी और वो अपने सेक्स गुलाम के साथ बहुत ही बुरा बर्ताव करती है। संदीप के पास अब कोई चारा नहीं बचा था उसकी वासना उसे घोर अंधकार में ले आई थी। उसे मृत्यु साफ दिखाई दे रही थी पर यक्षिणीउसे आसानी से मरने भी न देगी।
कुछ समय पश्चात् वो बिस्तर पर था और यक्षिणीउसके ऊपर सवार थी। “यकीन करो मैं जानती हूँ कि मुझे तुमसे और तुम्हें मुझसे क्या चाहिए ? मैं तुम्हें खुश कर दूँगी और तुम मुझे खुश कर दो। अब मुझे सुप्रिया की खाल की आवश्यकता नहीं। अब मैं खुलकर तुम्हें प्यार कर सकती हूँ। “ सुप्रिया के साथ बिताई वो पहली रात जो वो भूल गया था वो उसे पूरी तरह याद आ गयी। वो रात उसने इसी यक्षिणीके साथ बितायी थी। उसे सिर्फ सुप्रिया का साथ याद रहता था जब पिशाचिनी सुप्रिया पर हावी होती तो वह सबकुछ भूल जाता था। उसके शरीर पर गहरे घाव भी इसी पिशाचिनी ने दिये थे। अब वो कभी इस कैद से जीते जी आजाद नहीं हो सकता।
दो सप्ताह के पश्चात् पुलिस को पड़ोसियों ने शिकायत की कि उस घर से तेज दुर्गन्ध आ रही थी। ताला तोड़ा गया तो उस खाली पड़े घर के ड्राइँगरूम में एक स्त्रि और बेडरूम में एक पुरुष की लाश थी। दोनों के शरीर से सारा खून निचुड़ चुका था और रक्त की कमी के कारण ही दोनों की मृत्यु हुई थी। पुलिस ने मीडिया के सवालों से बचने के लिए आनन फानन रिपोर्ट बनाई कि आवारा पति अपनी प्रेमिका के साथ पकड़ा गया तो उसने पत्नी और बच्ची को मारकर स्वयं आत्महत्या कर ली। अगर गार्डन की तलाशी लेते तो और भी कुछ मिलता पर पुलिस को केस बंद करने की ज्यादा जल्दी थी।

