Swati Rani

Drama Inspirational Tragedy


4.7  

Swati Rani

Drama Inspirational Tragedy


कचरा

कचरा

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एक शहर था रामपुर ,उसमें एक कचरा का गाड़ी चलाने वाला हरिलाल नाम का आदमी रहता था ! वो सब जगह गाड़ी ले ले कर जाता और उसके कामगार उस कचरे को इकठ्ठा करके उसकी गाडी में डाल देते, और वो सारा गाड़ी का सामान पास वाले नहर में जा कर पलट देता, मतलब वो नहर नाली ही बन गया था एक तरह से सोचो! हालांकि हरिलाल की सरकारी नौकरी थी और ऊपरी कमाई भी खुब थी, पर हरिलाल के बच्चे इस नौकरी से खुश ना थे, उनको हरिलाल को अपने स्कूल ले जाने और उनका काम बताने में शर्म आता था!


इससे हरिराम बडा व्यथित रहता था!यद्यपि हरिराम कि कमाई अच्छी थी तो उसके बच्चे इंगलिश स्कूल मे पढ़ते थे! बच्चे किसी भी बात पर बोल देते, आप तो कचरा ढोते हैं, आपको क्या पता! इधर शहर के एक मोहल्ले के लोग बहुत अजीब थे!वहाँ हरिलाल के कामगारों को कचरा उठाने में बड़ी तकलीफ होती थी क्योंकि वहीं के लोग बेतरतीब कचरा फेंक देते थे, हरिलाल ने नगर निगम को कितनी बार कहा पर उनके कान पर जूं तक ना रेंगी ! फिर उसने एक उपाय निकाला, सबसे चंदा जमा करके, अलग- अलग रंग के डब्बे लाया! काला डब्बा जो था वो कुडे-कचरे का था, लाल था शीशे के सामान के लिये, ब्लु था प्लास्टिक के सामान के लिये, और पीला था, काॅटन, बैंडेज के लिये, सब पर लेबल चिपका दिये ! अब सब उसी हिसाब से कचरा डालते, तो सबको सुविधा होती थी! 

ये सब देख कर नगर निगम वालों ने आगामी चुनाव से पहले सारे शहर में वैसा ही डब्बा लगा दिया! फिर उसी साल उनके शहर को भारत के सबसे साफ शहर का ईनाम भी मिला, पूरे शहर में हरिलाल कचरे वाले कि तारीफ होने लगी!पर घर की मुर्गी दाल बराबर होती है, हरिसिंह के बेटे कुछ ज्यादा ही पढ गये थे, जैसे शादी हुयी अपनी- अपनी बीवी को ले कर अलग हो लिये, बहाना दिया हमने तो पूरी जिंदगी ताने सुने कचरे वाला का बेटा पर हम अपने बच्चों को आपसे दूर रखना चाहते हैं! 

बस हरिलाल,उसकी बीवी और उनका नौकर रघु रह गये! हरिलाल को बहुत बुरा लगा, अब वो कुछ बडा करने कि सोचने लगा, कि अपने बेटो को सबक सिखाये! उस वक्त पूरेभारत में सब लोग प्लास्टिक बंद पर जोर दे रहे थे, पर अभी लागू नहीं हुआ था! हरिलाल ने पेपर में देखा कि , मणिपुर में 10 ऐसे फैक्ट्री हैं जहाँ, प्लास्टिक रिसायकल होता है! उसके दिमाग में एक विचार कौंधा!

 

अगले दिन बैग पैक कर चल दिया रघु के साथ मणिपुर, रिसायकल प्लांट में बात किया और आ गये दोनो शहर वापस! अब हरिलाल ने अपने शहर के कचरा रिसायकल कि सोची, उसके लिये उन्होंने नगर निगम में बात कि, सब तैयार रहो थे क्योंकि इससे उनके शहर का नहर भी साफ हो जाता! 

उसने काले, लाल, पीले कचरे के डब्बे के सामान को तो रघु से कह कर जलवा दिया, पर ब्लु डब्बे का कचरा जिसमें प्लास्टिक था जमा करने लगा! 

जब कचरा एक गाड़ी हो गया तो मणिपुर पहुंचा आया, बदले में उसे पैसे मिले! अब हरिसिंह ने जाकर उस शहर के मंत्री से बात कि, उन्होंने ऊपर, अब पूरेराज्य में कचरा रिसायकल होने लगा और इसका इंचार्ज हरिसिंह था! धीरे-धीरे उसने रिसायकल की मशीन खुद ले ली, और काफी अमीर बन गया! 

फिर कुछ दिन बाद हरिसिंह के बेटे बाहर वेटिंग रुम में इंतजार कर रहे थे, पर हरिसिंह ने ये कह कर उनको टरका दिया कि कचरे वाला कचरे चुनने में व्यस्त है, कभी और मिलने आना!


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